MBBS छात्रा रोशनी की मौत, हॉस्टल के बाथरूम में मिली लाश, आत्महत्या या सुनियोजित हत्या? जानिए पूरा मामला
MBBS student: गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल से जुड़ी एमबीबीएस छात्रा रोशनी की मौत अब सिर्फ एक संदिग्ध घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला हर गुजरते दिन के साथ गहराता जा रहा है। अलीराजपुर की रहने वाली रोशनी का शव कोहेफिजा इलाके के एक निजी हॉस्टल के बाथरूम में मिलने के बाद से कई सवाल खड़े हो गए हैं-ऐसे सवाल, जिनके जवाब अभी अधूरे हैं।
घटना के बाद शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई गई, लेकिन जैसे-जैसे परिजन सामने आए और ग्राउंड रिपोर्टिंग हुई, कहानी की परतें खुलने लगीं। बाथरूम से एसिड की बोतल मिलने की बात जरूर सामने आई, लेकिन क्या यही पूरी सच्चाई है? या फिर यह किसी और साजिश की आड़?

पिता का आरोप: "मेरी बेटी ने आत्महत्या नहीं की"
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में रोशनी के पिता ने बेहद भावुक लेकिन दृढ़ शब्दों में कहा कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती। उनका दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एसिड पीने की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा, रोशनी के शरीर पर चोट के निशान और गले पर संदिग्ध निशान पाए गए हैं, जो आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खाते।
पिता का कहना है कि अगर बेटी ने एसिड पिया होता, तो उसके प्रभाव शरीर पर स्पष्ट रूप से दिखते। लेकिन रिपोर्ट में ऐसा कोई निर्णायक प्रमाण नहीं है। उनका सवाल सीधा है-"अगर एसिड नहीं पिया गया, तो बोतल वहां कैसे पहुंची? और शरीर पर चोट के निशान कैसे आए?"
हॉस्टल, सन्नाटा और अनुत्तरित सवाल
जिस निजी हॉस्टल में रोशनी रह रही थी, वह घटना के बाद से ही सवालों के घेरे में है। बाथरूम में शव मिलना, आसपास मौजूद लोगों की गतिविधियां और घटना से पहले के घंटों का रहस्य-सब कुछ अब जांच का विषय बन चुका है।
परिजन यह भी पूछ रहे हैं कि घटना के वक्त हॉस्टल प्रबंधन ने तुरंत सूचना क्यों नहीं दी और क्या वहां लगे सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह सक्रिय थे?
पुलिस का पक्ष: हर एंगल से जांच
मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी अनिल बाजपेई का कहना है कि जांच को किसी एक निष्कर्ष तक सीमित नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, आत्महत्या और हत्या-दोनों एंगल से जांच की जा रही है।
पुलिस का दावा है कि फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम के सभी बिंदु, और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जांच की तस्वीर साफ होगी और सच्चाई सामने लाई जाएगी।
निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े परिजन
फिलहाल रोशनी का परिवार किसी भी जल्दबाजी वाले निष्कर्ष को मानने को तैयार नहीं है। परिजन लगातार निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, तब तक यह मामला सिर्फ एक "मौत" नहीं, बल्कि "न्याय की लड़ाई" है।
सिस्टम पर सवाल
एक होनहार मेडिकल छात्रा की इस तरह मौत होना न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए झकझोर देने वाला है। मेडिकल कॉलेज से जुड़ा मामला होने के कारण अब छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की नजर भी इस केस पर टिक गई है। क्या रोशनी की मौत आत्महत्या थी, या फिर किसी दबे हुए सच को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश?
यह सवाल अब सिर्फ परिवार का नहीं रहा-यह सवाल सिस्टम से है, जांच से है और न्याय से है। सच क्या है, यह जांच बताएगी। लेकिन तब तक रोशनी की मौत एक खामोश सवाल बनकर भोपाल की फिज़ा में तैर रही है।












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