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MP News Bhopal: जानिए ESB नर्सिंग फैकल्टी भर्ती पर हाईकोर्ट की सख्ती क्यों, गजट उल्लंघन के आरोप

MP News Nursing: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) भोपाल द्वारा जारी की गई नर्सिंग फैकल्टी भर्ती अधिसूचना अब गंभीर कानूनी विवाद में फंस गई है। इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर आरोप है कि चयन मंडल ने वर्ष 2024 की राजपत्र (गजट) अधिसूचना के स्पष्ट प्रावधानों की अनदेखी करते हुए विज्ञापन जारी किया, जिससे वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों के अधिकारों का हनन हुआ है।

मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ में न्यायमूर्ति विशाल धगत के समक्ष हुई, जहां कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग समेत सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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भर्ती प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि ESB द्वारा जारी की गई विवादित नर्सिंग फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि चयन मंडल की यह भर्ती प्रक्रिया अब न्यायिक निगरानी में आ गई है और आगे होने वाली किसी भी कार्रवाई का भविष्य कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।

गजट अधिसूचना के उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और अंशुल तिवारी ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2024 में जारी गजट अधिसूचना के अनुसार-

एसोसिएट प्रोफेसर के पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने थे, लेकिन ESB ने नियमों को ताक पर रखते हुए 40 पदों को सीधी भर्ती के लिए विज्ञापित कर दिया। इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए 60 प्रतिशत पदोन्नति और 40 प्रतिशत सीधी भर्ती का प्रावधान था, मगर चयन मंडल ने सभी पदों को पूरी तरह सीधी भर्ती से भरने का विज्ञापन जारी कर दिया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह न केवल गजट अधिसूचना का उल्लंघन है, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे नर्सिंग ऑफिसरों के साथ खुला अन्याय भी है।

फैकल्टी संकट में लिया गया काम, अब अनदेखी

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि सीबीआई जांच के बाद विभाग में गंभीर फैकल्टी संकट उत्पन्न हो गया था। उस समय शासन ने इन्हीं योग्य और अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों को अस्थायी प्रभार देकर-

  • असिस्टेंट प्रोफेसर
  • एसोसिएट प्रोफेसर

जैसे महत्वपूर्ण पदों पर वर्षों तक कार्य कराया।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जब विभाग संकट में था, तब इन्हीं अधिकारियों के कंधों पर पूरी व्यवस्था टिकी रही, लेकिन अब जब नियमित भर्ती की बारी आई तो उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

न पदोन्नति, न नियमितीकरण

नर्सिंग ऑफिसरों का कहना है कि वर्षों तक उच्च पदों की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद-

  • न तो उन्हें पदोन्नत किया गया
  • न ही नियमित किया गया

और अब सीधी भर्ती निकालकर उनके अनुभव, योग्यता और सेवा को दरकिनार किया जा रहा है।

67 नर्सिंग ऑफिसरों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

यह याचिका मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर की गई है, जिसमें 67 नर्सिंग ऑफिसर शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि- उनके पास 10 से 25 वर्षों तक का अनुभव है। वे लंबे समय से संबंधित फैकल्टी पदों पर अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें पात्र होने के बावजूद पदोन्नति से वंचित रखा गया।

फैसला तय करेगा भविष्य

अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आगामी आदेश पर टिकी हैं। यदि कोर्ट गजट अधिसूचना के उल्लंघन को सही ठहराता है, तो ESB की पूरी नर्सिंग फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ सकता है। यह मामला न केवल भर्ती नियमों की पारदर्शिता, बल्कि सरकारी विभागों में कार्यरत अनुभवी कर्मचारियों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

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