14 मार्च तक नहीं लगी अंबेडकर मूर्ति तो लाखों कार्यकर्ता लगाएंगे: ASP नेता दामोदर यादव
मध्य प्रदेश में संविधान, जातिगत राजनीति और सामाजिक न्याय को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य और दलित पिछड़ा समाज संगठन (DPSS) के संस्थापक दामोदर सिंह यादव ने रविवार को मीडिया से मुख़ातिब होते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) देश में जाति और वर्ग के आधार पर टकराव पैदा करना चाहती हैं, और इसके लिए मध्य प्रदेश को प्रयोगशाला बनाया जा रहा है।

दामोदर यादव ने दावा किया कि भारतीय संविधान को कमजोर कर मनु विधान लागू करने की सोच के तहत ग्वालियर-चंबल अंचल को चुना गया है, ताकि सामाजिक विभाजन को हवा दी जा सके।
"संविधान को खत्म करने की साजिश"
दामोदर यादव ने कहा कि देश को जिस संविधान ने एक सूत्र में बांधा है, उसी पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि- "आरएसएस और बीजेपी की सोच है कि संविधान हटाकर मनु विधान से देश चलाया जाए। ग्वालियर-चंबल इसका केंद्र बनाया गया है, जहां जाति और वर्ग के नाम पर तनाव पैदा किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि आज़ाद समाज पार्टी और भीम आर्मी इस मंशा को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगी।
ग्वालियर हाईकोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा को लेकर अल्टीमेटम
दामोदर यादव ने ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर साफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा-"अगर 14 मार्च तक सरकार डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगाती है, तो भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के लाखों कार्यकर्ता स्वयं ग्वालियर पहुंचकर प्रतिमा स्थापित करेंगे।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन संविधान के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री को सीधी चुनौती
दामोदर यादव ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा- "हम मध्य प्रदेश में न तो जातिवाद की आग भड़कने देंगे और न ही पाखंड व आडंबर को चलने देंगे। ग्वालियर हाईकोर्ट में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा हर हाल में लगेगी।" उन्होंने चेताया कि यदि सरकार ने समय रहते निर्णय नहीं लिया, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
क्यों गरमाया है ग्वालियर का मामला
गौरतलब है कि ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा पर आरोप है कि वे लगातार अंबेडकर विरोधी बयान देते रहे हैं, जिससे दलित संगठनों और सर्व समाज के लोगों में गहरा आक्रोश है। इसी विवाद के चलते ग्वालियर में कई बार भीम आर्मी और अन्य सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला है।
बढ़ती सियासी और सामाजिक चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दामोदर यादव की यह चेतावनी मामले को और संवेदनशील बना सकती है। एक ओर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है।
अब सभी की निगाहें 14 मार्च पर टिकी हैं- क्या सरकार समय रहते फैसला लेगी, या ग्वालियर एक बड़े आंदोलन का गवाह बनेगा?












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