MP News: लाडली बहना योजना का असली आंकड़ा, करोड़ों को फायदा, जानिए कैसे फिर भी लाखों महिलाएं लाभ से वंचित
Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की राजनीति में 2023 के विधानसभा चुनाव को निर्णायक रूप से प्रभावित करने वाली मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर एक बड़ा और अहम खुलासा सामने आया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान ऐसे आंकड़े पेश किए, जिन्होंने न सिर्फ योजना की सफलता को रेखांकित किया, बल्कि इसके दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की वास्तविक स्थिति भी उजागर कर दी। बता दे मोहन सरकार के 2 साल पूरे होने पर मंत्री निर्मला भूरिया ने होटल पलाश में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ये जानकारी दी।

मंत्री भूरिया ने कहा कि प्रदेश में वूमन-लेड डेवलपमेंट की अवधारणा को जमीन पर उतारने में सरकार काफी हद तक सफल रही है और इसका सकारात्मक असर समाज के अंतिम पायदान तक दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज भी बड़ी संख्या में पात्र महिलाएं लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित हैं। इसे जानने के लिए हमने कुछ आंकड़े खंगाले जो बेहद ही चौंकाने वाले थे।
1.26 करोड़ लाभार्थी
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 1 करोड़ 26 लाख से अधिक महिलाएं मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से लाभान्वित हो रही हैं। जून 2023 से दिसंबर 2025 तक योजना की 31 किस्तें नियमित रूप से जारी की जा चुकी हैं और अब तक 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की गई है। लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लाखों पात्र महिलाएं इस योजना का लाभ नहीं ले पा रही है।
विपक्षी नेताओं के अनुसार, प्रदेश में करीब 50 लाख से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं, जो पात्र होने के बावजूद किसी न किसी कारण से अब तक योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन महिलाओं को दोबारा आवेदन करने का मौका कब मिलेगा। आपको एक आंकड़ा बताते है, जिससे आपको समझ में आ जाएगा कि प्रदेश में कितनी महिला ऐसी होंगी, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
मध्य प्रदेश में BPL/NFSA राशन कार्ड की स्थिति: लेटेस्ट आंकड़े
मध्य प्रदेश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और NFSA पोर्टल के अनुसार (2024-2025 अपडेट):
- कुल राशन कार्ड: करीब 1.5 करोड़+ (PHH + AAY)।
- लाभार्थी परिवार: 1.4 करोड़+।
- कुल लाभार्थी व्यक्ति: 5.5 करोड़+ (प्रत्येक परिवार में औसतन 4-5 सदस्य)।
- महिला मुखिया: NFSA नियमों के तहत राशन कार्ड परिवार की सबसे बड़ी महिला के नाम पर जारी होता है। इसलिए लगभग सभी PHH/AAY कार्ड महिलाओं के नाम पर हैं।
- महिलाओं की अनुमानित संख्या: कार्डधारियों में महिलाएं 50%+ हैं, यानी करीब 2.5-3 करोड़ महिलाएं सीधे या अप्रत्यक्ष लाभार्थी। लाड़ली बहना योजना में 1.26 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं, जो मुख्य रूप से BPL या कम आय वाली हैं।
नोट: पुराने BPL कार्ड अब NFSA में कन्वर्ट हो रहे हैं। SECC-2011 डेटा के आधार पर BPL सूची थी, लेकिन अब NFSA प्राथमिकता पर है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ बनी लाड़ली बहना योजना
निर्मला भूरिया ने कहा कि लाड़ली बहना योजना आज सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ बन चुकी है। इस योजना ने घर-परिवार में महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया है और उन्हें निर्णय लेने में अधिक सक्षम बनाया है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के इस मॉडल को देश के कई अन्य राज्यों ने अपनाया है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना से सुरक्षित हो रहा बेटियों का भविष्य
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में 52 लाख से अधिक बालिकाओं का पंजीयन किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में 6.40 लाख बालिकाओं को 350 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में लाखों और बेटियों को इस योजना से जोड़ा जाए।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ से बदली सामाजिक सोच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत मध्य प्रदेश में व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए कई नवाचार किए गए हैं। इसी कड़ी में पिंक ड्राइविंग लाइसेंस अभियान चलाया गया, जिसके तहत अब तक 6,134 महिलाओं और बालिकाओं को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस दिए जा चुके हैं।
समाज में बेटियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से 1,794 सफल महिलाओं और बालिकाओं को 'जेंडर चैंपियन' के रूप में चिन्हित किया गया है, जो अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही हैं।
शिक्षा से जुड़ेंगी शाला त्यागी बालिकाएं
मंत्री ने बताया कि सशक्त वाहिनी कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 7 हजार से अधिक बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराई जा चुकी है। इसके अलावा, आगामी तीन वर्षों में शाला त्यागी बालिकाओं को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। इसके तहत 10वीं और 12वीं की परीक्षा दिलाई जाएगी, वहीं पढ़ाई जारी न रखने वाली बालिकाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
महिलाओं की सुरक्षा: वन स्टॉप सेंटर और हेल्पलाइन 181
प्रदेश में संचालित 57 वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं के लिए सहारा बन चुके हैं। बीते दो वर्षों में यहां 54,627 से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य, परामर्श, कानूनी और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई गई। वहीं महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से 2.36 लाख से अधिक महिलाओं को त्वरित मदद दी गई है।
कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास
कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 284 करोड़ रुपये की लागत से 5121 सीट क्षमता वाले 8 वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाने का निर्णय लिया है। ये हॉस्टल अगले तीन वर्षों में पूरी तरह संचालित होंगे।
बाल विवाह और कुपोषण पर लगाम
समन्वित प्रयासों का असर यह है कि प्रदेश में बाल विवाह की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। NFHS-4 में जहां यह दर 32.4 प्रतिशत थी, वहीं NFHS-5 में घटकर 23.1 प्रतिशत रह गई है। कुपोषण के खिलाफ चलाए गए अभियानों से भी कम वजन, ठिगनापन और गंभीर कुपोषण के मामलों में सुधार दर्ज किया गया है।
डिजिटल नवाचारों से पारदर्शिता
आंगनवाड़ी सेवाओं में पोषण ट्रैकर, सम्पर्क ऐप और फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम जैसे डिजिटल नवाचारों से निगरानी और पारदर्शिता को मजबूती मिली है। मंत्री ने कहा कि इन पहलों के कारण मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
कुल मिलाकर, मंत्री निर्मला भूरिया के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं की जिंदगी बदली है, लेकिन अब भी बड़ी चुनौती उन 1 करोड़ पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाने की है, जो आज भी सरकार की अगली पहल की राह देख रही हैं।












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