Bhopal News: शराब दुकानों की शिफ्टिंग का मामला गरमाया, महिलाओं ने काले झंडे लहराए, उग्र प्रदर्शन की चेतावनी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकानों की शिफ्टिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शनिवार, 29 मार्च 2025 को मालवीय नगर में नई शराब दुकान खुलने के खिलाफ दर्जनों महिलाएं सड़क पर उतर आईं।

हाथों में काले झंडे लिए इन महिलाओं ने दुकान के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से इसे कहीं और शिफ्ट करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे उग्र प्रदर्शन, भूख हड़ताल और धरने जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगी।

The issue of shifting of liquor shops in Malviya Nagar heated up Women waved black flags

मालवीय नगर में हंगामा: "बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा"

मालवीय नगर के वार्ड नंबर-34 में पत्रकार भवन के सामने नई शराब दुकान खोली जा रही है, जो 1 अप्रैल से शुरू होने वाली है। इस इलाके के पास विधायक रेस्ट हाउस, बिरला मंदिर और घना रहवासी क्षेत्र मौजूद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दुकान के खुलने से न केवल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी, बल्कि बच्चों पर भी इसका गलत असर पड़ेगा। शनिवार को विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने काले झंडे फहराते हुए कहा, "यहां दिनभर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहेगा। महिलाओं और बच्चों को आने-जाने में डर लगेगा। हमारे बच्चे गलत संगत में पड़ सकते हैं।"

प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि इस मार्ग से मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और बड़े अधिकारी जैसे आईएएस-आईपीएस अक्सर गुजरते हैं। ऐसे में इस व्यस्त और संवेदनशील इलाके में शराब दुकान खोलना समझ से परे है। विरोध के दौरान महिलाओं ने पार्षद पप्पू विलास घाड़गे को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा, "हम पहले भी अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब हम सड़क पर उतर आए हैं। जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल करेंगे।"

बावड़ियाकलां में भी बवाल: अस्पताल से 50 मीटर की दूरी पर दुकान

मालवीय नगर से पहले बावड़ियाकलां चौक में भी शराब दुकान खुलने का विरोध जोर पकड़ चुका है। गुरुवार को यहां सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे थे। उनका कहना था कि जिस जगह दुकान का स्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, वहां से महज 50 मीटर की दूरी पर एक अस्पताल है। इसके अलावा, पास में मंदिर और रहवासी इलाका होने से लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं।

प्रदर्शन में शामिल एक स्थानीय निवासी ने बताया, "अस्पताल में मरीज और उनके परिजन आते हैं। शराब दुकान खुलने से माहौल खराब होगा। मंदिर के पास यह दुकान धार्मिक भावनाओं का अपमान है।" महिलाओं और पुरुषों ने एकजुट होकर प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि दुकान नहीं हटाई गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उनका यह भी आरोप था कि सरकार ने धार्मिक स्थलों और संवेदनशील जगहों पर शराब दुकानें बंद करने का वादा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

पहले भी हो चुके हैं विरोध प्रदर्शन

यह कोई पहला मौका नहीं है जब भोपाल में शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर हंगामा मचा हो। इससे पहले संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़), सांई राम कॉलोनी सेमरा और बावड़ियाकलां चौक में भी रहवासियों ने दुकानों के खिलाफ प्रदर्शन किया था। हर बार लोगों ने एक ही मांग उठाई- दुकानों को रहवासी इलाकों से दूर शिफ्ट किया जाए। मालवीय नगर में हो रहा प्रदर्शन अब इस कड़ी का चौथा उदाहरण बन गया है।

संत हिरदाराम नगर में रहवासियों ने शराबियों के उत्पात और असुरक्षा का हवाला दिया था, वहीं सांई राम कॉलोनी सेमरा में महिलाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। अब मालवीय नगर और बावड़ियाकलां में भी यही मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। लोगों का कहना है कि शराब दुकानों के कारण नशेड़ियों की भीड़ जमा होती है, जिससे गाली-गलौच, झगड़े और असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

प्रशासन का रुख: "आपत्ति पर विचार करेंगे"

इस बढ़ते विरोध को देखते हुए आबकारी विभाग के कंट्रोलर एचएस गोयल ने कहा, "1 अप्रैल से नए ठेके शुरू हो रहे हैं। जहां से आपत्ति आएगी, वहां चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।" हालांकि, रहवासियों का आरोप है कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बावड़ियाकलां में प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब नियमों में धार्मिक स्थलों, स्कूलों और अस्पतालों के पास शराब दुकान खोलने पर रोक है, तो फिर प्रशासन इसे कैसे अनदेखा कर रहा है?

आगे क्या होगा?

भोपाल में शराब दुकानों की शिफ्टिंग का यह विवाद अब बड़ा रूप लेता दिख रहा है। मालवीय नगर की महिलाओं ने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगी। काले झंडों के साथ शुरू हुआ उनका प्रदर्शन अब उग्र आंदोलन की ओर बढ़ सकता है। वहीं, बावड़ियाकलां में भी लोग एकजुट होकर प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या रहवासियों की मांग पूरी हो पाती है। फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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