MP News: भोपाल में बैंक मित्रों की 'महाक्रांति'– संघ महामंत्री और जिला अध्यक्ष नवरंग पटेल ने किया बड़ा खुलासा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अंबेडकर पार्क में आज 'महाक्रांति रैली' के तहत हजारों बैंक मित्रों और आउटसोर्स कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश बैंक मित्र संघ के नेतृत्व में यह आंदोलन बिचौलियों (कंपनियों) की प्रथा को समाप्त करने, कर्मचारी दर्जा देने और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग पर केंद्रित रहा।

कटनी जिले के महामंत्री नारायण प्रसाद तिवारी ने वन इंडिया हिंदी संवाददाता एलएन मालवीय को बताया, "कंपनी प्रथा - जो बिजोलिया प्रथा जैसी है - को तुरंत समाप्त किया जाए। इससे ही आर्थिक सुधार होगा, पेंशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।"

Mahakranti of Bank Mitras in MP Narayan Tiwari and District President Navrang Patel demanded

वहीं, उमरिया जिला अध्यक्ष नवरंग पटेल ने कहा, "कई सालों से काम कर रहे, लेकिन कर्मचारी पहचान नहीं मिली। जीवन आधा खत्म हो गया, बीमा नहीं, पेमेंट समय पर नहीं। हमारा 70% पैसा कंपनी को चला जाता है। बैंक सीधे सैलरी क्यों नहीं देती?" यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश के 50,000 से अधिक बैंक मित्रों की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा का प्रतीक है, जो ग्रामीण बैंकिंग को मजबूत करने वाले इन 'असली हीरोज' को ठेकेदारों का गुलाम बनाने वाली सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े कर रहा है।

अगर मांगें न मानी गईं, तो राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई।

यह आंदोलन आउटसोर्स कर्मचारियों की 'हल्ला बोल' रैली का हिस्सा है, जिसमें बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर और अंशकालीन भृत्य जैसे 2.75 लाख कर्मचारी शामिल हैं। विपक्ष ने इसे "मोहन यादव सरकार की श्रम-विरोधी नीति" बताते हुए समर्थन का ऐलान किया, जबकि सरकार ने वार्ता का आश्वासन दिया। लेकिन नेताओं का आक्रोश ठंडा पड़ने का नाम नहीं ले रहा - क्या बैंक मित्रों को अब भी सिर्फ ठेकेदारों का गुलाम समझा जाएगा?

सुबह से शाम तक का हंगामा

प्रदर्शन सुबह 9 बजे अंबेडकर पार्क में सभा के साथ शुरू हुआ। कटनी, उमरिया, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और सागर जैसे जिलों से सैकड़ों बसों में भरकर बैंक मित्र पहुंचे। मध्य प्रदेश बैंक मित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामस्वरूप पटेल ने मंच से कहा, "हम ग्रामीण इलाकों में जन-धन खाते खोलते हैं, पेंशन बांटते हैं, लेकिन वेतन 8-10 हजार रुपये मासिक - जो दिहाड़ी मजदूर से कम है।" नारे गूंजे - "बिचौलियों का अंत करो!", "कर्मचारी दर्जा दो!"।

दोपहर में मार्च निकाला गया, जिसमें महिलाएं और युवा प्रमुख थे। नारायण प्रसाद तिवारी ने कहा, "बिजोलिया प्रथा जैसी कंपनी सिस्टम से हमारा शोषण हो रहा। सरकार इसे समाप्त करे, तभी पेंशन-बीमा जैसे लाभ मिलेंगे।" उमरिया के नवरंग पटेल ने जोड़ा, "हमने जीवन आधा लगा दिया, लेकिन बीमा नहीं, पेमेंट डिले। 70% हमारा पैसा कंपनी को - बैंक सीधे क्यों नहीं देती?" प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भारी पुलिस बल तैनात था। शाम को पटेल ने चेतावनी दी, "15 दिनों में मांगें न मानीं, तो राज्यव्यापी हड़ताल। बैंकिंग सेवाएं ठप हो जाएंगी।"

बैंक मित्रों की प्रमुख मांगें: शोषण के खिलाफ पुकार

बैंक मित्र ग्रामीण बैंकिंग का चेहरा हैं - वे 20,000 से अधिक गांवों में सेवाएं पहुंचाते हैं। लेकिन ठेकेदार कंपनियों (जैसे CSC-SPV) के जाल में फंसे हैं। नीचे उनकी मुख्य मांगें:

ये मांगें बैंक मित्र संघ की हैं। तिवारी ने कहा, "इनसे ही आर्थिक सुधार होगा।" बैंक मित्र योजना 2014 में शुरू हुई, लेकिन मध्य प्रदेश में ठेकेदारी ने शोषण बढ़ाया। 50,000 से अधिक बैंक मित्र प्रभावित हैं।

हाल की घटनाएं:

  • अगस्त 2025: इंदौर में वेतन वृद्धि पर धरना।
  • जून 2025: हाईकोर्ट ने 15,000 न्यूनतम वेतन का आदेश, लेकिन अमल में देरी।
  • अप्रैल 2025: जबलपुर में एरियर के लिए मार्च; 100 करोड़ अटका।
  • फरवरी 2025: ग्वालियर में महिलाओं का प्रदर्शन।
  • अक्टूबर 2025: भोपाल में महाक्रांति रैली।

संगठन का दावा: "सरकार CSC को करोड़ों देती, लेकिन हम चूना लगते।"

कांग्रेस ने समर्थन किया। जीतू पटवारी ने कहा, "बैंक मित्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी। ठेकेदारी भ्रष्टाचार बढ़ाती। हम आंदोलन में शामिल।" कमलनाथ ने ट्वीट किया, "शोषण बंद।" BJP ने "व्यक्तिगत मांग" बताया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा, "बैठक बुलाएंगे।" लेकिन पटेल ने तंज: "मीटिंग तो हर महीने, एक्शन कहां

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