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MP News: केंद्र के 58% DA के मुकाबले राज्य में सिर्फ 55% भत्ता, भुगतान में देरी, 10 लाख परिवारों का इंतजार

MP News: मध्य प्रदेश सरकार की घोषणाओं के बावजूद सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में आर्थिक असंतोष की लहर तेज हो रही है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनर्स को समान अनुपात में महंगाई राहत (DR) मिल रही है, लेकिन राज्य के लाखों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों को अभी भी 55 प्रतिशत ही मिल रहा है।

अप्रैल 2025 में 5 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा तो हुई, लेकिन जुलाई 2025 से 3 प्रतिशत अतिरिक्त DA-DR का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। दिवाली पर इसकी उम्मीद थी, लेकिन भुगतान में देरी और एरियर (बकाया राशि) के भुगतान पर अस्पष्टता से कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ जैसे संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सरकार ने अप्रैल 2025 में एक बड़े ऐलान के साथ DA को 50 से बढ़ाकर 55 प्रतिशत करने का फैसला किया था, जो जुलाई 2024 से 3 प्रतिशत और जनवरी 2025 से 2 प्रतिशत की दो किस्तों में लागू होना था। लेकिन जुलाई से 3 प्रतिशत की यह वृद्धि अब तक वित्त विभाग से आदेश जारी होने का इंतजार कर रही है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए यह देरी असहनीय है। नवंबर 2025 के अंत तक कोई आधिकारिक आदेश न आने से सैलरी में इजाफा रुका हुआ है, जबकि केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से ही 58 प्रतिशत DA लागू कर दिया।

10 लाख से अधिक परिवारों का आर्थिक संकट, हर महीने 100 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया, "मध्य प्रदेश में लगभग 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी और 4.5 लाख पेंशनर्स हैं। इनके कुल 10 लाख परिवारों में 30 लाख से अधिक सदस्य हैं, जिनकी जिंदगी DA-DR पर निर्भर है। महंगाई ने सब्जी-दाल के दाम दोगुने कर दिए हैं, लेकिन भत्ता न बढ़ने से घर का बजट बिगड़ गया है।" तिवारी ने कहा कि 3 प्रतिशत DA-DR वृद्धि से हर महीने सरकार पर मात्र 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यदि जुलाई 2025 से एरियर का भुगतान भी किया जाता है, तो एकमुश्त 500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "सरकार लाड़ली बहनों को हर महीने 1,800 करोड़ रुपये दे रही है, लेकिन अपने कर्मचारियों-पेंशनर्स को 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने में हिचक रही है। यह अन्याय है।"

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों को मूल वेतन के 55 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि केंद्र में 58 प्रतिशत है। इसका फर्क हर कर्मचारी को औसतन 1,000 से 2,000 रुपये मासिक का नुकसान पहुंचा रहा है। पेंशनर्स के लिए DR का अभाव तो और भी कष्टदायक है, क्योंकि उनकी आय सीमित है। तिवारी ने अपील की, "मुख्यमंत्री को तत्काल जुलाई 2025 से DA-DR वृद्धि का आदेश जारी करना चाहिए। एरियर को 5-6 किस्तों में भुगतान किया जा सकता है, लेकिन देरी से बचें।"

संगठनों की एकजुटता: आंदोलन की धमकी, सरकार पर दबाव बढ़ा

कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। मध्य प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ और पेंशनर्स एसोसिएशन ने संयुक्त बैठक में फैसला लिया है कि यदि 30 नवंबर 2025 तक आदेश न आया तो धरना-प्रदर्शन शुरू होंगे। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में जिला स्तर पर विरोध सभाएं आयोजित की जा रही हैं। एक संगठन प्रतिनिधि ने कहा, "दिवाली पर तोहफे की उम्मीद थी, लेकिन खाली हाथ रह गए। अब नया साल आने वाला है, लेकिन बिना DA के खुशी अधूरी है।"

पिछले सालों की देरी ने भी नाराजगी बढ़ाई है। 2024 में DA वृद्धि जनवरी से घोषित हुई, लेकिन भुगतान नवंबर से शुरू हुआ। एरियर को 4-5 किस्तों में चुकाया गया। इसी तरह, अप्रैल 2025 की 5 प्रतिशत वृद्धि का एरियर जून से अक्टूबर 2025 तक 5 किस्तों में दिया गया, लेकिन अब जुलाई 2025 की 3 प्रतिशत वृद्धि पर विलंब हो रहा है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, बजट प्रावधान पहले से 58 प्रतिशत के लिए है, इसलिए वित्तीय बाधा नहीं है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी हो रही है।

महंगाई के आंकड़े: क्यों जरूरी है तत्काल वृद्धि?

महंगाई के आंकड़े कर्मचारियों की मांग को मजबूत बनाते हैं। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आधार पर DA तय होता है, जो जुलाई-सितंबर 2025 में औसतन 340 अंक पर पहुंच गया। इससे महंगाई दर 6-7 प्रतिशत ऊपर चली गई है। सब्जी, दूध, ईंधन और किराने के दामों में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि ने निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। एक औसत कर्मचारी की सैलरी 40,000-50,000 रुपये मासिक है, जिसमें DA का हिस्सा 20-25 प्रतिशत होता है। 3 प्रतिशत वृद्धि से 1,200-1,500 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जो परिवार के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

पेंशनर्स की स्थिति और भी चिंताजनक है। अधिकांश सेवानिवृत्त लोग 20,000-30,000 रुपये पेंशन पर निर्भर हैं, और DR न बढ़ने से चिकित्सा और दवाओं का खर्च वहन करना मुश्किल हो गया है। संगठनों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें जुलाई 2025 से प्रभावी DA-DR और एरियर भुगतान की मांग दोहराई गई है।

सरकार का रुख: बजट में प्रावधान, लेकिन कार्रवाई में सुस्ती

सरकार ने 2024-25 के बजट में DA-DR के लिए 58 प्रतिशत तक प्रावधान रखा था, जो वित्तीय बोझ को आसान बनाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि वृद्धि का आदेश जल्द जारी होगा, लेकिन कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई। विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है, कहते हुए कि "कर्मचारी सरकार की रीढ़ हैं, उनकी उपेक्षा से प्रशासनिक दक्षता प्रभावित होगी।"

कुल मिलाकर, यह मुद्दा मध्य प्रदेश की आर्थिक नीतियों का आईना बन गया है। जहां एक तरफ महिलाओं और किसानों के लिए भारी खर्च हो रहा है, वहीं कर्मचारियों-पेंशनर्स की छोटी-सी मांग अनसुलझी पड़ी है। यदि सरकार ने तत्काल कदम नहीं उठाया, तो नई लामबंदी न केवल राजनीतिक तनाव बढ़ाएगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी असर डालेगी। कर्मचारी संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे को प्राथमिकता देंगे, ताकि 10 लाख परिवारों के घरों में खुशहाली लौट आए। मामला अभी भी गर्म है, और अगले हफ्तों में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।

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