Bhopal News: ठंडे बस्ते में कचरे से कोयला और CNG गैस बनाने की परियोजना, रोजाना निकलता है 800 टन कचरा
राजधानी भोपाल में रोजाना निकलने वाले करीब 800 टन कचरे से कोयला और सीएनजी गैस बनने के लिए लगभग 5 साल पहले दो बड़ी परियोजना शुरू की गई, लेकिन इन दोनों परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार की वजह से राजधानी आज भी स्वच्छता में पीछे है।
हालांकि जिस दिन यह दोनों बड़ी परियोजनाएं शुरू होगी, उसे दिन शहर जरूर कचरा मुक्त नजर आएगा लेकिन फिलहाल रोजाना निकल रहे कचरे का निष्पादन करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। समय सीमा पूरी होने के बावजूद अब तक इस परियोजना को पूरा नहीं किया जा सका है।

सूत्र बताते हैं कि कर टन कचरे का ही निष्पादन बड़ी मुश्किल से हो पा रहा है। निजी कंपनी के छोड़े जाने के बाद में से नगर निगम ने कचरे के निष्पादन की कमान संभाली लेकिन कर्मचारियों की उदासीनता की वजह से यह महत्वपूर्ण काम भगवान भरोसे चल रहा है।
अगले साल तक तैयार होगा प्लांट
आदमपुर छावनी में करीब 4-5 साल पहले चारकोल प्लांट के लिए परियोजना बनी थी। इसके बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ वर्तमान में प्लाट का 25% काम पूरा हुआ है। शेष 75% कम एनटीपीसी द्वारा 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 15 एकड़ क्षेत्रफल में बाउंड्री वॉल का निर्माण किया जा चुका है। साइट व सरफेस ड्रेसिंग का कार्य चल रहा है इस मामले में महापौर मालती राय का कहना है कि बड़ी परियोजना पर काम तेजी से चल रहा है। इन परियोजनाओं के नंबर भी स्वच्छता में जुड़े हैं। हमें उम्मीद है कि स्वच्छता में इस बार नगर निगम को अच्छी राय जरूर मिलेगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी गति और महापौर मालती राय सवालों से भागती हैं?
राजधानी भोपाल में ये अकेली परियोजना नहीं है इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना का काम भी इतनी धीमी गति से चल रहा है कि लोगों को मकान मिलना तो दूर की बात है, समय से निर्माण पूरा हो जाए तो यही लाभार्थियों के लिए राहत भरी खबर होगी।
भोपाल के बागमुगलिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के लिए बनाए जा रहे ईडब्ल्यूएस फ्लैटों का निर्माण बेहद धीमी गति से चल रहा है। महापौर मालती राय के इस मुद्दे पर चुप्पी ने स्थानीय लोगों में असंतोष और निराशा पैदा कर दी है।
परियोजना का धीमा प्रगति
यह योजना 2022 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब 2025 की ओर बढ़ते हुए भी कई फ्लैट अधूरे हैं। ऐसे में कुछ लाभार्थी तो आधे-अधूरे निर्माण में रहने को मजबूर हो गए हैं। जब इस विषय पर संवाददाता एलेन मालवीय ने महापौर से सवाल किया, तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं।
महापौर की अनसुनी
महापौर का यह रवैया लोगों को चौंकाता है। आखिर कैसे जनता ऐसे नेताओं को वोट देती है जो उनके मुद्दों पर चर्चा करने से भागते हैं? महापौर सिर्फ बयानबाजी कर रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि काम की गति इतनी धीमी है कि इसे पूरा होने में और वर्षों लग सकते हैं।
अन्य समस्याएं
इसके अलावा, राजधानी भोपाल में जगह-जगह गड्ढे बन रहे हैं, जिससे नागरिकों को परेशानी हो रही है। धूल और प्रदूषण के कारण कई लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो गए हैं, लेकिन महापौर को इस स्थिति की कोई चिंता नहीं है।
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता का परिचायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जनप्रतिनिधियों को अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन करना चाहिए। भोपालवासियों को बेहतर जीवन और सुरक्षित आवास की आवश्यकता है, और यह जिम्मेदारी स्थानीय नेतृत्व की है कि वे जनता की समस्याओं का समाधान करें।












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