ममता शर्मसार! चित्रकूट के जंगल में तड़प रहा थी नवजात, मां के आंचल के साथ ऐसी मिली जिंदगी
सतना, 24 अगस्त। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का एक तरफ सरकार की कोशिशें हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ सताना जिले के चित्रकूट के पतंगर गांव के पास जंगल में बुधवार को एक मां ने अपनी बेटी को अभिशाप मानकर पहाड़ के पत्थरों के बीच अमर्यादित आचरण के दुष्परिणाम को भूख-प्यास और मौसमी थपेड़ों के बीच जंगली जानवरों का निवाला बनने के लिए छोड़ दिया।इस बच्ची को अपनों ने ठुकरा दिया, लेकिन गैरों ने प्यार लुटाया। बच्ची को गोद लेने के लिए होड़ मच गई।
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पूरा मामला
चित्रकूट के पतंगर गांव के पास जंगल से बुधवार की सुबह आई किसी बच्चे के रोने की आवाज ने ग्रामीणों का ध्यानाकर्षण कराया तो लोग वहां उस जगह की तलाश करने लगे, जहां से यह आवाज आ रही थी। कुछ ही देर में सामने आए दृश्य ने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया।
बिना कपड़ों के पड़ा था नवजात
झाड़ियों के पीछे पत्थरों के बीच 1 नवजात बिना कपड़ों के पड़ा था। वह बारिश में भीगने से ठिठुर रहा था। संभवतः वह भूख-प्यास से भी तड़प रहा था। ग्रामीणों ने बच्चे को उठाया और सूखे कपड़े में लपेट कर मझगवां थाने को इसकी सूचना दी। पुलिस ने बच्चे को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां उसकी देखभाल की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि रात के अंधेरे में किसी महिला ने जन्म देने के बाद नवजात को जंगल पत्थरों के बीच मे छोड़ दिया। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्रकरण कायम किया है।
नवजात को मिला मां का सहारा
ऐसे में मझगवां तहसील के एक दंपत्ति सामने आए हैं जिनका नाम अरुण चौधरी पत्नी रेखा चौधरी निवासी मझगवां स्टेशन राज नगर नई बस्ती में बच्ची की लावारिस मिलने की सूचना मिलने पर वह मझगवां अस्पताल पहुंच गए, उन्होंने बताया कि उनके पास 2 बेटे हैं और बेटियां ना होने की वजह से उन्हें काफी समय से बेटी को गोद लेने का संकल्प ले रहे थे ऐसे में लावारिस बच्ची की सूचना पर दंपत्ति मझगवां अस्पताल से बच्ची को गोद लेने के लिए उसका उपचार कराने सतना जिला अस्पताल पहुंच गए, जहां दंपत्ति की माने तो शासन की पूरी प्रक्रिया के बाद वह बच्ची को गोद लेंगे।












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