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“ईंट भी हिली तो कांग्रेस सड़क पर उतरेगी” — भोपाल मानस भवन के पीछे आदिवासी बस्ती में पहुंचे PCC चीफ जीतू पटवारी

Bhopal News: राजधानी भोपाल के मानस भवन में आयोजित सामाजिक न्याय सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कार्यक्रम उस वक्त अचानक बदल गया, जब मानस भवन से सटी आदिवासी झुग्गी बस्ती की महिलाएं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के साथ उनसे मिलने पहुंचीं।

महिलाओं ने रोते-बिलखते हुए पटवारी को बताया कि वे 60 से 70 सालों से यहीं रह रही हैं, लेकिन अब प्रशासन ने उनके घर तोड़ने के नोटिस थमा दिए हैं।

PCC Chief Jitu Patwari reprimanded the ADM on the notice to remove the tribal settlement

महिलाओं ने कहा कि संकरी गलियों में उन्होंने कर्ज लेकर, मजदूरी करके जैसे-तैसे अपने छोटे-छोटे घर बनाए हैं, लेकिन अब मानस भवन के विस्तार या अन्य योजनाओं के नाम पर प्रशासन उन्हें उजाड़ना चाहता है। यह सुनते ही जीतू पटवारी सम्मेलन छोड़कर खुद आदिवासी बस्ती में पहुंचे और मौके पर हालात का जायजा लिया।

"यह किसी नेता का बयान नहीं, गरीब महिला का दर्द है"

बस्ती की एक महिला ने भावुक होकर कहा- "कांग्रेस की सरकार में अर्जुन सिंह जी ने हमें औज़ार दिए, मानदेय दिया। आज भाजपा सरकार हमारे घर तोड़ रही है।" यह सुनकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। पटवारी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि एक गरीब मजदूर महिला का दर्द है, जिसे सरकार सुनना नहीं चाहती।

40-60 साल पुरानी बस्ती पर बुलडोज़र की तैयारी

भोपाल के मानस भवन के पीछे बसी यह आदिवासी झुग्गी बस्ती पिछले 40 से 60 वर्षों से अस्तित्व में है। यहां रहने वाले लोग पीढ़ियों से यहीं मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। आरोप है कि भाजपा सरकार बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इन घरों को तोड़ने की तैयारी में है।

लाड़ली बहनों से वादा, जमीन पर बुलडोजर

जीतू पटवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा- "2023 के चुनाव में कहा गया था कि लाड़ली बहनों को पक्का मकान मिलेगा, लेकिन आज उन्हीं लाड़ली बहनों के घर तोड़े जा रहे हैं। यह विकास नहीं, विश्वासघात है। यह शासन नहीं, अत्याचार है।"

झुग्गियों पर लगे दर्द भरे पोस्टर

जब पटवारी बस्ती में पहुंचे तो घरों के बाहर हाथ से लिखे पोस्टर चिपके नजर आए।
पोस्टरों पर लिखा था-

  • "ईंट-ईंट से जोड़ा घर, मत तोड़ो हमारा घर"
  • "संविधान से छेड़छाड़ बंद करो"
  • "हम लेके रहेंगे आज़ादी, अपने हक की"
  • ये पोस्टर प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ बस्तीवासियों की चुपचाप लेकिन गहरी पीड़ा को बयान कर रहे थे।
  • मुख्य सचिव से कॉल, जवाब नहीं

बस्ती से ही जीतू पटवारी ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को फोन लगाया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने स्थानीय एसडीएम और एडीएम से सख्त लहजे में बात की।

पटवारी ने साफ कहा- "कलेक्टर को बता देना, अगर एक भी ईंट हटाई गई तो मैं खुद यहां खड़ा मिलूंगा। पूरी कांग्रेस पार्टी आपके सामने होगी। 40 किलोमीटर दूर घर देकर समस्या हल नहीं होती"

एसडीएम ने पटवारी को बताया कि प्रभावित लोगों को वैकल्पिक आवास दिया जा रहा है। इस पर पटवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी- "अगर 40 किलोमीटर दूर आवास दोगे तो ये लोग काम कैसे करेंगे? बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं, लोग बीमार हैं। बिना संतुष्ट किए एक भी ईंट हिली तो मुझे गिरफ्तार करना पड़ेगा, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।"

"एक ईंट भी नहीं हिलने देंगे"

एडीएम से बातचीत में भी पटवारी ने दो टूक कहा- "मानस भवन के पास 60 साल पुरानी आदिवासी बस्ती है। अगर इसे तोड़ा गया तो मैं और पूरी कांग्रेस पार्टी यहीं खड़ी रहेगी। एक भी ईंट नहीं हटाने देंगे।"

बस्ती की रानू की आपबीती

बस्ती की रहवासी रानू ने कहा- "मेरा बचपन यहीं बीता है। हमने 10-12 रुपये रोज की मजदूरी करके भोपाल के बड़े-बड़े भवनों की नींव डाली है। मानस भवन और गांधी भवन की नींव भी हमने ही रखी थी। आज वही सरकार हमें उजाड़ने पर तुली है।"

कांग्रेस का अल्टीमेटम

इस पूरे घटनाक्रम के बाद साफ है कि मानस भवन के पीछे आदिवासी बस्ती का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि एक भी घर तोड़ा गया, तो वह सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

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