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भोपाल में दलित-पिछड़ा का गुस्सा: सिविल जज भर्ती में ST-SC और OBC के 148 पद खाली, DPSS ने घेरा मंत्री का बंगला

MP News: भाई साहब... ये कैसी भर्ती हो रही है मध्य प्रदेश में? 121 अनुसूचित जनजाति (ST) के पद... एक भी चयन नहीं। 18 अनुसूचित जाति (SC) के पद... सिर्फ एक चयन। 9 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के पद... सिर्फ 5 चयन। और सरकार खामोश... हाई कोर्ट की चयन समिति मौन... और आरक्षित वर्ग का गुस्सा आसमान छू रहा है।"

ये शब्द आज भोपाल की सड़कों पर गूंज रहे थे। दलित पिछड़ा समाज संगठन (DPSS) के सैकड़ों कार्यकर्ता मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की 2022 सिविल जज भर्ती में आरक्षित वर्ग के साथ हुए कथित अन्याय के खिलाफ सड़क पर उतरे।

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संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर सिंह यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और फिर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के शासकीय आवास का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने तरण पुष्कर चौराहे पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया, लेकिन संदेश साफ था - "जब तक न्याय नहीं, चैन नहीं।"

विवाद का सार: क्या है समस्या? (reservation )

भर्ती का पैमाना: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 2022 में अधिसूचित सिविल जज भर्ती के तहत कुल 191 पद थे। इनमें आरक्षित वर्गों के लिए 148 पद (ST: 121, SC: 18, OBC: 9) निर्धारित थे।

चयन परिणाम: अंतिम चयन में केवल 47 अभ्यर्थी ही सफल हुए। आरक्षित वर्गों में चयन बेहद निराशाजनक रहा:

  1. ST (121 पद): 0 चयन।
  2. SC (18 पद): 1 चयन।
  3. OBC (9 पद): 5 चयन।

आरोप: DPSS और अन्य संगठनों का कहना है कि यह "आरक्षण घोटाला" है। खाली पदों को भरने के बजाय उन्हें रिक्त छोड़ दिया गया, जो संवैधानिक आरक्षण प्रावधानों (अनुच्छेद 16(4), 335) का उल्लंघन है। दामोदर सिंह यादव ने इसे "सामाजिक न्याय पर प्रहार" बताते हुए परीक्षा निरस्त करने और पारदर्शी पुनः परीक्षा की मांग की है। उन्होंने UPSC जैसी केंद्रीय परीक्षाओं में आरक्षित वर्ग के सफल होने का हवाला देते हुए MPPSC/MPHC की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कुल मिलाकर आरक्षित वर्ग के 148 पदों में सिर्फ 6 अभ्यर्थी ही सफल हो पाए। बाकी 142 पद खाली रह गए।

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"ये गलती नहीं, डिजाइन है" - दामोदर सिंह यादव

प्रदर्शन के दौरान दामोदर सिंह यादव ने कहा, "कहते हैं न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है, लेकिन मध्य प्रदेश की इस भर्ती में तो लगता है कि पट्टी के पीछे भी कुछ और चल रहा था। ये कोई गलती नहीं, ये एक सोचा-समझा डिजाइन है। न्यायपालिका में आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करने का प्रयोग चल रहा है।"

उन्होंने तीखा सवाल उठाया - "UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में SC, ST, OBC के बच्चे टॉप करते हैं। वहाँ मेरिट बन जाती है, यहाँ मध्य प्रदेश की सिविल जज भर्ती में 148 पद खाली कैसे रह गए? क्या हमारे बच्चे अचानक कमजोर हो गए?"

दोनों बड़ी पार्टियों पर हमला: "BJP हो या कांग्रेस, दोनों आरक्षण विरोधी"

दामोदर यादव ने सत्ताधारी भाजपा के साथ-साथ विपक्षी कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। "हमने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा (भाजपा) और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (कांग्रेस) दोनों के घर का घेराव किया, क्योंकि दोनों ही SC, ST, OBC के हक मारने में एक जैसे हैं। एक सत्ता में है, दूसरा सत्ता की राह देख रहा है - दोनों आरक्षण विरोधी हैं।"

सुबह से ही DPSS कार्यकर्ता भोपाल के अलग-अलग इलाकों से एकत्र होने लगे थे। हाथों में तख्तियां थीं -

  • "आरक्षण हमारा हक है, कोई समझौता नहीं"
  • "148 पद खाली = सामाजिक न्याय की हत्या"
  • "परीक्षा रद्द करो, पुनः परीक्षा कराओ"

पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए तरण पुष्कर चौराहे पर ही प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। लेकिन कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए और नारे लगाते रहे। दामोदर यादव ने ऐलान किया, "आज हम सैकड़ों में थे, अगली बार हजारों में आएंगे। जब तक भर्ती रद्द नहीं होगी, आंदोलन नहीं रुकेगा।"

मामला कोर्ट में भी गर्म

इधर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी इस भर्ती को लेकर PIL दाखिल हो चुकी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मेरिट लिस्ट बनाने में मनमानी हुई और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को जानबूझकर कम अंक दिए गए। हाई कोर्ट ने फिलहाल सभी नियुक्तियों पर रोक लगा रखी है।

आखिरी सवाल वही - क्या वाकई न्याय अंधा है?

आज भोपाल की सड़कों पर जो गुस्सा दिखा, वह सिर्फ एक भर्ती परीक्षा का नहीं है। यह उस पूरे सिस्टम का गुस्सा है, जिसमें संवैधानिक आरक्षण को बार-बार कागजों तक सीमित करने की कोशिश की जाती है।

दामोदर सिंह यादव ने अंत में कहा, "हम लड़ रहे हैं ताकि हमारे बच्चे जज बनें, वकील बनें, अफसर बनें। हम लड़ रहे हैं ताकि न्याय की देवी की पट्टी हटे... और वह सचमुच अंधी न रह जाए।"

आंदोलन जारी है। अगला कदम क्या होगा? यह तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन मध्य प्रदेश में आरक्षित वर्ग की आवाज आज और बुलंद हो गई है।

(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, भोपाल, LN Malviya)

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