उज्जैन में लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई: सहायक सचिव भगवान सिंह सोंधिया 11,000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
19 अगस्त 2025 को ग्राम कंवराखेड़ी, तहसील सुसनेर, जिला आगर मालवा निवासी राजेश दांगी ने उज्जैन लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक श्री आनंद कुमार यादव से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि उनके भाई बालचंद दांगी के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था, जिसकी पहली किस्त 25,000 रुपये प्राप्त हो चुकी थी।
लेकिन दूसरी किस्त जारी करने के लिए ग्राम पंचायत कंवराखेड़ी के सहायक सचिव भगवान सिंह सोंधिया ने 15,000

शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने सोंधिया के खिलाफ जाल बिछाया। 23 अगस्त 2025 को उज्जैन के शनि मंदिर परिसर में ट्रैप कार्रवाई आयोजित की गई, जिसमें भगवान सिंह सोंधिया को राजेश दांगी से 11,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। रिश्वत की राशि उनकी पेंट की जेब से बरामद की गई। यह कार्रवाई निदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई।
लोकायुक्त की ट्रैप टीम
- इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली लोकायुक्त पुलिस उज्जैन की टीम में निम्नलिखित सदस्य शामिल थे:
- डीएसपी दिनेशचंद्र पटेल
- निरीक्षक हिना डावर
- कार्यवाहक प्रधान आरक्षक हितेश ललावत
- आरक्षक श्याम शर्मा
- सहायक ग्रेड-3 रमेश डावर
- आरक्षक संदीप राव कदम
- आरक्षक उमेश जाटव
इस टीम ने सटीक योजना और समन्वय के साथ ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसके परिणामस्वरूप भगवान सिंह सोंधिया को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
मामले का विवरण
शिकायतकर्ता राजेश दांगी ने बताया कि उनके भाई बालचंद दांगी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास की दूसरी किस्त जारी करने के लिए सहायक सचिव भगवान सिंह सोंधिया ने 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। सोंधिया ने पहले ही 4,000 रुपये शिकायत सत्यापन के दौरान ले लिए थे और बाकी 11,000 रुपये की मांग कर रहे थे। लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत की गोपनीय जांच की, जिसमें सोंधिया के रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद, 23 अगस्त को उज्जैन के शनि मंदिर परिसर में ट्रैप कार्रवाई की गई, जहां सोंधिया को 11,000 रुपये लेते पकड़ा गया।
लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत सोंधिया के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है, और आगे की जांच जारी है।
स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया। एक ग्रामवासी ने कहा, "प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं में रिश्वतखोरी गरीबों के हक को छीनती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में डर पैदा होगा।"
विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की तारीफ की, लेकिन साथ ही मांग की कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएं। एक कांग्रेस नेता ने कहा, "यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन सरकार को चाहिए कि ऐसी कार्रवाइयां नियमित रूप से हों और ग्रामीण स्तर पर भ्रष्टाचार पर और नजर रखी जाए।"
लोकायुक्त की सख्त नीति
निदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उनकी देखरेख में उज्जैन, भोपाल, और अन्य क्षेत्रों में कई ट्रैप कार्रवाइयां की गई हैं। इस कार्रवाई से पहले, 11 अगस्त 2025 को उज्जैन में ही चिमनगंज थाने के एक आरक्षक को 25,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार यादव ने कहा, "हमारी टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या कर्मचारी, अगर भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
प्रधानमंत्री आवास योजना और भ्रष्टाचार
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) गरीबों और जरूरतमंदों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। लेकिन कई बार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आती हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल योजना के उद्देश्य को कमजोर करती हैं, बल्कि गरीबों के हक को भी छीनती हैं। भगवान सिंह सोंधिया की गिरफ्तारी इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।












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