Bhopal News: गर्ल्स के लिए छात्र ने बनाया अनोखा जूता, फीचर्स जानकार हो जाएंगे हैरान
Bhopal News: भोपाल के रवींद्र भवन परिसर में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में देशभर के स्कूली छात्रों ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचारों का परिचय दिया। इस दौरान कई अनूठे और विचारणीय मॉडल प्रस्तुत किए गए।
खासतौर पर जयपुर के भारतीय विद्या आश्रम स्कूल के छात्रों और उनके शिक्षक द्वारा तैयार किया गया एक जूता, जो लड़कियों की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है, इस विज्ञान कांग्रेस में आकर्षण का केंद्र बन गया है।

"सेफ स्पार्क" - सुरक्षा का स्मार्ट उपाय
इस सुरक्षा जूते को "सेफ स्पार्क" नाम दिया गया है, और इसका डिज़ाइन भारतीय विद्या आश्रम स्कूल की फिजिक्स शिक्षिका शुभी शर्मा और उनके दो छात्रों, अथर्व शर्मा और मोहनीश जोशी द्वारा तैयार किया गया है। यह जूता एक नवीन तकनीकी दृष्टिकोण के साथ महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। जूते में एक रीचार्जेबल बैटरी लगाई गई है, जो जब किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में आती है, तो उसे एक नॉन-लीथल इलेक्ट्रिक शॉक देती है। यह शॉक जानलेवा नहीं है, लेकिन इससे व्यक्ति अचेत हो सकता है, जिससे महिला को अपनी जान बचाने का मौका मिलता है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक अभिनव कदम
इस जूते का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को ध्यान में रखते हुए उनका सुरक्षा स्तर बढ़ाना है। देश में हर साल महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बढ़ती घटनाओं में रेप केस और किडनैपिंग के मामले प्रमुख हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर साल लगभग 30,000 रेप केस और डेढ़ लाख किडनैपिंग केस सामने आते हैं। इन अपराधों को देखते हुए, इस तरह के सुरक्षा उपायों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच और निगरानी की अतिरिक्त सुविधा
इस जूते का एक और महत्वपूर्ण फीचर है कि यह जीपीएस से भी कनेक्ट रहेगा। इसका मतलब है कि जब भी कोई महिला खतरे में होगी और इसे सक्रिय करेगी, तो जूते की सहायता से उसकी लोकेशन को ट्रैक किया जा सकता है, और मदद के लिए त्वरित कदम उठाए जा सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से महिला सुरक्षा को और सशक्त बनाने में सहायक होगी।
विज्ञान मेले में अन्य आकर्षक मॉडल
31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के इस विज्ञान मेले में सिर्फ "सेफ स्पार्क" जूता ही नहीं, बल्कि स्कूली छात्रों ने और भी कई अनूठे मॉडल प्रस्तुत किए हैं, जिनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचारों का समावेश है। छात्रों ने अपने मॉडल्स के माध्यम से समस्याओं का वैज्ञानिक हल प्रस्तुत किया है, जो समाज की भलाई के लिए सहायक हो सकते हैं।
आखिरकार, क्या है इस आयोजन का उद्देश्य?
यह आयोजन न केवल छात्रों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गहरी समझ प्रदान करने का एक मंच है, बल्कि यह उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की तरह के आयोजनों से छात्रों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलता है, और वे अपने मॉडल्स के माध्यम से अपने आसपास के समाज में समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित होते हैं।
"सेफ स्पार्क" जूते में ये हैं अनोखे फीचर, महिलाओं की सुरक्षा को मिलेगा मजबूती
जयपुर के भारतीय विद्या आश्रम स्कूल की शिक्षिका शुभी शर्मा और उनके दो छात्रों, अथर्व शर्मा और मोहनीश जोशी ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अनोखा जूता डिज़ाइन किया है, जिसे "सेफ स्पार्क" कहा जाता है। इस जूते में ऐसे फीचर्स हैं, जो इसे एक स्मार्ट सुरक्षा उपकरण बनाते हैं।
जूते के प्रमुख फीचर्स:
नॉन-लीथल इलेक्ट्रिक शॉक: जूते में एक पुश बटन होता है, जिसे जूते के सामने या साइड में छिपा कर रखा गया है। यह बटन महिला द्वारा दबाए जाने पर सामने वाले अटैकर को नॉन-लीथल इलेक्ट्रिक शॉक भेजता है। इस शॉक के कारण अटैकर डिस्टेंस बनाए रखेगा और महिला के पास नहीं आ पाएगा। खास बात यह है कि यह शॉक जानलेवा नहीं होता, बल्कि व्यक्ति को अचेत कर सकता है, जिससे महिला को बचने का मौका मिलता है।
जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम: इस जूते में एक जीपीएस सिस्टम भी शामिल है, जो जब महिला खतरे में होती है, तो अपने संपर्क में जुड़े तीन नंबरों को उसकी लोकेशन सहित मैसेज भेजता है। यह फीचर महिलाओं की सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाता है, क्योंकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल मदद मिल सकती है।
वीडियो रिकॉर्डिंग: जूते में एक कैमरा भी लगाया गया है, जो वीडियो रिकॉर्डिंग करता है। यह कैमरा तब सक्रिय होता है, जब महिला खतरे में होती है, और इस तरह से महिला के पास घटना का एविडेंस रिकॉर्ड करने का मौका मिलता है। यह वीडियो शॉक के साथ साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कैसे आया इस जूते का विचार?
शुभी शर्मा बताती हैं कि इस जूते को बनाने से पहले उन्होंने 600 से अधिक लोगों पर एक सर्वे किया। सर्वे का उद्देश्य यह जानना था कि महिलाओं और लड़कियों को किन समस्याओं और परेशानियों का सामना करना पड़ता है, खासकर जब वे अकेले बाहर जाती हैं। इस सर्वे से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही "सेफ स्पार्क" जूते को डिजाइन किया गया।
किसे दिया गया जूता?
जूते को तैयार करने के बाद, शुभी और उनके छात्रों ने एक एनजीओ के माध्यम से 20 महिलाओं को यह जूता दिया है। यह जूता इन महिलाओं के लिए एक सुरक्षा उपाय के रूप में काम करेगा। इस जूते की कुल लागत 600 से 700 रुपये के बीच है, जो इसे हर महिला और लड़की के लिए सुलभ बनाता है।
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