मध्य प्रदेश में कचरे से निकली प्लास्टिक से बन गई सड़कें

Bhopal
भोपाल। प्लास्टिक का कचरा...जिसे आप कूड़ेदान में फेंक देते हैं, अब उसी से सड़क बनाने का काम किया जा रहा है। जी हां... मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास प्राधिकरण ने प्लास्टिक सड़कों के एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रतिवर्ष तीन हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाना निर्धारित किया है। बताते चलें कि मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास प्राधिकरण अभी तक 17 टन प्लास्टिक कचरा पैंतीस किलोमीटर लम्बी सड़कों के निर्माण में लगा चुका है और अनुमान के मुताबिक हर एक किलोमीटर सड़क के निर्माण में पांच टन प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल होता है।

प्राधिकरण के अधिकारियों की माने तो प्लास्टिक सड़कों का निर्माण गुणवत्ता को ध्यान में रख कर ही किया गया है। गौरतलब है कि इसके तहत खरगोन व उज्जैन आदि जिलों में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया जा चुका है। जिसमें पाया गया कि इस तरह से बनाई गईं सड़कें अधिक मजबूत होती हैं।

जिसके बाद इसे पायलट प्रोजेक्ट का रूप देकर मध्य प्रदेश के चार महत्वपूर्ण जिले भोपाल, इंदौर, जबलपुर और रायसिन में सड़के बनाए जाने के लिए प्लास्टिक के कचरे को उपयोग में लाया जा रहा है। भविष्य में करीब पंद्रह फीसदी सड़के प्लास्टिक कचरे से बनाई जाएंगी।

क्या है फायदा?

प्लास्टिक कचरे से सड़कों का निर्माण करने पर विभिन्न कम्पनियों या फैक्ट्रियों से चारकोल खरीदने की लागत का बोझ नहीं पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक प्लास्टिक से बनी सड़कें अधिक लम्बे समय तक बने रहने में सक्षम होती हैं। और यही नहीं, इस तरह प्लास्टिक से सड़के बनाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

क्योंकि प्लास्टिक की बोतलें व पैकेट्स इत्यादि अक्सर सड़कों पर फैक दिए जाते हैं। जिससे अधिक तापमान होने पर कई हानिकारक तत्व वातावरण में घुल जाते हैं, जिसके बाद भविष्य में सेहत पर गंभीर परिणाम भुगतने की संभावनाएं बनीं रहती हैं।

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