MP बुरहानपुर के स्कूल में सूर्य नमस्कार से पहले बच्चों कैसे कराया जाता था नमाज स्टेप्स, मुस्लिम टीचर सस्पेंड
MP Burhanpur News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के देवरी गांव के एक सरकारी स्कूल में सूर्य नमस्कार से पहले स्कूली बच्चों को 'नमाज के स्टेप्स' कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दीपावली की छुट्टियों के दौरान घर लौटे बच्चों ने परिजनों को यह बात बताई, जिसके बाद हंगामा मच गया।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) संतोष सिंह सोलंकी ने शनिवार को स्कूल पहुंचकर 5वीं कक्षा की छात्राओं से पूछताछ की, जहां बच्चियों ने न केवल आरोपों की पुष्टि की, बल्कि अधिकारियों के सामने नमाज की मुद्राएं करके भी दिखाईं। इस घटना के बाद आरोपी शिक्षक जबूर अहमद तड़वी को तत्काल निलंबित कर दिया गया।

हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों ने इसे 'धर्मांतरण की साजिश' करार देते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि शिक्षक ने आरोपों को 'बेबुनियाद' बताते हुए सफाई दी है। यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता और स्कूलों में सांस्कृतिक एकरूपता पर भी बहस छेड़ रहा है।
दीपावली छुट्टी ने खोला राज
घटना देवरी के गौवर्नमेंट मिडिल स्कूल (शाहपुर थाना क्षेत्र) की है, जहां जबूर अहमद तड़वी (मुस्लिम समुदाय से) योग शिक्षक के रूप में तैनात थे। परिजनों के अनुसार, सुबह की प्रार्थना सभा में सूर्य नमस्कार से पहले बच्चों को नमाज की तरह झुकने, हाथ जोड़ने और सजदा करने जैसी मुद्राएं सिखाई जाती थीं। 5वीं कक्षा की छात्रा ने DEO को बताया, "तड़वी सर ने कहा था कि यह योगा का हिस्सा है, लेकिन यह नमाज जैसा लगता था। हम रोज करते थे।" बच्चियों ने स्टेप्स दिखाते हुए कहा कि पहले हाथ जोड़कर झुकना, फिर घुटनों पर बैठना और सिर झुकाना - जो नमाज के रकातों से मिलते-जुलते थे।
दीपावली की छुट्टियों (23-27 अक्टूबर) के दौरान बच्चे घर लौटे, तो उन्होंने परिजनों को यह राज खोला। एक पालक ने कहा, "मेरी बेटी ने घर आकर बताया कि सर नमाज के स्टेप्स कराते हैं। हमने सोचा शायद गलतफहमी है, लेकिन स्कूल जाकर देखा तो सच्चाई सामने आ गई।" शुक्रवार (25 अक्टूबर) को हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अजीत परदेसी स्कूल पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से बात की, जहां आरोपों की पुष्टि हुई। परदेसी ने कहा, "यह सूर्य नमस्कार का बहाना बनाकर हिंदू बच्चों को नमाज सिखाने की साजिश थी। धर्मांतरण रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी।"
DEO की जांच: बच्चियों के स्टेप्स ने खोली पोल, शिक्षक निलंबित
शनिवार (26 अक्टूबर) को DEO संतोष सिंह सोलंकी ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने 5वीं की 4-5 छात्राओं से अलग-अलग बात की, जहां बच्चियों ने न केवल आरोप दोहराए, बल्कि अधिकारियों के सामने नमाज स्टेप्स करके दिखाए। एक वीडियो, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, में DEO को बच्चियां स्टेप्स दिखाती नजर आ रही हैं। सोलंकी ने कहा, "बच्चों के बयानों से साफ है कि योग के नाम पर गलत मुद्राएं सिखाई जा रही थीं। प्राचार्य की लापरवाही भी सामने आई।"
जांच के बाद जबूर अहमद तड़वी को तत्काल निलंबित कर दिया गया। अपर कलेक्टर वीर सिंह चौहान ने पुष्टि करते हुए बताया, "DEO की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई। पूर्ण जांच के बाद आगे का कदम उठाया जाएगा।" जिला प्रशासन ने स्कूल में सांस्कृतिक जागरूकता पर जोर देते हुए निर्देश जारी किए कि योग केवल सरकारी पाठ्यक्रम के अनुसार हो।
शिक्षक का बचाव: 'शशांकासन था, नमाज नहीं' - वायरल वीडियो पर सफाई
निलंबन के बाद जबूर तड़वी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। मैं सरकार के निर्देश पर योग सिखा रहा था। यह शशांकासन (बालासन) आसन था, जो नमाज से मिलता-जुलता लग सकता है, लेकिन योग का हिस्सा है।" तड़वी ने दावा किया कि हिंदू जागरण मंच ने इसे सांप्रदायिक रंग देकर विवाद खड़ा किया। उन्होंने कहा, "मैं 10 साल से सरकारी शिक्षक हूं, कभी कोई शिकायत नहीं। जांच में सच्चाई सामने आएगी।"
हालांकि, परिजनों और संगठनों ने उनका बचाव खारिज कर दिया। एक पालक ने कहा, "अगर योग था, तो सूर्य नमस्कार से पहले क्यों? बच्चे खुद बता रहे हैं।"
पालकों का आक्रोश: 'बच्चों का धर्मांतरण हो रहा था'
पालकों ने स्कूल के बाहर धरना दिया और साइनबोर्ड लगाकर नारा लगाया: "हमारे बच्चों का धर्मांतरण नहीं होने देंगे।" एक पालक ने बताया, "दीपावली पर बच्चे घर आए, तो नमाज स्टेप्स का जिक्र किया। हमने जनशिक्षक को सूचना दी, जो DEO तक पहुंची।" हिंदू जागरण मंच ने इसे 'लव जिहाद' से जोड़ते हुए कहा कि मुस्लिम शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल उठते हैं। संगठन ने जिला कलेक्टर से मिलकर FIR की मांग की।
व्यापक प्रभाव: MP में धार्मिक विवादों का नया अध्याय?
मध्य प्रदेश में सूर्य नमस्कार को लेकर पुरानी बहसें रही हैं। 2015 में मंत्री ने कहा था कि "नमाज भी सूर्य नमस्कार का रूप है", जबकि 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। NCRB के अनुसार, राज्य में धार्मिक विवादों से जुड़े अपराध 15% बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में सांस्कृतिक संवेदनशीलता की ट्रेनिंग जरूरी। एक पूर्व शिक्षा अधिकारी ने कहा, "योग को धार्मिक न बनाएं, लेकिन गलत प्रैक्टिस पर सख्ती बरतें।"
क्या कहता है कानून? आगे की जांच
BNS की धारा 196 (धार्मिक भावनाएं भड़काना) और शिक्षा विभाग के नियमों के तहत जांच चल रही है। अगर साजिश साबित हुई, तो तड़वी पर आपराधिक मुकदमा हो सकता है। DEO ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए: "योग केवल NCC/AYUSH गाइडलाइंस से।"
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