इंदौर में सुरों का महाकुंभ: सोनू निगम को मिला लता मंगेशकर अलंकरण, सीएम मोहन यादव ने किया सम्मानित
स्वर कोकिला लता मंगेशकर की जन्म जयंती पर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर एक बार फिर संगीत की महफिल से गूंज उठा। लता मंगेशकर सभागार में आयोजित भव्य 'राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण एवं संगीत संध्या' समारोह में ख्यातिलब्ध पार्श्व गायक सोनू निगम को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान प्रदान किया गया।
यह सम्मान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के करकमलों से मिला, जिन्होंने सोनू निगम की मखमली आवाज की खूब तारीफ की। समारोह में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोनू को गले लगाकर बधाई दी, जबकि सांसद शंकर लालवानी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी ने इसे और खास बना दिया।

यह दो दिवसीय समारोह मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया गया। शनिवार को स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों से शुरुआत हुई, तो रविवार को मुख्य समारोह में सोनू निगम के सम्मान ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, "सोनू निगम की आवाज न केवल मधुर है, बल्कि दिल को छू लेने वाली है। लता दीदी की परंपरा को वे आगे बढ़ा रहे हैं।" यह सम्मान न केवल सोनू के 30 वर्षों के करियर का सम्मान है, बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का प्रतीक भी है।
लता मंगेशकर अलंकरण: एक समृद्ध परंपरा, 1984 से चली आ रही
राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान की शुरुआत 1984 में हुई थी, जब स्वर कोकिला लता मंगेशकर की जन्म जयंती पर मध्य प्रदेश सरकार ने संगीत जगत के योगदान को सम्मानित करने का संकल्प लिया। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष पार्श्व गायन और संगीत निर्देशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिया जाता है। हर साल 28 सितंबर को इंदौर के लता मंगेशकर सभागार में आयोजित होने वाला यह समारोह लता जी के जन्मस्थान इंदौर को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
इस वर्ष संस्कृति विभाग ने अगस्त में ही घोषणा की थी कि वर्ष 2024 का सम्मान संगीत निर्देशन के लिए प्रसिद्ध तिकड़ी शंकर-एहसान-लॉय को और वर्ष 2025 का पार्श्व गायन के लिए सोनू निगम को प्रदान किया जाएगा। हालांकि, शंकर-एहसान-लॉय के व्यस्त कार्यक्रम के कारण वे समारोह में शामिल नहीं हो सके, लेकिन सोनू निगम ने अपनी उपस्थिति से माहौल को सराबोर कर दिया। सम्मान में शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और 2 लाख रुपये की नगद राशि शामिल है। संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने बताया कि यह पुरस्कार लता जी की स्मृति में दिया जाता है, जो इंदौर में 1929 में जन्मीं और संगीत जगत को अमूल्य धरोहर दी।
पिछले वर्षों में इस सम्मान से नवाजे गए कलाकारों में उत्तम सिंह, के.एस. चित्रा जैसे दिग्गज शामिल हैं। 2024 में उत्तम सिंह को संगीत निर्देशन और चित्रा को पार्श्व गायन के लिए सम्मानित किया गया था। यह परंपरा न केवल संगीतकारों को प्रोत्साहित करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को लता जी के योगदान की याद दिलाती है।
सोनू निगम का भावुक क्षण: "30 साल पहले इंदौर आया था, आज सम्मान मिला - लता दीदी की कृपा"
सोनू निगम ने सम्मान ग्रहण करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "30 साल पहले मैं इंदौर आया था, तब से लता दीदी की जयंती पर यहां आना सौभाग्य लगा। आज उनका नाम लिए यह सम्मान मिलना मेरे लिए स्वप्निल है।" सोनू ने समारोह में लोगों की फरमाइश पर कई गीत गाए, जिनमें लता मंगेशकर के सदाबहार गाने जैसे 'ऐ दिल-ए-नादान' और 'तेरे मेरा प्यार अमर' शामिल थे। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सोनू निगम का संगीत सफर 1990 के दशक से शुरू हुआ, जब उन्होंने 'आशिकी' फिल्म से डेब्यू किया। 'दिल तो पागल है', 'कभी खुशी कभी गम' जैसी फिल्मों में उनकी आवाज ने करोड़ों दिल जीते। वे न केवल पार्श्व गायक हैं, बल्कि संगीत निर्देशक और लाइव परफॉर्मर भी। इस सम्मान को पाकर सोनू ने कहा, "यह मेरे लिए जिम्मेदारी है कि लता दीदी की तरह संगीत को नई ऊंचाइयों पर ले जाऊं।" समारोह में उन्होंने सीएम को धन्यवाद देते हुए मध्य प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक पहल की सराहना की।
समारोह की भव्यता: दीप प्रज्ज्वलन से शुरू, संगीत संध्या पर समापन
दो दिवसीय समारोह की शुरुआत शनिवार को स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों से हुई, जहां लता जी के गीतों पर आधारित कार्यक्रम ने दर्शकों को बांध लिया। रविवार को मुख्य समारोह शाम 7 बजे शुरू हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इसके बाद सोनू निगम को सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा, ऊषा ठाकुर, मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा उपस्थित रहे। सोनू निगम के अलावा अंकित तिवारी ने भी अपनी प्रस्तुति दी, जिसने समारोह को और रोमांचक बना दिया। संगीत संध्या में लता जी के गीतों की धुन पर नृत्य और वाद्ययंत्रों की ध्वनियां गूंजीं।
सोशल मीडिया पर समारोह की झलकियां वायरल हो रही हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्वीट में वीडियो शेयर किया गया, जिसमें सोनू को सम्मान देते सीएम नजर आ रहे हैं। भाजपा नेता जितेंद्र जीराती ने फोटोज शेयर कर लिखा, "अद्भुत संगीत का आनंद लिया।" यह समारोह न केवल सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि लता जी की विरासत को जीवंत करने का माध्यम भी।
मुख्यमंत्री की तारीफ: "सोनू की आवाज मखमली, सभी कायल"
डॉ मोहन यादव ने सोनू निगम को अपना फेवरेट गायक बताते हुए कहा, "इनकी मखमली आवाज के सभी कायल हैं। लता दीदी की तरह वे संगीत को नई दिशा दे रहे हैं।" सीएम ने समारोह को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक नीतियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "ऐसे आयोजनों से हमारी सांस्कृतिक धरोहर मजबूत होती है। इंदौर को सिंगिंग सिटी बनाने का सपना साकार करेंगे।"
कैलाश विजयवर्गीय ने मंच पर सोनू को गले लगाकर बधाई दी और कहा, "सोनू भाई की आवाज अनमोल है।" सांसद शंकर लालवानी ने ट्वीट कर लिखा, "इंदौर का गौरव बढ़ाने वाला क्षण।" यह सम्मान मध्य प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जहां किशोर कुमार सम्मान खंडवा में और महात्मा गांधी सम्मान भोपाल में आयोजित होते हैं।
सांस्कृतिक महत्व: इंदौर की धरोहर, लता जी की स्मृति
लता मंगेशकर सभागार इंदौर का प्रतीक है, जहां हर साल यह समारोह लता जी की स्मृतियों को ताजा करता है। लता जी का जन्म इंदौर में हुआ, और यहीं से उनका संगीत सफर शुरू हुआ। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि संगीत जगत के लिए प्रेरणा। सोनू निगम जैसे कलाकारों को सम्मानित कर मध्य प्रदेश युवा संगीतकारों को प्रोत्साहन मिलता है।












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