MP में अब गांव के 'गरीब प्रोफेशनल' से लेकर हाट बाजार, बैलगाड़ी और पशु बेचने से चराने तक देना होगा टैक्स
शिवराज सरकार ने अब ग्राम सभाओं को टैक्स के विकल्प चुनकर अपनी आमदनी बढ़ाने के प्रस्ताव दिए हैं। इसमें कहा गया कि पंचायतें अब अपने क्षेत्र में रहने वाले लोगों से प्रोफेशनल टैक्स ( वृत्ति कर) भी वसूल कर सकेंगी।
भोपाल,14 अक्टूबर। मध्यप्रदेश में पंचायतों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही शिवराज सरकार ने अब ग्राम सभाओं को टैक्स के विकल्प चुनकर अपनी आमदनी बढ़ाने के प्रस्ताव दिए हैं। इसमें कहा गया कि पंचायतें अब अपने क्षेत्र में रहने वाले लोगों से प्रोफेशनल टैक्स ( वृत्ति कर) भी वसूल कर सकेंगी। इसमें यह ध्यान रखना होगा कि अगर कोई व्यक्ति पहले से टैक्स दे रहा है तो उस साल भर में वसूला जाने वाला कुल टैक्स 2500 रुपये से अधिक नहीं हो।

पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वृत्ति कर के लिए जो प्रावधान ग्राम सभा अनिवार्य कर (शर्त और अपवाद) नियम 2001 में करने के लिए कहा गया है। उसके मुताबिक 15 हजार तक की वार्षिक आय वालों से ₹100 से ₹200, 20 हजार तक की आमदनी वालों से ₹300 तक, ₹30 हजार तक की आमदनी वालों से ₹400 और ₹40 हजार की आय पर ₹600, 50 हजार की आय पर ₹900 और उससे अधिक की आय पर 650 से 1400 रुपये तक का वृत्ति कर वसूला जा सकता है।
इसमें यह ध्यान रखना होगा कि अगर कोई पहले से वृत्ति कर दे रहा है तो उसे कुल लगने वाले टैक्स ढाई हजार रुपए में से बकाया राशि टैक्स के रूप में वसूली जाएगी। इसके साथ ही आमदनी में वृद्धि के लिए यह भी कहा गया है कि पंचायतें चाहे तो अपने क्षेत्र में बैलगाड़ी या टांगे चलाने खींचने या बोझा ढोने के वाहनों में पशुओं का उपयोग करने वाले या कुत्तों और सूअरों को पालने वालों पर टैक्स लगा सकती है।
पंचायतों को सराय, धर्मशाला विश्राम गृह, वधशाला और पड़ाव स्थलों पर भी टैक्स के विकल्प दिए गए हैं। साथ ही किराए पर चलाई जाने वाली बेल गाड़ी साइकिल और रिक्शे पर भी टैक्स लगाया जा सकेगा ग्रामीण अंचलों में लगने वाले हाट बाजारों में अब गाय भैंस बकरी घोड़ा ऊंट गधा शुगर बेचने पर भी टैक्स देना होगा। वही हाट बाजार में प्रचार के लिए स्टॉल लगाने पर डेढ़ रुपये रोजाना तक शुल्क देना होगा।
नई किराने की दुकान पर 50% छूट
गांव के बाजार में नाई की दुकान तथा किराने की दुकान के रूप में नियमित सेवाएं प्रदान करने वालों को मौजूदा कर की दरों में सिर्फ 50% ही बाजार फीस देना होगी। इसके अलावा महिला स्व सहायता समूह स्थानीय शिल्पी और कारीगरों को भी 50% तक बाजार फीस में छूट दी जाएगी।












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