MP News: श्योपुर के कूनो में बड़ा वन्यजीव मिशन: CM मोहन यादव ने 53 घड़ियाल और 25 कछुए नदी में छोड़े
kuno national park: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में एक महत्वपूर्ण जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं 53 घड़ियाल (Gharials) और 25 कछुओं (Turtles) को कूनो नदी में रिलीज किया।
यह कार्यक्रम राज्य सरकार की 'प्रोजेक्ट गंगा' और जैव विविधता संरक्षण की व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाना और नदी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

कार्यक्रम का विवरण
मुख्यमंत्री ने कूनो नेशनल पार्क के वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में पहुंचकर सबसे पहले घड़ियालों और कछुओं को देखा। इन जीवों को विशेष कंटेनरों में सुरक्षित रखा गया था। डॉ. मोहन यादव ने स्वयं इन जीवों को कूनो नदी में छोड़ा, जो चंबल नदी बेसिन का हिस्सा है। इस दौरान वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ और स्थानीय प्रशासन मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा, "कूनो नेशनल पार्क न केवल चीतों का घर है, बल्कि यह प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक भी है। घड़ियाल और कछुए जैसी प्रजातियां नदी पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनकी संख्या बढ़ाने से नदी की सफाई, मछलियों का संतुलन और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। सरकार 'प्रोजेक्ट गंगा' के तहत लगातार ऐसे कदम उठा रही है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन प्रजातियों को देख सकें।"
घड़ियाल और कछुओं की रिलीज का महत्व
घड़ियाल: विश्व की सबसे लंबी थूथन वाली मगरमच्छ प्रजाति, जो मुख्यतः भारत की गंगा-ब्रह्मपुत्र-चंबल नदी प्रणाली में पाई जाती है। यह प्रजाति IUCN की 'क्रिटिकली एंडेंजर्ड' सूची में शामिल है। मध्य प्रदेश में चंबल नदी बेसिन में घड़ियालों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं।
कछुए: इनमें मुख्य रूप से इंडियन फ्लैपशेल टर्टल और रेड-क्राउनड रूफ्ड टर्टल शामिल हैं, जो भी संकटग्रस्त प्रजातियां हैं। ये कछुए नदी की सफाई में मदद करते हैं और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं।
कूनो नदी में इन जीवों की रिलीज से स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूती मिलेगी। वन विभाग के अनुसार, इन प्रजातियों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर और कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री का दौरा और अन्य गतिविधियां
मुख्यमंत्री ने कूनो नेशनल पार्क में चीतों के क्षेत्र का भी दौरा किया। उन्होंने चीतों के संरक्षण, उनके प्रजनन और पारिस्थितिकी संतुलन पर वन अधिकारियों से चर्चा की। डॉ. यादव ने कहा कि कूनो अब न केवल चीतों का घर है, बल्कि घड़ियाल, कछुआ और अन्य वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि संरक्षण कार्यों में और तेजी लाई जाए।
पर्यावरणविदों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि घड़ियाल और कछुओं की रिलीज से चंबल-कूनो बेसिन में जैव विविधता मजबूत होगी। स्थानीय ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री के दौरे और इस पहल से उत्साह जताया है।
यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश सरकार की 'हरियाली महाभियान' और 'प्रोजेक्ट गंगा' का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश में लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस दौरे ने एक बार फिर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।












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