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जानिए भोपाल AIIMS से प्लाज्मा चोरी का कैसे खुलासा, मास्टरमाइंड दीपक का महाराष्ट्र कनेक्शन, 6 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी का मामला अब अंतरराज्यीय रैकेट में बदल गया है। पुलिस ने मंगलवार को एक और बड़ा खुलासा किया कि पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड दीपक नामक व्यक्ति है, जो महाराष्ट्र के नासिक में रहता है और ब्लैक मार्केट में चोरी के प्लाज्मा को 5 गुना दाम पर बेचता था। अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें AIIMS के एक आउटसोर्स कर्मचारी शामिल है, जिसने दीपक को आंतरिक नेटवर्क उपलब्ध कराया था।

पुलिस ने नासिक के लिए एक टीम रवाना कर दी है, जहां दीपक की पैथोलॉजी लैब और ब्लड बैंक से जुड़े सबूत बरामद हो सकते हैं। गिरोह को प्रति यूनिट 500-1,000 रुपये में खरीदकर 5,000 रुपये तक के मुनाफे से लाखों की कमाई हो रही थी।

Plasma theft case from AIIMS exposed Mastermind Deepak s Maharashtra connection 6 arrested

यह चोरी न केवल मरीजों की जान जोखिम में डाल रही थी, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ी कर रही है। भोपाल पुलिस ने कहा कि जांच में महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं, और जल्द बड़ा खुलासा हो सकता है। विपक्ष ने इसे "BJP सरकार में स्वास्थ्य लापरवाही" बताते हुए CBI जांच की मांग की है, जबकि AIIMS प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

यह मामला 28 सितंबर 2025 को तब उजागर हुआ, जब AIIMS की सिक्योरिटी टीम ने आउटसोर्स कर्मचारी अंकित केलकर की बैग से दो प्लाज्मा यूनिट बरामद की। शुरुआती जांच में पता चला कि यह चोरी का सिलसिला लंबा था, और अब महाराष्ट्र कनेक्शन से मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। क्या यह गिरोह और बड़े नेटवर्क का हिस्सा है? पुलिस की नासिक टीम के लौटने पर सच्चाई सामने आ सकती है।

सिक्योरिटी चेक से अंतरराज्यीय रैकेट तक

मामला 28 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 3 बजे AIIMS भोपाल के ब्लड बैंक में शुरू हुआ। सिक्योरिटी स्टाफ ने आउटसोर्स कर्मचारी अंकित केलकर (26 वर्ष) की बैग चेक की, जिसमें दो प्लाज्मा यूनिट्स (ब्लड का तरल हिस्सा) मिलीं। केलकर ने कबूल किया कि वह प्लाज्मा चुराकर बाहर बेचता था। AIIMS ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. ज्ञानेंद्र प्रसाद ने तुरंत बाग सेवनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई।

जांच का सिलसिला:

  • 29 सितंबर: CCTV फुटेज से पता चला कि केलकर कई दिनों से प्लाज्मा चुरा रहा था। उसके साथी अमित (ब्लड बैंक कर्मचारी) और लकी (केलकर का दोस्त) गिरफ्तार।
  • 2 अक्टूबर: अमित और लकी की पूछताछ में खुलासा - वे केलकर से 500-1,000 रुपये प्रति यूनिट में प्लाज्मा खरीदते थे, जो लकी के भाई दीपक को सप्लाई करते। दीपक नासिक में रहता है और वहां ब्लैक मार्केट में 5,000 रुपये तक बेचता था।
  • 4 अक्टूबर: केलकर गिरफ्तार। कुल 6 गिरफ्तारियां - अंकित, अमित, लकी, और तीन अन्य सहयोगी।
  • 9 अक्टूबर: नासिक कनेक्शन पुष्ट। दीपक की पैथोलॉजी लैब और ब्लड बैंक (सीहोर में पहले चलाई थी) से जुड़े सबूत मिले। पुलिस टीम नासिक रवाना।
  • 14 अक्टूबर: नासिक टीम ने दीपक के ठिकाने पर दबिश दी। महत्वपूर्ण दस्तावेज, प्लाज्मा यूनिट्स और बैंक रिकॉर्ड बरामद। दीपक फरार, लेकिन जल्द गिरफ्तारी का दावा।

पुलिस ने अनुमान लगाया कि गिरोह ने 3 महीनों में 200 से अधिक यूनिट्स चुराईं, जिससे 10 लाख का मुनाफा हुआ। ब्लैक मार्केट में प्लाज्मा की डिमांड ब्यूटी ट्रीटमेंट्स और अवैध मेडिकल प्रैक्टिस में है।

गिरोह का नेटवर्क: AIIMS कर्मचारी से नासिक ब्लैक मार्केट तक

  • मास्टरमाइंड दीपक: नासिक निवासी, पूर्व पैथोलॉजी लैब मालिक। भाई लकी के जरिए भोपाल से प्लाज्मा मंगवाता। 5,000 रुपये प्रति यूनिट बेचता।
  • AIIMS लिंक: आउटसोर्स कर्मचारी अंकित केलकर ने आंतरिक नेटवर्क दिया - स्टोरेज एक्सेस, CCTV ब्लाइंड स्पॉट्स। अमित ने चोरी में मदद की।
  • महाराष्ट्र कनेक्शन: दीपक का नेटवर्क नासिक के अवैध लैब्स से जुड़ा। पुलिस ने 10 यूनिट्स बरामद कीं, जो प्लाज्मा थेरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाली थीं।
  • DCP विवेक सिंह (जोन-2): "नासिक टीम ने महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए। दीपक की गिरफ्तारी से पूरा नेटवर्क खुल जाएगा।"

चोरी का असर: मरीजों की जान पर बन आई, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

प्लाज्मा (ब्लड का तरल हिस्सा) बर्न, ट्रॉमा और इम्यून डिसऑर्डर के इलाज में जरूरी है। चोरी से AIIMS के स्टॉक में कमी आई, जिससे मरीज प्रभावित हुए। एक डॉक्टर ने कहा, "प्लाज्मा की कमी से इमरजेंसी केस डिले हो सकते थे।" AIIMS डायरेक्टर ने आंतरिक जांच शुरू की, आउटसोर्स सिस्टम पर सवाल उठे।

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