सीहोर के देवबड़ला में खुदाई करने पर मिल रहे हैं परमार काल के मंदिर, इस धातु से हैं निर्मित
सीहोर में जावर तहसील के वन क्षेत्र देवबड़ला में खुदाई के दौरान परमार कालीन मंदिरों के अवशेष मिल रहे हैं। अब तक 4 मंदिर मिल चुके और हाल में ही मिला चौथा मंदिर अब तक मिले मंदिरों में मिले सबसे बड़ा है
भोपाल, 17 अगस्त। मध्यप्रदेश में उज्जैन के बाद सीहोर जिले में ऐतिहासिक मंदिरों के मिलने का सिलसिला जारी है। दरअसल सीहोर में जावर तहसील के वन क्षेत्र देवबड़ला में खुदाई के दौरान परमार कालीन मंदिरों के अवशेष मिल रहे हैं। अब तक 4 मंदिर मिल चुके और हाल में ही मिला चौथा मंदिर अब तक मिले मंदिरों में मिले सबसे बड़ा प्रतीत हो रहा है। इसकी खुदाई का काम जारी है।

देवबड़ला परमार काल में था प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र
भोपाल से लगभग 125 किलोमीटर दूर स्थित देवबड़ला क्षेत्र में खुदाई का काम 2016 से किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग का कहना है कि इतिहास की नजर से देखा जाए तो देवबड़ला परमार काल में प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र था। महा परमार कल्याणी 10वीं 11वीं शताब्दी में लगभग 11 मंदिरों का निर्माण हुआ था। मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग अब इन मंदिरों को खोदकर निकाल रहा है और उन्हें मूल स्वरूप में संरक्षित कर रहा है।

खुदाई में मिला पहला शिव मंदिर
देवबड़ला में पुरातत्व विभाग ने साल 2016-17 में खुदाई में पहला शिव मंदिर जिस का संरक्षण किया जा चुका है। पुरातत्वविद डॉक्टर रमेश यादव ने बताया कि साल 2016 में सीहोर के तत्कालीन कलेक्टर डॉ पी सुदाम खाडे ने तत्कालीन आयुक्त पुरातत्व भोपाल अजातशत्रु श्रीवास्तव को यहां के बारे में सूचना दी थी। तब आयुक्त ने उन्हें निरीक्षण के लिए भेजा था। इसके बाद पता चला कि इस स्थल पर 9 से 10 मंदिर दबे हुए हैं, जिन्हें खुदाई कर संरक्षित किया जा सकता है। इसके बाद विभाग ने खुदाई करने का काम शुरू कर दिया और पहला मंदिर भी मिल गया।

पहले मंदिर को किया 35 लाख रुपए से मूल स्वरूप में किया संरक्षित
पुरातत्व विभाग के आयुक्त ने बताया कि 2016-17 में मिले पहले शिव मंदिर को करीब 35 लाख रुपए की लागत से उसके मूल स्वरूप में संरक्षित किया गया है। यह मंदिर 52 फीट ऊंचा है। इसके बाद साल 2018-19 में दूसरा मंदिर 2019-20 में तीसरा मंदिर खुदाई में मिला। यह तक प्राप्त हुए सभी मंदिरों में आकार में सबसे बड़ा है। इसे आधा खोदकर का निकाला जा चुका है। इस चौथे शिव मंदिर को मिलाकर अभी तक विभाग को दो शिव मंदिर, एक विष्णु मंदिर और एक देवी का मंदिर मिला है। बता दे पहले मंदिर को संरक्षित किया जा चुका है। दूसरे मंदिर के संरक्षण का काम शुरू हो गया है तीसरे मंदिर को पुनर्स्थापित करने के लिए डिवेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जा रही है।

लोहे के क्लेम से बनाए गए थे मंदिर
हाल ही में मिले चौथे मंदिर के अवशेष भी अन्य मंदिरों की तरह आसपास बिखरे हुए हैं। डॉ यादव बताते हैं यहां पर मिले यह सभी मंदिर भूस्खलन के कारण टूट कर गिरे प्रतीत होते हैं। एक अन्य कारण यह भी हो सकता है कि मंदिरों को बनाने में लोहे के क्लेम का प्रयोग किया गया था। जो समय के साथ जंग लगने से टूट गए और मंदिर गिर गया।
पुरातत्व विभाग के आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि खुदाई में मंदिरों की जो अवशेष मिले उन्हें दोबारा उसी रूप में संरक्षित किया जा रहा है जो मंदिर बन गया है वह बेहद खूबसूरत है। आने वाले समय में सभी मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जाएगा यह स्थल पुरातत्व की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।












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