Rewa Muktidham Scam: भ्रष्टाचार का अजब गजब मामला; रीवा में चोरी हो गया मुक्तिधाम'

रीवा, 31 जुलाई। जिले में भ्रष्टाचार का अजब गजब मामला में प्रकाश में आया है। पूर्व में यहां लाखों की लागत से निर्माण कराई गई सड़क चोरी का मामला प्रकाश में आया था जिसके बाद अब इंसान को मुक्ति देने वाला मुक्तिधाम ही चोरी हो गया। दरअसल मुक्तिधाम के चोरी होने की बात हम नहीं बल्कि ग्रामीण कर रहे है जिन्हांने इसकी शिकायत रीवा कमिश्नर से की और जब इसकी जांच की गई तो जिस मुक्तिधाम में 14 लाख से भी अधिक की लागत का कागजों में निर्माण कार्य कराया गया असल में वह मुक्तिधाम उस स्थान पर है ही नहीं, मानो वह चोरी हो गया।

14 लाख 95 हजार रुपए हुआ था पास

14 लाख 95 हजार रुपए हुआ था पास

जनता के पैसों का बंदरबाट करने के लिए अधिकारी कर्मचारियों ने सारी हदें पार कर दीं। ग्राम पंचायत सेदहा में मुक्तिधाम के निर्माण कार्य के लिए 14 लाख 95 हजार की राशि स्वीकृत हुई थी। जब इसकी जांच की गई तो लगभग 15 लाख रुपए खर्च कर बना मुक्तिधाम निर्धारित स्थान से 15 किलोमीटर दूर दूसरे गांव के चट्टानों के बीच मिला। जहां केवल पत्थरों की बाउंड्री वाल ही नजर आई. कमिश्नर रीवा अनिल सुचारी को आरटीआई कार्यकर्ता ने मुक्तिधाम निर्माण में हुए घोटाले से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई। जिसके बाद कमिश्नर की जांच में जो सच्चाई सामने आई उसे जान कर आप ही कहने लगेंगे मध्य प्रदेश अजब गजब

जांच में जुटा प्रशानिक अमला

जांच में जुटा प्रशानिक अमला

सेदहा पंचायत के बघबिल नाम की जगह पर शासकीय राजस्व नंबर 3 पर 14 लाख 95 हजार रुपए का मुक्तिधाम 2014-16 के साल में बनाया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत की गई थी कि, शांतिधाम सेदहा पंचायत की रकबा नंबर 3 में नहीं बना है। इसकी जांच कमिश्नर रीवा अनिल सुचारी ने सिरमौर के अनुविभागीय अधिकारी नीलमणि अग्निहोत्री से इसकी जांच करने को कहा। एसडीएम सिरमौर नीलमणि अग्निहोत्री ने पटवारियों की टीम भेजकर जब 28 जुलाई 2022 को मौके पर नापजोख की तो पता चला कि 14 लाख 95 हजार की लागत से बना मुक्तिधाम सेदहा पंचायत में है ही नहीं। जांच के दौरान यह मुक्तिधाम नजदीकी हिनौती पंचायत के गदही गांव के रकबा नंबर 24/27 में निर्माण कार्य पाया गया है। मामले की सच्चाई सामने आने के बाद ग्रामीणों के साथ ही अधिकारी भी इस बात से हैरान हैं कि आखिर सेदहा पंचायत में बनाया गया मुक्तिधाम, हिनौती पंचायत में कैसे पहुंच गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि शांतिधाम चोरी हो गया हो और चुरा कर उसे हिनौती पंचायत पहुंचा दिया गया हो।

मुक्तिधाम के नाम पर सिर्फ पत्थर की बाउंड्रीबाल

मुक्तिधाम के नाम पर सिर्फ पत्थर की बाउंड्रीबाल

अब सवाल यह है कि ग्रामीण क्षेत्र से 15 किलोमीटर दूर जंगल, पहाड़ नदी नालों को पार करते हुए बनाए गए इस मुक्तिधाम की कोई उपयोगिता नहीं है। ग्राम पंचायत सेदहा और आसपास के अन्य ग्रामीणों ने का कहना है कि जब यह मुक्तिधाम बना तब किसी को पता ही नहीं है कि वहां पर मुक्तिधाम है। सभी लोग इसे किसी की निजी भूमि को कवर करने के लिए बनी बाउंड्रीवॉल ही समझते थे। जब लोगों को यह जानकारी मिली कि पंचायत विभाग के रिकॉर्ड में यह पत्थरों से घिरी हुई जगह ही 15 लाख रुपए से तैयार हुआ मुक्तिधाम है। जिसके बाद लोगों ने सवाल खड़े करना शुरू कर दिए।

राशि वसूली की मांग

राशि वसूली की मांग

प्रशासनिक जांच के दौरान जब मामला साफ हो गया तो ग्रामीणों ने यह मांग की कि इस पूरे मामले में जिस इंजीनियर ने लेआउट जारी किया, जिस इंजीनियर ने इसकी तकनीकी स्वीकृती दी, जिस सहायक यंत्री उपयंत्री एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इसमें पूर्णता और उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी किया उन सब के विरुद्ध थाने में मामला दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही मुक्तिधाम बनाने के लिए आई राशि की बंदरबाट करने वाले अधिकारियों से इस राशि को वसूले जाने की मांग भी की है। फिलहाल मामले की जांच रिपोर्ट ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री और अनुविभागीय अधिकारी सहित राजस्व विभाग के पटवारी आरआई और अनुविभागीय दंडाधिकारी अब रीवा कमिश्नर अनिल सुचारी को सौंपेंगे जिसके बाद ही साफ हो पाएगा की दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।

 शिवानंद द्विवेदी का आराेप

शिवानंद द्विवेदी का आराेप

मामले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया की यह मुक्तिधाम निर्धारित स्थान से 15 किलोमीटर की दूरी पर दूसरे गांव में एक जंगली और पहाड़ी क्षेत्र में बना हुआ है। जहां पहुंचने का रास्ता काफी दुर्गम है। जब मौके पर जाकर देखा तो मुक्तिधाम में मात्र कुछ पत्थरों से बाउंड्रीवॉल बनाई गई है। मामले की शिकायत संभागीय कमिश्नर अनिल सुचारी से की गई। जिसके बाद जांच के लिए कमिश्नर ने 2 टीमें गठित की और जांच शुरू करवाई गई। जिसमें मुक्तिधाम के चोरी होने की सच्चाई सामने आई। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने आरोप लगाते हुए कहा कि, जंगल में मुक्तिधाम को बनाने से यह स्पष्ट होता है कि, मात्र सरकार और जनता और टैक्स के पैसों का बंदरबाट करने के लिए ही तत्कालीन सरपंच, सचिव, जनपद पंचायत के सीईओ और सहायक यंत्री, उपयंत्री ने मिलाकर बंदरबांट किया है।

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