रीवा BJP का मास्टर स्ट्रोक: 6 निर्दलीय पार्षदों ने ली सदस्यता; मेयर हारने के बाद सदन में होगा भाजपा का कब्जा

रीवा, 26 जुलाई। 24 वर्षों के बाद रीवा शहर का मेयर पद गंवाने वाली बीजेपी अब परिषद अध्यक्ष बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दी है। बीजेपी नेताओं ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए 6 निर्दलीय पार्षदों को अपनी पार्टी की सदस्यता दिला कर नगर-निगम परिषद अध्यक्ष बनाने के लिए तैयारी कर ली है। दरअसल 6 निर्दलीय पार्षदों के शामिल हो जाने से परिषद अध्यक्ष बनाने के लिए बीजेपी के पास बहुमत हो गया है।

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कांग्रेस को झटका

मेयर अजय मिश्रा बाबा की जीत के बाद निर्दलीय के भरोसे कांग्रेस पार्टी अपनी परिषद भी बनाने की तैयारी कर रही थी। इसी बीच निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने से परिषद अध्यक्ष बनाए जाने का पासा उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। बहरहाल देखना यह है कि अब कांग्रेस का अगला कदम क्या होता है।

परिषद के लिए चाहिए 23 पार्षद

45 वार्डों वाले रीवा नगर निगम में परिषद अध्यक्ष एवं परिषद का गठन करने के लिए 23 पार्षदों की आवश्यकता है। जिसमें से बीजेपी के 18 पार्षद सदस्य जीत कर चुने गए है। तो वहीं कांग्रेस के 16 पार्षद सदस्य है, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद चुनकर सदन में पहुंचे थे। जिसमें बीजेपी ने 6 निर्दलीय पार्षदों को अपनी पार्टी में शमिल कर लिया हैं। जिसके बाद बीजेपी के पास अब 24 पार्षद हो गए है। ऐसे में परिषद बनाने के लिए बीजेपी मजबूत नजर आ रही है।

इन पार्षदों ने ली सदस्यता

सोमवार को सभी 6 पार्षदों ने बीजेपी कार्यालय अटल कुंज में पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ला के हाथों सदस्य ली है। जिन पार्षदों ने बीजेपी का झंडा पकड़ा है, उसमे वार्ड नंबर 1 से पार्षद शिवराज रावत, वार्ड नंबर 5 से पार्षद संजय सिंह, वार्ड नंबर 22 से पार्षद पूजा प्रमोद सिंह, वार्ड नंबर 40 से पार्षद नीलू कटारिया, वार्ड नंबर 43 से पार्षद शांति उर्फ आशा सहित 1 अन्य का नाम शामिल हैं।

चर्चा है कि ज्यादातर लोग बीजेपी से बागी होकर नगर निगम वार्ड पार्षदी का चुनाव लड़े थे। जिन्हे मानमनैवल के बाद घर वापसी कराई गई है।

बीजेपी प्रदेश नेतृत्व में किरकिरी

ज्ञात हो कि 20 जुलाई को रीवा नगर-निगम का जो परिणाम सामने आया, उसमें बीजेपी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है। प्रत्यक्ष प्रणाली से मेयर पद का चुनाव होने के बाद यह पहला अवसर है जब बीजेपी को रीवा नगर-निगम के मेयर की सीट गंवानी पड़ी है। जिसके बाद रीवा के बीजेपी नेतृत्व की प्रदेशभर में किरकिरी हुई।

कांग्रेस उम्मीदवार अजय मिश्रा बाबा ने 10 हजार से ज्यादा वोटो से मेयर में जीत दर्ज की है। बीजेपी इसे खतरे की घंटी मानते हुए जहाँ एक्टिव हो गई है वहीं अब प्रदेश नेतृत्व चाहता था कि महापौरी तो खो दिए हैं। लेकिन अगर सदन में बीजेपी का बहुमत रहेगा, तो विकास मूलक कार्य उसी तरह होते रहेंगे। ऐसे में बीजेपी का ये प्लान सफल होता नजर आ रहा है।

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