पूर्व CM के पौत्र फिल्म अभिनेता अरुणोदय सिंह की टूटी शादी, जानिए किस वजह से टूटी शादी?
भोपाल, 23 जुलाई। पूर्व सीएम अर्जुन सिंह के पौत्र फिल्म अभिनेता अरुणोदय सिंह का कनाडियन मूल की ली एल्टन से शादी जितने शानदार तरीके से हुई थी। दोनों के रिश्ते उतने ही नाटकीय अंदाज में टूट गई है। इनके विवाह विच्छेद के भोपाल फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश को ली एल्टन की चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। यह मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि विवाह से लेकर उसके टूटने की स्टोरी फिल्मी जैसी ही है।

यह है पूरा मामला
दरअसल, अरुणोदय और ली एल्टन ने अपनी-अपनी पसंद के कुत्ते पाल रखे थे। इनके बीच लड़ाई होती तो इसे लेकर दोनों भिड़ जाते थे। परेशान होकर अरुणोदय ने दूरियां बनानी शुरू कर दी। इस खटास के बीच ली मायके कनाडा चली गईं तो अरुणोदय ने भोपाल फैमिली कोर्ट में विवाह विच्छेद की याचिका दायर कर दी। ली के पेश नहीं होने पर एकतरफा आदेश पारित कर कोर्ट ने दोनों की शादी शून्य कर दिया।

पहुंचे थे कोर्ट
न्यूफाउंडलैंड, कनाडा निवासी डगलस एल्टन की पुत्री ली एनी एल्टन की तरफ से हाइकोर्ट में भोपाल फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करने के लिए अपील दायर की गई। कहा गया कि 13 दिसम्बर 2016 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत अरुणोदय सिंह के साथ की शादी भोपाल में पंजीकृत किया गया। अरुणोदय सिंह पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के पुत्र हैं। विवाह के बाद वे मुंबई के खार में रहने लगे। यहां कई बार दोनों की लड़ाई होती रहती थी। लेकिन ये इतनी गम्भीर नहीं थीं कि तलाक की नौबत आ जाए। अरुणोदय ने अचानक 2019 में आना-जाना बंद कर दिया। 10 मई 2019 को उंसने चुपचाप भोपाल के फैमिली कोर्ट में विवाह विच्छेद का केस फाइल कर दी। ली ने कहा कि जब इसकी जानकारी लगी तो उसने केस को मुंबई स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बावजूद 18 दिसम्बर 2016 को अपीलकर्ता उसकी गैर मौजूदगी में कुटुंब न्यायालय ने तलाक की एकतरफा डिक्री पारित कर दी।

6 महीने में हो गया विवाह विच्छेद का फैसला
ली की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क दिया कि एकतरफा विवाह विच्छेद का आदेश अवैध है। उन्होंने 6 महीने के अंदर मामले का फैसला होने पर भी आश्चर्यजनक बताया। जबकि अरुणोदय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि अपीलकर्ता ली के ईमेल से उसकी अरुणोदय के साथ न रहने की मंशा साफ उजागर है। ली ने सुको में मामला ट्रांसफर करने का आवेदन दिया। सुको ने 14 अक्टूबर 2019 को ली व अरुणोदय को मध्यस्थता के लिए बुलाया। अरुणोदय पहुंचे, लेकिन ली नहीं गईं। इस पर सुको ने शिकायत निरस्त कर दिया। इसके बाद ही कुटुंब न्यायालय ने निर्णय सुनाया । सुको की गाइडलाइंस के तहत प्रस्तुत ली की क्रूरता के साक्ष्यों पर विचार के बाद यह फैसला दिया गया।












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