Bhopal में बाघ का आतंक, जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी में छात्र पर हमला, दोस्त की बहादुरी से बची जान
Bhopal Tiger News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसी घटना ने सबको दहला दिया, जिसने शहर की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कैंपस के पास पहली बार एक बाघ ने इंसान पर हमला किया। शिकार बना एक छात्र, मोहम्मद बोरा, जिस पर बाघ ने झपट्टा मारकर गंभीर चोट पहुंचाई।
अगर मोहम्मद का दोस्त सूर्यांश सिसोदिया हिम्मत न दिखाता, तो यह घटना और भी खतरनाक साबित हो सकती थी। इस हमले ने न केवल यूनिवर्सिटी प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही को उजागर किया, बल्कि यह सवाल भी उठाया कि क्या भोपाल अब बाघों के खतरे की चपेट में आ चुका है?

क्या हुआ था उस शाम?
यह सनसनीखेज घटना गुरुवार, 4 सितंबर 2025 की शाम को घटी। जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी का कैंपस, जो भोपाल के मुरलीनगर क्षेत्र में कालीसोत बैराज के पास है, वहाँ मोहम्मद बोरा अपने दोस्त सूर्यांश सिसोदिया के साथ टहल रहा था। यह इलाका कैंपस की बाउंड्री के करीब है, जो जंगल से सटा हुआ है। अचानक, झाड़ियों से एक बाघ निकला और मोहम्मद पर हमला कर दिया। बाघ के पंजों से मोहम्मद के शरीर में एक इंच गहरा घाव हो गया, और वह खून से लथपथ होकर गिर पड़ा।
लेकिन इस खौफनाक मंजर में सूर्यांश ने हिम्मत नहीं हारी। उसने जोर-जोर से शोर मचाया और पास पड़ी एक छड़ी से हल्ला करके बाघ को भगाने की कोशिश की। सूर्यांश की इस बहादुरी की वजह से बाघ डरकर जंगल की ओर भाग गया, और मोहम्मद की जान बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर सूर्यांश ने फौरन हिम्मत न दिखाई होती, तो यह हमला जानलेवा हो सकता था।
घायल छात्र की हालत और परिजनों का डर
हमले के बाद मोहम्मद को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में गहरा घाव था, लेकिन समय पर इलाज मिलने की वजह से उनकी हालत अब स्थिर है। डर और सदमे में डूबे परिजनों ने उन्हें अस्पताल से घर ले गए। मोहम्मद की माँ ने रोते हुए बताया, "मेरा बेटा रोज की तरह दोस्त के साथ कैंपस में टहलने गया था। हमें क्या पता था कि वहाँ बाघ आएगा? अगर सूर्यांश न होता, तो मेरा बेटा शायद आज हमारे बीच न होता।"
परिजनों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गुस्सा जाहिर किया। मोहम्मद के पिता ने कहा, "हम अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं, जंगल में नहीं। यूनिवर्सिटी को चाहिए था कि कैंपस की सुरक्षा पुख्ता हो।"
वन विभाग और यूनिवर्सिटी की कार्रवाई
घटना की खबर फैलते ही वन विभाग तुरंत हरकत में आया। अधिकारियों ने कैंपस का दौरा किया और आसपास लगे CCTV कैमरों की जाँच शुरू की। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "हमले की जगह पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ऐसा लगता है कि यह बाघ पास के रतापानी वन्यजीव अभयारण्य से भटककर शहर की ओर आया था।"
वन विभाग ने जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है। यूनिवर्सिटी को अपनी बाउंड्री वॉल और फेंसिंग को तुरंत दुरुस्त करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, उस रास्ते को, जहाँ हमला हुआ, रात के समय पूरी तरह बंद कर दिया गया है। छात्रों और आसपास के लोगों को सतर्क रहने और रात में अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
वन विभाग की जांच में पता चला है कि कालीसोत बैराज के आसपास के जंगल में हाल के महीनों में पांच बाघों की गतिविधियां देखी गई हैं। यह इलाका यूनिवर्सिटी से ज्यादा दूर नहीं है, जिसने खतरे को और गंभीर बना दिया है।
पहले भी दिखा था बाघ का खतरा
यह कोई पहला मौका नहीं है जब जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के आसपास बाघ देखा गया हो। 2023 में एक तिग्रिणी कैंपस के पास CCTV में कैद हुई थी। उस समय वन विभाग ने चेतावनी जारी की थी, लेकिन कोई मानव-पशु टकराव नहीं हुआ था। इस बार, एक छात्र पर हमला होने से स्थिति चिंताजनक हो गई है।
स्थानीय लोग और छात्र अब डर के साये में जी रहे हैं। एक छात्रा ने बताया, "हम लोग अक्सर कैंपस के बाहर टहलते थे, लेकिन अब डर लगता है। यूनिवर्सिटी को जल्दी कुछ करना चाहिए।"
यूनिवर्सिटी और वन विभाग पर सवाल
यह घटना भोपाल में बाघों के बढ़ते खतरे को उजागर करती है। जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी का कैंपस रतापानी वन्यजीव अभयारण्य के पास है, जो बाघों का प्राकृतिक आवास है। लेकिन यूनिवर्सिटी की बाउंड्री इतनी कमजोर कैसे थी कि एक बाघ अंदर घुस आया? एक अभिभावक ने गुस्से में कहा, "हम अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं, न कि जंगल में। यूनिवर्सिटी की लापरवाही से मेरे बेटे की जान खतरे में पड़ गई।"
वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। भोपाल में पहले भी MANIT और NLIU जैसे संस्थानों के पास बाघ देखे गए हैं। 2022 में भोपाल-जबलपुर हाईवे पर एक बाघ की मौत भी ऐसी ही परिस्थितियों में हुई थी। फिर भी, रतापानी अभयारण्य के आसपास सतर्कता बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
बाघों का बढ़ता खतरा
रतापानी वन्यजीव अभयारण्य को बाघ अभयारण्य का दर्जा देने की मांग सालों से चल रही है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी तक अधूरी है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की बढ़ती आबादी और जंगल की कटाई ने उन्हें शहरों की ओर धकेल दिया है। विशेषज्ञ डॉ. रवि मेहता ने बताया, "रतापानी में करीब 40 बाघ हैं। अगर बाउंड्री और निगरानी को मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएँ और बढ़ेंगी।"
सोशल मीडिया पर गुस्सा और चिंता
यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। X पर लोगों ने यूनिवर्सिटी और वन विभाग की लापरवाही की जमकर आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, "भोपाल में बाघ का कैंपस में घुसना डरावना है। प्रशासन को अब जागना चाहिए, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता है।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "सूर्यांश की बहादुरी की तारीफ करनी होगी, लेकिन यह घटना भोपाल की सुरक्षा पर सवाल उठाती है।"
प्रशासन की अपील और भविष्य के कदम
वन विभाग ने लोगों से शांति बनाए रखने और सतर्क रहने की अपील की है। मुख्य वन्यजीव संरक्षक शुभ्रांजन सेन ने कहा, "हम बाघ की लोकेशन ट्रैक करने के लिए ड्रोन और ट्रैप कैमरे इस्तेमाल कर रहे हैं। स्थिति नियंत्रण में है।" जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा, "हम छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। वन विभाग के साथ मिलकर हम बाउंड्री को मजबूत कर रहे हैं। रात में कैंपस के कुछ हिस्सों को बंद किया गया है।"












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