LPG Gas Booking: भारत में ईरान-अमेरिका जंग का असर, भोपाल में LPG सिलेंडर के लिए लगी लंबी लाइनें

LPG Gas Booking Crisis: अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारतीय घरों की रसोई तक पहुंच गया है। भोपाल की गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां लोग एलपीजी सिलेंडर भरवाने और दोपहिया वाहनों में रिफिल करवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं।

यह तस्वीर सिर्फ भोपाल की नहीं, बल्कि पूरे देश की ऊर्जा संकट की शुरुआत दिखा रही है।

LPG Gas Booking Iran-US war impacts India long queues for LPG cylinders in Bhopal

सड़क पर क्या नजर आ रहा है?

भोपाल के प्रमुख इलाकों जैसे शिवाजी नगर, कोहेफिजा, न्यू मार्केट और अन्य गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से शाम तक भीड़ जमा है। लोग सिलेंडर कंधे पर लादकर या दोपहिया वाहनों पर चढ़ाकर लाइन में खड़े हैं। कई लोग बताते हैं कि घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के बावजूद डिलीवरी में 7-10 दिन की देरी हो रही है। एक स्थानीय निवासी रमेश यादव ने बताया, "पहले तो 2-3 दिन में सिलेंडर आ जाता था, अब एजेंसी वाले कहते हैं स्टॉक नहीं है। घर में गैस खत्म हो गई है, बच्चे स्कूल से आए हैं तो खाना कैसे बनाएं?"

कुछ एजेंसियों पर तो झगड़े तक की स्थिति बन गई है। एक गैस एजेंसी मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर की सप्लाई सोमवार से पूरी तरह बंद कर दी गई है। सिर्फ अस्पतालों और स्कूलों को छूट है। घरेलू सिलेंडर भी सीमित मात्रा में मिल रहे हैं। लोग पैनिक में आ रहे हैं, ब्लैक मार्केट में 2000-2500 रुपये में सिलेंडर बिक रहा है।"

जंग का सीधा असर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद

यह संकट अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच चल रही जंग से जुड़ा है, जो अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह संकरी जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई का रास्ता है। भारत की एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

  • भारत की सालाना एलपीजी खपत: लगभग 31-33 मिलियन टन।
  • आयात पर निर्भरता: 60-66% (2025-26 में करीब 62-65%)।
  • मध्य पूर्व से आयात: 85-92% (सऊदी अरब, यूएई, कतर आदि से)।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाला हिस्सा: 80-90% एलपीजी आयात।

जंग के कारण लाखों बैरल तेल-गैस टैंकर होर्मुज के पास फंसे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 37 भारतीय तेल और एलपीजी टैंकर भी वहीं अटके हैं। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिसका असर भारत में सबसे पहले एलपीजी पर पड़ा क्योंकि यह घरेलू ईंधन है।

कीमतों में उछाल और सरकारी कदम

  • घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत: भोपाल में मार्च 2026 में ₹918.50 (पहले ₹858.50 थी, ₹60 की बढ़ोतरी)।
  • कमर्शियल सिलेंडर: ₹1889 (19 किलो) तक पहुंच गई।
  • पेट्रोल-डीजल पर अभी सीधा असर नहीं, लेकिन एलपीजी सबसे तेज प्रभावित हुआ।

सरकार ने रिफाइनरियों को अधिकतम उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दी है, जिससे कमर्शियल यूज (होटल, रेस्टोरेंट) प्रभावित हुआ। कई शहरों में होटल वाले लकड़ी या गोबर के उपले इस्तेमाल करने लगे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने कैबिनेट स्तर की कमिटी बनाई है ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके।

आम आदमी पर क्या असर?

घरों में खाना पकाने की समस्या। छोटे ढाबे, रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर। सड़क किनारे चाय-पकौड़े वाले, समोसे-कचौड़ी वाले परेशान। भोपाल के एक सड़क किनारे वाले विक्रेता दीपक गुप्ता ने कहा, "एलपीजी नहीं मिल रही तो समोसे-कचौड़ी कैसे तलें? पोहा गर्म नहीं कर पा रहा। दुकान बंद करनी पड़ेगी।"

आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज बंदी लंबी चली तो वैकल्पिक रास्ते (रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका से आयात) अपनाए जाएंगे, लेकिन शिपिंग समय और लागत बढ़ेगी। वैश्विक तेल कीमतें $100-120 प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा। भोपाल की ये कतारें सिर्फ गैस की कमी नहीं दिखा रही, बल्कि वैश्विक जंग का स्थानीय असर भी बता रही हैं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, आम आदमी की रसोई पर संकट मंडराता रहेगा।

वन इंडिया हिंदी - ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट।

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