मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस पर धूमधाम से मनाया जाएगा 'अभ्युदय मध्यप्रदेश' उत्सव: ड्रोन शो से जुबिन नौटिया
'भारत का हृदय' मध्यप्रदेश आज अपने 70वें स्थापना दिवस पर ऐतिहासिक उत्साह के साथ सराबोर हो रहा है। 1 नवंबर 1956 को चार राज्यों-मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल और मध्य प्रांत-बरार-के विलय से बने इस राज्य का यह जश्न 'अभ्युदय मध्यप्रदेश' थीम के तहत 1 से 3 नवंबर तक राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अगुवाई में यह तीन दिवसीय राज्योत्सव न केवल सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करेगा, बल्कि आधुनिक विकास, उद्योग, रोजगार और पर्यटन की नई ऊंचाइयों को भी प्रदर्शित करेगा। केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में शुरू हो रहे इस आयोजन में 2000 ड्रोन शो, लोकप्रिय गीतकारों के कॉन्सर्ट और 'सम्राट विक्रमादित्य' महानाट्य जैसे आकर्षण लाखों पर्यटकों को खींच लाएंगे। साथ ही, स्थापना दिवस पर ही 'पीएम श्री हवाई पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा' का शुभारंभ प्रदेश को हवाई संपर्क का नया आयाम देगा।

70वें स्थापना दिवस का ऐतिहासिक महत्व: नेहरू का 'ऊंट जैसा राज्य' से विकसित 'समृद्ध मध्यप्रदेश' तक
मध्यप्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों पर हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसके नक्शे को देखकर कथित तौर पर कहा था, "ये क्या ऊंट जैसा राज्य बना दिया?" लेकिन आज यह राज्य क्षेत्रफल में दूसरा सबसे बड़ा (3,08,252 वर्ग किमी) और जनसंख्या में पांचवां सबसे बड़ा (लगभग 8.6 करोड़) है।
पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल और राज्यपाल डॉ बी पट्टाभि सीतारमैया के नेतृत्व में शुरू हुई यह यात्रा 2000 में छत्तीसगढ़ के अलगाव के बाद और मजबूत हुई। भोपाल को राजधानी बनाने का फैसला भी दिलचस्प था-इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के दावों के बीच भोपाल की केंद्रीय स्थिति और बुनियादी ढांचे ने इसे चुना। 1956 में जबलपुर में तो दिवाली भी नहीं मनाई गई थी! आज 'अभ्युदय मध्यप्रदेश' थीम पर केंद्रित यह उत्सव राज्य के 'विकसित मध्यप्रदेश 2047' दृष्टिपत्र को भी विमोचित करेगा, जो निवेश, नवाचार और रोजगार पर फोकस करता है।
आध्यात्मिक यात्रा, ड्रोन का जादू और जुबिन नौटियाल का संगीतमय समापन
शाम 6:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। मुख्य अतिथि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और विधि-न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल होंगे। उद्घाटन सत्र में 500 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत 'विश्ववन्द - श्रीकृष्ण की सांगीतिक यात्रा' मंच को आध्यात्मिक ऊंचाई देगी, जो राज्य की सांस्कृतिक जड़ों को जोड़ेगी। इसके बाद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का सबसे बड़ा आकर्षण-2000 ड्रोनों का 'विरासत से विकास' शो।
आसमान में मध्यप्रदेश की प्राचीन विरासत (जैसे विक्रमादित्य युग) से आधुनिक उपलब्धियां (उद्योग हब, डिजिटल सेवाएं) तक की झलक दिखेगी। रात को लोकप्रिय गायक जुबिन नौटियाल 'रातां लम्बियां', 'हमनवां मेरे' और 'तारों के शहर' जैसे हिट गीतों से समां बांधेंगे।
दिनभर लाल परेड ग्राउंड पर प्रदर्शनियां, हैंडीक्राफ्ट शो और शिल्प मेला भी चलेगा। मुख्यमंत्री तीन नई डिजिटल सेवाओं का लोकार्पण करेंगे, जो निवेश को सुरक्षित और उन्नति को सुनिश्चित बनाने पर केंद्रित हैं।
दूसरा दिन (2 नवंबर): लोक संस्कृति और युवा ऊर्जा का संगम
दूसरे दिन प्रदेशभर से आए लोक कलाकारों और युवा प्रतिभाओं की प्रस्तुतियां होंगी। 'अभ्युदय मध्यप्रदेश' थीम पर लोकनृत्य, जनजातीय वेशभूषा प्रदर्शन और पारंपरिक संगीत मंच को रंगीन बनाएंगे। उज्जैन की विशाला सांस्कृतिक समिति द्वारा 'सम्राट विक्रमादित्य' महानाट्य का मंचन होगा, जिसमें 150 कलाकार, जीवंत रथ, अश्व और एलईडी इफेक्ट्स विक्रमादित्य की वीरता-न्याय की कथा जीवंत करेंगे। दिनभर शिल्प मेला, व्यंजन स्टॉल और सांस्कृतिक प्रदर्शनियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। एक्स पर एक यूजर ने लिखा, "लोक और आधुनिक का मेल-यह है असली अभ्युदय!"
तीसरा दिन (3 नवंबर): महानाट्य का क्लाइमेक्स और स्नेहा शंकर का सुरमय समापन
अंतिम दिन दोपहर से प्रदर्शनियां और व्यंजन मेला खुले रहेंगे। शाम को फिर 'सम्राट विक्रमादित्य' महानाट्य का दूसरा चरण होगा। रात का समापन मुंबई की गायिका स्नेहा शंकर की प्रस्तुतियों से-'चांद के टुकड़े', 'मेरा महबूब' और 'हकूना मटाटा' जैसे गीत संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेंगे। यह दिन राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को समर्पित होगा।
'पीएम श्री हवाई पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा' का शुभारंभ
स्थापना दिवस पर सबसे बड़ी सौगात-पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा का उद्घाटन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू, अर्जुन राम मेघवाल और राज्य पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के साथ हेलीकॉप्टर भोपाल से उज्जैन उड़ेगा। नियमित सेवा 20 नवंबर से शुरू होगी, जो PPP मॉडल पर चलेगी। सेक्टर-1 में ट्रांस भारत एविएशन (भोपाल-उज्जैन-इंदौर-मांडू-ओंकारेश्वर) और सेक्टर-2,3 में जेट सर्व एविएशन (कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ जैसे वन्यजीव स्थल) संचालन करेंगे।
प्रत्येक हेलीकॉप्टर में कम से कम 6 यात्री सीटें होंगी, सप्ताह में 5 दिन उड़ानें। मंत्री लोधी ने कहा, "यह सेवा धार्मिक, वन्यजीव और प्राकृतिक पर्यटन को सुगम बनाएगी, एडवेंचर-हैरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देगी।" एक्स पर पोस्ट्स में इसे "एमपी टूरिज्म की नई धड़कन" कहा जा रहा है।
क्या बदलेगा यह उत्सव? विकास से संस्कृति तक का संदेश
यह राज्योत्सव न केवल जश्न है, बल्कि 'समृद्ध मध्यप्रदेश @2047' का रोडमैप भी। पर्यटन सेवा से सालाना करोड़ों पर्यटक बढ़ेंगे, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ेंगे। विशेषज्ञ कहते हैं, "यह आयोजन एमपी को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।"












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