Bhopal News: सैफुद्दीन की अनोखे तरीके से देशभक्ति, स्वतंत्रता दिवस पर लगाई झाड़ू, बोले- कचरे से कब होंगे आजाद
Bhopal News: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी भोपाल में जहां लोग धूमधाम से जश्न मना रहे थे, वहीं न्यू मार्केट में एक समाजसेवी व्यक्ति ने देश सेवा का अनोखा तरीका अपनाया। 65 वर्षीय सैफुद्दीन शाजापुरवाला ने कचरा साफ करने के जरिए स्वच्छता का संदेश दिया, जो वास्तव में प्रेरणादायक था।
कचरे के खिलाफ उनकी लड़ाई
सैफुद्दीन शाजापुरवाला अपनी एक्टिवा गाड़ी से शहर की गलियों में घूमते हैं और जहां गंदगी नजर आती है, वहां अपनी झाड़ू से सफाई शुरू कर देते हैं। उन्होंने वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए कहा, "हमारा देश अंग्रेजों से तो आजाद हो गया, लेकिन कचरे से कब आजाद होगा? इसीलिए मैं कचरा साफ करता हूं।"

स्वच्छता अभियान में सक्रियता
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सैफुद्दीन ने 2 अक्टूबर 2015 को धर्मगुरु सैयदना साहब, महात्मा गांधी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर हर रविवार को भोपाल में सफाई का काम करना शुरू किया। इस पहल के कारण उन्हें राजधानी में 'संडे मैन' के रूप में पहचान मिल गई है।
2016 से, सैफुद्दीन ने पूरे प्रदेश में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए यात्रा की। उन्होंने इंदौर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, सीहोर, सोनकच्छ जैसे जिलों में स्वच्छता के संदेश को फैलाया। इसके अलावा, वे मुंबई, अहमदाबाद, और सूरत में भी स्वच्छता अभियान के प्रति लोगों को जागरूक कर चुके हैं।

एक्सपोर्ट की तरह स्वच्छता की ओर
भोपाल के नूर मोहल्ले में रहने वाले सैफुद्दीन पेशे से व्यापारी हैं और वॉलपेपर की दुकान चलाते हैं। हर रविवार वे सुबह 9 से 6 बजे तक कचरा एकत्र कर उसे सही जगह फेंकने का कार्य करते हैं, ताकि उसे रिसायकल किया जा सके। उनकी एक्टिवा और झाड़ू के साथ दो डस्टबिन, एक गीला कचरा और दूसरा सूखा कचरा के लिए, उनकी स्वच्छता मुहिम की पहचान बन चुके हैं। सैफुद्दीन शाजापुरवाला की यह प्रेरणादायक कहानी न केवल स्वच्छता की दिशा में उनके प्रयासों को उजागर करती है, बल्कि एक नागरिक की जिम्मेदारी और सेवा भाव को भी दिखाती है।

कपड़े और वाहन पर स्वच्छता का संदेश
सैफुद्दीन शाजापुरवाला ने स्वच्छता के संदेश को एक अनोखे और सृजनात्मक तरीके से पेश करते है। उन्होंने ने बताया कि वे नीली शर्ट को सूखे कचरे और हरे रंग की पेंट को गीले कचरे के प्रतीक के रूप में पहनते है। इसके अलावा, उनके वाहन पर भी स्वच्छता के संदेश जैसे 'हम कब सुधरेंगे', 'गीला कचरा हरे डस्टबिन में डालें', और 'सूखा कचरा नीले डस्टबिन में डालें' लिखे हुए हैं।












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