मध्य प्रदेश में बारिश का कहर, रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी, भोपाल समेत कई जिलों में स्थिति गंभीर
Bhopal news: मध्य प्रदेश में तेज बारिश का स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव है जिसके चलते प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश हो रही है। राजधानी भोपाल में पिछले 48 घंटे से जारी बारिश के कारण सड़के जलमग्न हो गई है। राजधानी के शिवनगर करोड़ इलाके में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। दरअसल,नाले और नालियां ओवरफ्लो हो गई।
मौसम विभाग ने रविवार को मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र के 14 जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। भोपाल में सीजन की बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, जहां रात भर 4 इंच से ज्यादा पानी गिरा।

इस भारी बारिश के चलते कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है। भदभदा डैम के दो और कलियासोत डैम के 13 में से 4 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।
रतलाम में तेज बारिश के कारण मंगल मऊड़ी-लिमखेड़ा स्टेशन के बीच ट्रैक के नीचे की गिट्टी और मिट्टी बह गई। शनिवार रात करीब 11 बजे इंजीनियर्स की टीम घटनास्थल पर पहुंची और सुबह 5 बजे तक ट्रैक को दुरुस्त कर दिया गया। इस दौरान 10 पैसेंजर समेत 15 ट्रेनें अलग-अलग स्टेशनों पर रोकी गईं।

नर्मदापुरम में तवा डैम के पांच गेट खुले हैं, जबकि खंडवा के इंदिरा सागर डैम और ओंकारेश्वर डैम के गेट भी खोल दिए गए हैं।
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ वेदप्रकाश सिंह के अनुसार, रीवा संभाग के आसपास लो प्रेशर एरिया अति निम्न दाब में बदल गया है। मानसून ट्रफ खजुराहो और इस लो प्रेशर एरिया से होते हुए गुजर रही है, साथ ही एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी एक्टिव है। इन मौसमी गतिविधियों के चलते प्रदेश में लगातार बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में मौसम का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय रहेगा। इसके बाद 26 अगस्त को यह सिस्टम आगे बढ़ेगा और कमजोर होगा, जिससे बारिश की सक्रियता में कमी आएगी।
मौसम का पूर्वानुमान
26 अगस्त: वर्तमान सिस्टम कमजोर होने लगेगा, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि में कमी आएगी।
30 अगस्त: बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम प्रणाली सक्रिय होगी, जो मध्य प्रदेश में बारिश के नए दौर की शुरुआत करेगी। इस प्रणाली के प्रभाव से प्रदेश में फिर से बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है।
मौसम विभाग की सलाह
मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे मौसम की अद्यतन जानकारी लेते रहें और आगामी बदलावों के अनुसार योजना बनाएं। विशेष रूप से, 30 अगस्त से शुरू होने वाली नई प्रणाली के कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है।












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