प्राचीन काल में गुलाम बेचे जाते थे, अब मोदी जी के नए भारत में प्रतिनिधियों की हो रही खरीद-फरोख्त: जीतू पटवारी

आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा के सचिव तावड़े को भारी मात्रा में नगद रुपये बांटते हुए पकड़ा गया, और इससे यह साबित होता है कि भाजपा और मोदी जी के नेतृत्व में लोकतंत्र की मर्यादाएं पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। पटवारी ने इस मामले में तावड़े द्वारा पैसे बांटने के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर सीधा हमला बोला।

MP Congress President Jitu Patwari raised many serious questions targeted BJP Modi government

तावड़े के भ्रष्टाचार का खुलासा

पटवारी ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा के सचिव तावड़े को जनता ने चुनाव के दौरान नगद रुपये बांटते हुए पकड़ा, और पुलिस के पहुंचने से पहले उन्होंने 15 करोड़ रुपये बांट दिए थे। पटवारी ने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से भ्रष्टाचार की चपेट में आ चुकी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता के इस दुरुपयोग को बढ़ावा दिया है, जहां स्वायत्त संस्थाएं जैसे चुनाव आयोग, ईडी और इनकम टैक्स विभाग पूरी तरह से कमजोर हो गए हैं और इसका उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाना रह गया है।

लोकतंत्र और संविधान पर हमले का आरोप

पटवारी ने भाजपा पर लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बजाई और कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में भारत का संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएं नष्ट हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 600 से अधिक सांसदों और विधायकों को खरीदने और दल बदलने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। पटवारी ने यह भी कहा कि मोदी जी ने प्राचीन काल में गुलामों को बेचे जाने की बात की थी, अब वही स्थिति जनप्रतिनिधियों के साथ हो रही है, जिन्हें राजनीतिक स्वार्थ के लिए बिकने पर मजबूर किया जा रहा है।

किसानों की स्थिति पर चिंता

पटवारी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी जोरदार हमला किया, जिन्होंने अपने कार्यकाल में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कृषि मंत्री के रूप में 20 सालों तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह ने किसानों को कोई लाभ नहीं दिया। पटवारी ने गुना जिले के एक किसान भागवत किरार के आत्महत्या के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि खाद की किल्लत और सरकार की लापरवाही के कारण किसानों की हालत बद से बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान खाद के लिए परेशान होकर आत्महत्या करने जैसा कदम उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है।

सरकार का सिस्टम फेल है

पटवारी ने राज्य सरकार के सिस्टम को पूरी तरह से नाकाम बताते हुए कहा कि यह सिस्टम माफिया के नियंत्रण में है और किसानों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने किसानों की आत्महत्या को 'सरकारी हत्याएं' करार देते हुए कहा कि सरकार उनके दुखों को न तो समझ रही है और न ही उनकी मदद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों के आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और राज्य सरकार इस पर चुप्प है।

खाद की किल्लत और कालाबाजारी पर भी हमला

पटवारी ने खाद की किल्लत और इसके वितरण में हो रही कालाबाजारी पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राज्य में डीएपी और यूरिया की भारी किल्लत है, और इनकी कालाबाजारी हो रही है। भोपाल, टीकमगढ़, सागर जैसे जिलों में किसानों को खाद के लिए हंगामा करना पड़ रहा है, और सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी सिस्टम की नाकामी के कारण किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

कांग्रेस पार्टी की निंदा

पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा और मोदी सरकार की निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इस तरह के भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन की घोर निंदा करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र की आत्मा को ही खत्म कर दिया है, और अब जनता इसका खामियाजा भुगत रही है।

कांग्रेस पार्टी की भूमिका

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा के खिलाफ आंदोलन करने का संकल्प लिया है और किसानों, आम जनता की आवाज उठाने का वादा किया है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों और आम नागरिकों के हक के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी और भाजपा की नीतियों का विरोध करती रहेगी।

इस बयान में पटवारी ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा सरकार के नीतिगत विफलताओं को उजागर करते हुए कांग्रेस की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया, जिससे भाजपा को आगामी चुनावों में जवाबदेह ठहराया जा सके।

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