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MP News: भोपाल के अंबेडकर पार्क में संविदा कर्मचारियों फूटा गुस्सा, “नियमित करो या आर-पार की लड़ाई”

भोपाल। "हम सरकार चलाते हैं, लेकिन सरकार हमें चलाती है!" - यह नारा शनिवार को लिंक रोड नंबर-2 के अंबेडकर पार्क में गूंजता रहा। मध्य प्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले हजारों संविदा कर्मचारी सड़क पर उतरे और 9 सूत्री मांगों को लेकर धरना दिया।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी - "अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आने वाले दिनों में भोपाल को ठप कर देंगे। अनिश्चितकालीन आंदोलन, रेल रोको, विधानसभा घेराव - सब कुछ करेंगे। यह हमारी हक, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।"

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प्रदेश संयोजक दिनेश सिंह तोमर और सह-संयोजक भार्गव ने मंच से ऐलान किया, "हम 10-15 साल से संविदा पर काम कर रहे हैं। नियमित कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं, लेकिन वेतन आधा, सुविधाएं शून्य। महंगाई भत्ता तक नहीं मिलता। 2023 की संविदा नीति का एक भी बिंदु लागू नहीं हुआ। अब बहुत हुआ!"

सबसे बड़ा दर्द: महंगाई भत्ता भी छिना

संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता (DA) नहीं मिलता। सरकार सिर्फ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI इंडेक्स) के आधार पर 2-3 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी करती है, जबकि नियमित कर्मचारियों को हर छह महीने में 3-5 प्रतिशत DA मिलता है।

तोमर ने कहा, "आज नियमित कर्मचारी 55-58% DA ले रहे हैं, हम अब भी 20-25% पर अटके हैं। महंगाई ने कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।"

9 सूत्री मांगें जो सरकार की नींद उड़ा रही हैं

  • CPI इंडेक्स की जगह नियमित कर्मचारियों की तरह घोषणा तारीख से महंगाई भत्ता (DA)
  • नियमित कर्मचारियों की तरह अर्जित अवकाश, मेडिकल लीव, चाइल्ड केयर लीव और अवकाश निष्कासित न हो
  • 2023 की संविदा नीति का अक्षरशः पालन
  • सीधी भर्ती के 50% पदों पर अनुभवी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
  • योजना बंद होने पर संविदा कर्मचारियों का समकक्ष विभाग में समायोजन
  • वेतन विसंगति के सभी प्रार्थना-पत्र एक महीने में निराकृत हों
  • जात्मा योजना (कृषि), ई-गवर्नेंस, मनरेगा, दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों में संविदा नीति तुरंत लागू हो
  • नगरीय प्रशासन में शहरी गरीबी उपशमन प्रकोष्ठ का कैडर रिवीजन
  • हर संविदा कर्मचारी का कम से कम 20 लाख का सामूहिक बीमा और पेंशन सुविधा

कौन हैं ये संविदा कर्मचारी?

  • स्वास्थ्य विभाग में हजारों स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन
  • शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षक, संविदा शिक्षक
  • कृषि विभाग में जात्मा योजना के एक्सटेंशन ऑफिसर
  • मनरेगा में डेटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास में रोजगार सहायक
  • नगरीय निकायों में सफाई कर्मचारी, क्लर्क
  • समाज कल्याण में दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों के फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट

ये सभी कर्मचारी 10-15 साल से संविदा पर काम कर रहे हैं। कई तो 50 साल की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन नौकरी पक्की नहीं।

महिला कर्मचारियों का दर्द

धरने में बड़ी संख्या में महिला संविदा कर्मचारी भी थीं। एक स्टाफ नर्स ने रोते हुए कहा, "हम कोरोना काल में दिन-रात ड्यूटी कीं। मरीजों को गोद में उठाया, लेकिन आज हमारे अपने बच्चे के लिए चाइल्ड केयर लीव तक नहीं है। डिलीवरी के बाद 3 महीने बाद ही ड्यूटी जॉइन करनी पड़ती है। क्या हम इंसान नहीं?"

अगला प्लान: भोपाल को ठप करने की तैयारी, मंच के नेताओं ने चेतावनी दी है:

  • 5 दिसंबर तक मांगें नहीं मानीं तो जिला मुख्यालयों पर सामूहिक अवकाश
  • 15 दिसंबर से भोपाल में अनिश्चितकालीन धरना
  • विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव
  • रेल रोको आंदोलन

प्रदेश अध्यक्ष तोमर ने कहा, "हम वोट बैंक नहीं, सरकार का इंजन हैं। अगर इंजन ही बंद हो गया तो पूरी मशीनरी ठप हो जाएगी।"

सरकार की चुप्पी

आंदोलन के बावजूद अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय, सामान्य प्रशासन विभाग या वित्त विभाग से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 2023 की संविदा नीति में कई अच्छी बातें लिखी गई थीं, लेकिन उसे लागू करने के लिए बजट प्रावधान तक नहीं हुआ।

संविदा कर्मचारी अब पूछ रहे हैं -
"हम संविदा पर जन्मे नहीं, मजबूरी में लगे हैं।
कब तक अस्थायी रहेंगे?
कब मिलेगा सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व?"

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