Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

MP News: राजस्थान पुलिस ने भोपाल से दो वरिष्ठ पत्रकारों को कैसे किया गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला विस्तार से

MP News: राजनीति की चकाचौंध भरी दुनिया में जहां सत्ता के गलियारों में साजिशें बुनी जाती हैं, वहां अब पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेल का एक चौंकाने वाला खेल सामने आया है। राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी, जो जयपुर के राजघराने से ताल्लुक रखती हैं। आरोप है कि झूठी खबरों के जाल में फंसाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई।

इस सनसनीखेज मामले में जयपुर पुलिस ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दो वरिष्ठ पत्रकारों को गिरफ्तार किया है। आरोपी हैं आनंद पांडे और हरीश दिवेकर, जो 'द सूत्र' नामक वेब पोर्टल और यूट्यूब चैनल चलाते हैं। यह गिरफ्तारी न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रही है, बल्कि पत्रकारों को भी परेशान कर रही है, कही ये लोकतंत्र पर हमला तो नहीं?

Rajasthan Deputy CM Diya Kumari blackmailed two journalists Anand and Harish arrested from Bhopal

क्या है पूरा मामला

राजस्थान पुलिस के अनुसार, भोपाल (मध्य प्रदेश) से संचालित वेब पोर्टल 'द सूत्र' (The Sootr) और उसके यूट्यूब चैनल पर पिछले कुछ महीनों में दीया कुमारी के खिलाफ कई झूठी और भ्रामक खबरें प्रकाशित की गई थीं। इनमें से करीब एक दर्जन से अधिक खबरें तथ्यहीन बताई गई हैं, जिनका उद्देश्य दीया कुमारी की छवि को खराब करना था। यह पोर्टल आनंद पांडे (एडिटर-इन-चीफ) और हरीश दिवेकर (मैनेजिंग एडिटर) द्वारा चलाया जाता है। पुलिस का दावा है कि इन खबरों के पीछे ब्लैकमेलिंग का मकसद था, जहां आरोपियों ने खबरें हटाने और आगे न चलाने के बदले 5 करोड़ रुपये की मांग की थी। अगर पैसे न दिए जाते, तो वे 'डिस्ट्रॉय दीया' नाम से एक कैंपेन चलाने की धमकी दे रहे थे।

शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह राठौड़ (सिविल लाइंस, जयपुर निवासी) ने 28 सितंबर 2024 को जयपुर कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया कि 'द सूत्र' पर दीया कुमारी को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है, और खबरें हटाने के लिए भारी रकम मांगी गई। साथ ही, आरोप लगाया गया कि इन खबरों को एक अन्य पोर्टल 'द कैपिटल' पर भी चलाया गया। मामले में चार पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें आनंद पांडे, हरीश दिवेकर के अलावा जीनेश जैन (राजस्थान में 'द सूत्र' का काम संभालने वाले) और अप्रत्यक्ष रूप से अरविंद रावत शामिल हैं।

गिरफ्तारी कैसे हुई?

जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ ने मामले की पुष्टि की और जांच करनी विहार SHO हवा सिंह यादव को सौंपी गई। अनुसंधान के बाद, 17 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) को राजस्थान पुलिस की टीम ने भोपाल पहुंचकर आनंद पांडे और हरीश दिवेकर को गिरफ्तार किया। दोनों को हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया, जहां 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) सुबह तक उन्हें पेश किया जाना था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ से यह पता चलेगा कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं। गिरफ्तारी साइबर क्राइम से जुड़े कानूनों के तहत की गई, क्योंकि यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज और एक्सटॉर्शन का मामला है।

आरोपों का विवरण

  1. फेक न्यूज फैलाना: 'द सूत्र' पर दीया कुमारी से जुड़ी निराधार खबरें चलाई गईं, जो राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाली थीं।
  2. ब्लैकमेलिंग: शिकायतकर्ता ने संपर्क करने पर 5 करोड़ रुपये मांगे गए। आरोपियों ने कहा कि ऐसी खबरें चलाने के लिए उन्हें मोटी रकम मिली है, और पैसे न देने पर छवि बर्बाद कर देंगे।
  3. अन्य कनेक्शन: जीनेश जैन और अरविंद रावत पर मिलीभगत का आरोप है।

प्रतिक्रियाएं और विवाद

यह मामला विवादास्पद है, क्योंकि कुछ लोग इसे पत्रकारिता पर हमला मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे उचित कार्रवाई बता रहे हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार बताया और BJP को 'राजनीतिक तालिबानी' कहा। अन्य पत्रकारों जैसे ओमप्रकाश तिवारी और दिलीप दूदी ने इसे तानाशाही करार दिया, कहते हुए कि सच्चाई उजागर करने पर दबाव डाला जा रहा है। वे मांग कर रहे हैं कि खबरों की सच्चाई की जांच हो, न कि पत्रकारों को गिरफ्तार किया जाए।

समर्थन में आवाजें: कुछ यूजर्स जैसे देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसे पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग बताया और गिरफ्तारी को सही ठहराया। उम्मेद सिंह ने कहा कि केवल पत्रकारिता के नाम पर गैरकानूनी काम नहीं बच सकते।
कांग्रेस की व्यापक आलोचना: एक अन्य रिपोर्ट में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ऐसे गिरफ्तारियों को प्रेस फ्रीडम पर हमला बताया, हालांकि यह एक अलग लेकिन समान संदर्भ में था। यह घटना मध्य प्रदेश और राजस्थान में पत्रकारों पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।

'द सूत्र' का जाल: झूठी खबरों का सिलसिला

'द सूत्र' - नाम सुनते ही लगता है जैसे कोई गुप्त सूत्रों से खबरें लाने वाला प्लेटफॉर्म। लेकिन पुलिस के मुताबिक, यह सूत्र ब्लैकमेल की साजिश का हिस्सा था। भोपाल से संचालित यह वेब पोर्टल और यूट्यूब चैनल पिछले एक महीने में दीया कुमारी के खिलाफ करीब एक दर्जन से ज्यादा झूठी और भ्रामक खबरें चला चुका था। ये खबरें निराधार थीं - राजनीतिक साजिशों से लेकर व्यक्तिगत आरोपों तक, सब कुछ तथ्यों से परे। उदाहरण के तौर पर, कुछ खबरों में दीया कुमारी पर भ्रष्टाचार या अनैतिक संबंधों के आरोप लगाए गए, जो पूरी तरह फर्जी बताए जा रहे हैं।

पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि ये खबरें सिर्फ क्लिकबेट नहीं थीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थीं। "यह बदनामी की कोशिश थी, जो राजनीतिक करियर को तबाह करने के लिए रची गई," उन्होंने कहा। और दिलचस्प बात यह कि इन खबरों को न सिर्फ 'द सूत्र' पर चलाया गया, बल्कि उनके परिचित पोर्टल 'द कैपिटल' पर भी प्रसारित किया गया। जैसे कोई सिंडिकेट काम कर रहा हो!

दोनों आरोपी जयपुर में हैं और पूछताछ जारी है। मामले की जांच चल रही है, और आगे की कार्रवाई पूछताछ पर निर्भर करेगी। यह घटना प्रेस फ्रीडम, फेक न्यूज और राजनीतिक दबाव के बीच बहस को तेज कर रही है। यदि कोई नई अपडेट आती है, तो वह घटनाक्रम बदल सकती

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+