MP News: देश में सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश में बंद! 54 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों से गायब, जानिए पूरी खबर
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सरकार की नीतियां कठघरे में खड़ी नजर आ रही हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए ऐसे आंकड़े सामने रखे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करते हैं।
उमंग सिंघार का दावा है कि बीते पांच वर्षों में देश में सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश में बंद हुए हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच प्रदेश में 10 हजार से अधिक स्कूलों पर ताले लगे, जो किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा है।

बजट सत्र के दौरान संसद में सरकार द्वारा दिए गए जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केवल शासकीय स्कूलों की बात करें तो मध्य प्रदेश में करीब 7 हजार सरकारी स्कूल बंद किए गए, जबकि इसी अवधि में पूरे देश में लगभग 18 हजार स्कूल बंद हुए। यह आंकड़ा अपने आप में प्रदेश की शिक्षा नीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।
सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच साल में मध्य प्रदेश में करीब 3,300 निजी स्कूल बंद हो चुके हैं। वर्ष 2020 में जहां प्रदेश में 31,512 निजी स्कूल संचालित हो रहे थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या घटकर 28,212 रह गई।
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यह गिरावट इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक ओर स्कूल शिक्षा विभाग का बजट हर साल बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी ओर सरकारी स्कूलों से बच्चों की संख्या तेजी से कम क्यों हो रही है। विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में शासकीय स्कूलों से 54.27 लाख बच्चे कम हो गए हैं। वर्ष 2010-11 में कक्षा 1 से 12 तक सरकारी स्कूलों में 1.33 करोड़ विद्यार्थी दर्ज थे, जो 2025-26 में घटकर महज 79 लाख रह गए हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी अवधि में स्कूल शिक्षा बजट में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। जहां कभी स्कूल शिक्षा का बजट लगभग 6,300 करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर 36,581 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और नामांकन में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा।
उमंग सिंघार ने खास तौर पर छात्राओं की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उनका कहना है कि प्रदेश के करीब 27 हजार स्कूलों में अब भी शौचालय की सुविधा नहीं है, जिनमें 9,017 बालिका विद्यालय शामिल हैं। इस कमी का सीधा असर दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाली छात्राओं पर पड़ रहा है, जो सुविधाओं के अभाव में बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।
कुल मिलाकर, आंकड़े यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब शिक्षा बजट हजारों करोड़ बढ़ चुका है, तो फिर स्कूल क्यों बंद हो रहे हैं और बच्चे शिक्षा से क्यों दूर होते जा रहे हैं-यही सवाल अब मध्य प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गया है।
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