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MP: राजनीति में यह शख्स हो गया कंगाल, इस बार गांव वालों ने चंदा करके लड़ाया चुनाव, 7वीं बार में मिली जीत'

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उमरिया,2 जून: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में टीन सेड जर्जर भवन में में रहने वाले केशव वर्मा की जीत की चर्चा चारों तरफ है। वजह उनकी राजनीति के प्रति दीवानगी ही है। केशव वर्मा ने वर्ष 2000 से 2022 तक 22 वर्ष में अलग-अलग पदों के लिए सात बार चुनाव मैदान में रहे। इस बीच 4 एकड़ जमीन बिक गई। जेवर गिरवी रखे। पत्नी-भतीजी को भी चुनाव मैदान में उतारा, पर जीत नसीब नहीं हुई। लगातार पराजय के बावजूद चुनाव मैदान नहीं छोड़ा। आखिर में दिग्गजों को शिकस्त देते हुए ,7 वें प्रयास में इस बार जिला पंचायत सदस्य पर 14 हजार वोटों से जीत दर्ज की। जिला पंचायत वार्ड क्रमांक 5 से चुनाव लड़ते हुए केशव वर्मा ने जिला पंचायत सदस्य दिवाकर सिंह, पूर्व विधायक व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय सिंह, मिस्टर सिंह और बीजेपी पदाधिकारी चन्द्रप्रकाश द्विवेदी को पराजय किया है। ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने चंदा कर केशव का नामांकन भरवाया था। मजदूरों ने प्रचार प्रसार के लिए पैसे दिए।

Keshav Verma

अपनों ने दिया धोखा

केशव कहते हैं, वर्ष 1992 में BSP में शामिल हुआ था। इसके बाद कई पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ाने के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया। 1993 में पदाधिकारियों की दावेदारी के लिए रुपए भी खर्च की। फिर 1996, 1998 और 1999 में अन्य लोगों की मदद की। बाद में आर्थिक स्थिति कमजोर हुई तो सबने मुंह मोड़ लिया।

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प्रशासनिक अधिकारी ने किया शर्मिंदा तो मन में ठानी

जोधपुर निवासी केशव उमरिया में अपने ननिहाल में रहते थे। वे बताते हैं, जब राजनीति में आए तो एक अफसर ने जातिगत आज शब्द कह दिया। जाति धर्म के आधार पर काम करने की सलाह दी। तब से मन में ठान लिया कि चुनाव लड़कर राजनीति में आएंगे कई कठिनाइयां आईं, पर हार नहीं मानी। मजदूरों ने दिया साथ, 3 लाख में लड़ लिया पूरा चुनाव

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केशव के अनुसार

चुनाव लड़ाने के लिए सबने इस बार मदद की थी। मजदूरों ने भी जमा पूंजी की 1-1 हजार रुपए प्रचार-प्रसार में खर्च किया। कुछ मित्रों से भी मदद ली। 3 लाख रुपए में पूरा चुनाव लड़ लिया।

किस वर्ष में कहां से चुनाव लड़े

Keshav Verma6
1- वर्ष 2000 में पहला चुनाव जिला पंचायत सदस्य के लिए लड़ा। 84 वोट से पराजय हुई। केशव का आरोप है कि रसूखदार नेताओं के मतगणना के अंतिम वक्त में हेरफेर करते हुए जीत दर्ज कराई थी।
2- वर्ष 2003 में उमरिया से BSP से विधानसभा का चुनाव लड़े। 14800 वोट मिले थे लेकिन इसमें भी पराजय हो गई।
3- वर्ष 2005 में जिला पंचायत सदस्य वार्ड क्रमांक 6 से लड़े। 3 नंबर पर था लेकिन पराजय हुई। आरोप है कि इस चुनाव में भी रसूखदार लोगों ने अधिकारियों के साथ मिलकर गड़बड़ी की थी।
4- वर्ष 2010 में अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाया लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा ।
5- वर्ष 2012 में नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़े। इसमें भी नहीं पराजय मिली।
6- वर्ष 2015 में जिला जनपद पंचायत के लिए भतीजी को लड़ाया लेकिन नहीं निर्वाचित नहीं हो पाया।
7- 2022 में बीजेपी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ चुनाव लड़े और 14 हजार वोट पाकर जीत गए।

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English summary
This person has become a pauper in politics,
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