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राज्यसभा में बना रिकॉर्ड, ग्रामीण विकास पर सबसे लंबी बहस, मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा संदेश

shivraj singh chouhan: नई दिल्ली में राज्यसभा में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (18 मार्च 2026) को ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुदान मांगों पर हुई चर्चा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह किसी भी विभाग की अनुदान मांगों पर अब तक की सबसे लंबी बहस है।

उन्होंने सदन में कहा कि 54 सदस्यों ने चार दिनों तक चर्चा में भाग लिया, जो ग्रामीण विकास और गांव-केंद्रित मुद्दों को दी गई सर्वोच्च महत्वपूर्णता को दर्शाता है। चौहान ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि रचनात्मक सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और व्यावहारिक सुझावों को लागू किया जाएगा।

Record made in Rajya Sabha rural development debate shivraj singh chouhan statement

चर्चा का ऐतिहासिक महत्व

शिवराज सिंह चौहान ने सदन को संबोधित करते हुए कहा:"54 लोग इस चर्चा में बोल चुके हैं। आज चौथा दिन है और संसदीय कार्य मंत्री ने जैसा कहा कि यह किसी भी विभाग की अनुदान मांगों पर अब तक की सबसे लंबी चर्चा बन गई है, जो ग्रामीण विकास पर है। मैं आभारी हूं कि आपने ग्रामीण विकास और गांवों को इतना महत्व दिया है।"

उन्होंने कहा कि यह बहस केवल औपचारिकता नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका परिणाम सकारात्मक और ठोस होना चाहिए। मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया:"मैं सभी माननीय सदस्यों को आश्वासन देता हूं कि जो रचनात्मक सुझाव आए हैं और जो लागू किए जा सकते हैं, वे सिर्फ बहस के लिए बहस नहीं रहेंगे। चर्चा सकारात्मक और रचनात्मक होनी चाहिए और अगर सुझाव निकलते हैं तो उन्हें लागू करना और स्वीकार करना हमारी जिम्मेदारी है। मैं पूरा आश्वासन देता हूं कि हम उन सुझावों को लागू करने का पूरा प्रयास करेंगे जो व्यावहारिक और संभव हैं।"

आलोचना का स्वागत, लेकिन रचनात्मक हो

चौहान ने आलोचना को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में फीडबैक जरूरी है, लेकिन आलोचना सिर्फ विरोध के लिए नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा: "हर ऐसी आलोचना का स्वागत है। लेकिन आलोचना सिर्फ आलोचना के लिए नहीं होनी चाहिए। सिर्फ कुछ कहने के लिए आलोचना करना उचित नहीं है। लोकतंत्र सिर्फ ईंट-गारे और सीमेंट से बना ढांचा नहीं है; यह एक पवित्र मंदिर है। मैं यहां बार-बार सिर झुकाता हूं। अगर इस पवित्र मंदिर में कोई मूर्ति है तो वह जनता है और अगर इसमें प्राण है तो वह सार्थक बहस है। इसलिए मैं इस चर्चा का पूरे दिल से स्वागत करता हूं।"

ग्रामीण विकास पर सरकार का विजन

मंत्री ने सदन को याद दिलाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं-प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), मनरेगा, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण सड़कें और जल जीवन मिशन-का जिक्र किया। चौहान ने कहा कि इन योजनाओं से गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंची हैं और अब फोकस आय वृद्धि, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता पर है।

राज्यसभा में चर्चा का सार

चार दिनों तक चली इस ऐतिहासिक बहस में 54 सदस्यों ने भाग लिया। विपक्षी और सत्तापक्ष के सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी, पलायन, जल संकट, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी समस्याओं को उठाया। कई सदस्यों ने मनरेगा में मजदूरी बढ़ाने, आवास योजना में लक्ष्य बढ़ाने और ग्रामीण महिलाओं के लिए कौशल विकास पर जोर दिया। चौहान ने इन सुझावों को गंभीरता से लेने का वादा किया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

भाजपा सांसदों ने इसे ग्रामीण विकास को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चर्चा को सराहा, लेकिन सरकार से और तेजी से काम करने की मांग की। चौहान ने विपक्ष की रचनात्मक आलोचना का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र में बहस ही प्राण है।

यह चर्चा न सिर्फ ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदान मांगों पर थी, बल्कि गांवों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र में लाने का एक बड़ा प्रयास था। शिवराज सिंह चौहान के संबोधन ने सदन में सकारात्मक माहौल बनाया और ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।

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