MP News: आयुष्मान योजना पर मेडिकल माफिया का कब्जा, 10 लाख दो, अस्पताल इम्पैनल करवाओ! जानिए कैसे
MP News Ayushman Yojana: गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना मध्य प्रदेश में अब अपने मूल मकसद से भटकती नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश में यह योजना धीरे-धीरे मेडिकल माफिया के कब्जे में जाती जा रही है, जहां इलाज से ज्यादा जोर सरकारी पैसों की निकासी पर है।
सूत्रों और पड़ताल में सामने आया है कि इलाज के नाम पर करोड़ों रुपये का सरकारी भुगतान निजी अस्पतालों को किया जा रहा है, लेकिन वास्तविक लाभ न तो मरीजों को मिल रहा है और न ही योजना का उद्देश्य पूरा हो रहा है। आयुष्मान योजना अब गरीबों की ढाल नहीं, बल्कि माफिया के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है।

आयुष्मान भारत योजना को लेकर चल रहे मेडिकल माफिया के खेल पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। राजधानी भोपाल के पांच निजी अस्पतालों की आयुष्मान योजना से मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। इन अस्पतालों पर आरोप है कि इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर किराए के डॉक्टरों के सहारे आयुष्मान योजना का लाभ उठाया।
इम्पैनलमेंट का खेल: कागजों पर अस्पताल, हकीकत में फर्जीवाड़ा
आयुष्मान योजना के तहत किसी भी निजी अस्पताल को सूचीबद्ध (इम्पैनल्ड) होने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक संसाधन और तय मानकों का पालन अनिवार्य है। लेकिन मध्य प्रदेश में इन नियमों को कागजों तक सीमित कर दिया गया है। पड़ताल में सामने आया है कि अस्पतालों को इम्पैनल कराने के लिए एक पूरा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें
- दलाल
- फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंट
- कुछ निजी डॉक्टर
- और कथित तौर पर सरकारी सिस्टम से जुड़े अधिकारी शामिल हैं
बिना जमीनी जांच के अस्पतालों को आयुष्मान में शामिल कर लिया जाता है और फिर शुरू होता है सरकारी खजाने पर डाका।
किराए के डॉक्टर, इलाज शून्य
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि कई निजी अस्पतालों में दिखाए गए विशेषज्ञ डॉक्टर वास्तव में वहां काम ही नहीं करते। मेडिकल माफिया 2 से 3 लाख रुपये महीने पर डॉक्टरों के नाम "किराए" पर ले लेता है। डॉक्टर सिर्फ कागजों में अस्पताल से जुड़े रहते हैं। मरीजों का इलाज कभी नहीं करते, लेकिन उन्हीं के नाम पर इलाज दिखाकर आयुष्मान योजना से भुगतान उठा लिया जाता है। यानी कागजों में सुपर स्पेशियलिटी, हकीकत में मरीज भगवान भरोसे।
10 लाख दो, अस्पताल इम्पैनल करवा दो!
जांच के दौरान एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया। मीडिया रिपोर्टर की मुलाकात आयुष्मान विभाग के सीईओ योगेश भरसट के पीए छोटेलाल सिंह से हुई, जिसने सीधे तौर पर पैसों की मांग कर दी।
छोटेलाल ने कहा कि "अगर 10 लाख रुपए दिए जाएं, तो मार्च के बाद आयुष्मान से हटाए जाने वाले करीब 200 अस्पतालों की सूची में नए अस्पतालों के नाम जोड़ दिए जाएंगे।" यानी पैसा दो, नियम तोड़ो और सरकारी योजना में घुस जाओ।
सरकार की कार्रवाई: सस्पेंशन और बर्खास्तगी
इस पूरे खुलासे के बाद सरकार को हरकत में आना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए: पीए छोटेलाल सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया। आयुष्मान विभाग के महाप्रबंधक (ऑपरेशनल) इंद्रजीत सिकरवार भी सस्पेंड
आयुष्मान मित्र संदीप सिंह की सेवाएं समाप्त
यह कार्रवाई भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के बाद की गई, जिसने पूरे सिस्टम की परतें खोल दीं।
मरीज लाने पर कमीशन, दलालों की फौज
आयुष्मान योजना के नाम पर मरीजों की खरीद-फरोख्त भी खुलकर हो रही है।
दलालों की टीमें:
गांवों, कस्बों, सरकारी अस्पतालों के बाहर, जिला अस्पतालों के आसपास घूमती रहती हैं। मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने पर कमीशन तय होता है- जितना बड़ा पैकेज, उतना बड़ा हिस्सा।
कई मामलों में:
- बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है
- अनावश्यक भर्ती कराई जाती है
- बेवजह ऑपरेशन और इलाज दिखाकर भुगतान निकाला जाता है
नर्सिंग होम से आयुष्मान तक का शॉर्टकट
जांच में यह भी सामने आया कि पहले नर्सिंग होम का लाइसेंस लिया जाता है, फिर मामूली कागजी बदलाव कर अस्पताल को आयुष्मान योजना में शामिल करा दिया जाता है।
जरूरी संसाधनों की जांच नहीं होती
- निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाता है
- इसके बाद अस्पताल पूरी तरह दलालों और माफिया के हवाले
- मरीज सिर्फ एक "फाइल नंबर" बनकर रह जाते हैं।
अफसरों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल सरकारी अफसरों की भूमिका को लेकर उठ रहा है। जानकारों का कहना है कि:
- बिना मिलीभगत फर्जी इम्पैनलमेंट संभव नहीं
- शिकायतों के बावजूद सालों से अस्पताल चल रहे हैं
- कुछ अफसर आंख मूंदे बैठे हैं, तो कुछ पर संरक्षण देने के आरोप
- यही वजह है कि आयुष्मान योजना लूट का अड्डा बनती जा रही है।
सबसे ज्यादा नुकसान गरीब मरीजों को
इस पूरे सिस्टम का सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं गरीबों को हो रहा है, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी।
- कहीं सही इलाज नहीं
- कहीं इलाज के नाम पर धोखा
- कहीं हालत और बिगड़ जाती है
- सरकारी पैसा तो निकल जाता है, लेकिन मरीज की जिंदगी अधर में रह जाती है।
- सवाल वही-कब टूटेगा मेडिकल माफिया का जाल?
मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े ये खुलासे सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करते हैं।
अब सवाल यह है-
- क्या मेडिकल माफिया पर सख्त कार्रवाई होगी?
- क्या दोषी अफसरों तक जांच पहुंचेगी?
- या गरीबों के नाम पर चल रही यह लूट यूं ही जारी रहेगी?
मेडिकल माफिया का पूरा खेल, उसके किरदार और सिस्टम की परतें-
पढ़ते रहिए, सिर्फ वन इंडिया पर।
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