MP सागर के जरूआ वेयर हाउस में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, सहायक प्रबंधक 1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तहत सागर जिले के जरूआ वेयर हाउस केसली में गुरुवार रात, 28 अगस्त 2025 को लोकायुक्त की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। लोकायुक्त ने सेवा सहकारी समिति जरूआ के सहायक प्रबंधक संतोष चौबे और एक प्राइवेट व्यक्ति अजय सिंह घोषी को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

यह रिश्वत मूंग की ग्रेडिंग रिपोर्ट सही करने और वेयर हाउस में माल रखवाने के लिए मांगी गई थी। इस मामले में शिविका वेयर हाउस के संचालक दिव्यांश तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी और निजी व्यक्तियों के बीच सांठगांठ से होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर किया है।

Lokayukta action in Sagar Jarua Warehouse Assistant Manager caught red handed taking bribe of 1 lakh

शिकायतकर्ता और मामला

शिकायतकर्ता दिनेश सिंह, जो ग्राम पंचायत पड़रई बुजुर्ग के सरपंच हैं, ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय, सागर में शिकायत दर्ज की थी। दिनेश सिंह ने बताया कि उनके गांव के किसानों की करीब 371 क्विंटल मूंग की तुलाई हो चुकी थी। इसे शिविका वेयर हाउस में भेजा गया, लेकिन वेयर हाउस के संचालक दिव्यांश तिवारी ने मूंग की ग्रेडिंग खराब होने का हवाला देकर उसे रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद किसानों ने सेवा सहकारी समिति जरूआ के सहायक प्रबंधक संतोष चौबे से संपर्क किया।

2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग

जांच में सामने आया कि संतोष चौबे ने अपने सहायक राजेश पांडे और शिविका वेयर हाउस के संचालक दिव्यांश तिवारी के साथ मिलकर मूंग की ग्रेडिंग रिपोर्ट को सही करने और वेयर हाउस में माल रखवाने के लिए 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह राशि किसानों के लिए भारी पड़ रही थी, जिसके बाद सरपंच दिनेश सिंह ने इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज की।

लोकायुक्त निरीक्षक रोशनी जैन ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें आरोपियों ने 1 लाख रुपये की रिश्वत लेकर काम करने की सहमति जताई। इस सत्यापन के आधार पर लोकायुक्त ने ट्रेप कार्रवाई की योजना बनाई।

रंगे हाथ गिरफ्तारी

28 अगस्त 2025 की रात को लोकायुक्त एसपी योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष ट्रेप दल गठित किया गया। इस दल में निरीक्षक रोशनी जैन, निरीक्षक कमल सिंह उईके, निरीक्षक रंजीत सिंह, और अन्य अधिकारी शामिल थे। शिकायतकर्ता दिनेश सिंह को रिश्वत की राशि 1 लाख रुपये के साथ वेयर हाउस भेजा गया। जैसे ही सहायक प्रबंधक संतोष चौबे ने यह राशि ली और अपने साथी अजय सिंह घोषी को सौंपी, लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। रिश्वत की राशि को जब्त कर लिया गया, और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।

इस मामले में शिविका वेयर हाउस के संचालक दिव्यांश तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है, और उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।

लोकायुक्त की कार्रवाई और टीम

लोकायुक्त की इस कार्रवाई में शामिल टीम ने पूरी तत्परता और गोपनीयता के साथ ट्रेप को अंजाम दिया। कार्रवाई में शामिल अधिकारियों में निरीक्षक रोशनी जैन, कमल सिंह उईके, रंजीत सिंह, और अन्य कर्मचारी शामिल थे। लोकायुक्त एसपी योगेश्वर शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है, और आगे की कार्रवाई जारी है।

भ्रष्टाचार का खुलासा और किसानों की परेशानी

यह मामला सागर जिले के किसानों की परेशानियों को उजागर करता है, जो अपनी उपज को वेयर हाउस में रखने के लिए रिश्वतखोरी का शिकार बन रहे हैं। सरपंच दिनेश सिंह ने बताया कि किसानों ने कड़ी मेहनत से मूंग की फसल तैयार की थी, लेकिन ग्रेडिंग और वेयर हाउस में माल रखने की प्रक्रिया में उन्हें अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़ा। रिश्वत की मांग ने उनकी आर्थिक स्थिति को और दयनीय बना दिया था।

दिनेश सिंह ने लोकायुक्त की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा, "हमारी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हुई, और भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा गया। यह किसानों के लिए बड़ी राहत है।"

सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच सांठगांठ से होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर करती है। विशेष रूप से किसानों जैसे कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर रिश्वत मांगना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र की प्रगति में भी बाधा डालता है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, और कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।

आगे की जांच और संभावनाएं

लोकायुक्त की टीम अब इस मामले में गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या संतोष चौबे, अजय सिंह घोषी, और दिव्यांश तिवारी ने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की है। इसके अलावा, सहायक राजेश पांडे की भूमिका की भी जांच की जा रही है। लोकायुक्त यह भी सुनिश्चित कर रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और वेयर हाउस संचालन में पारदर्शिता बनी रहे।

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