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Kisan MP News: किसानों की फसलों का सत्यानाश! सरकार से मिलेगी बड़ी मदद? जानिए पूरी खबर और राहत पैकेज की डिटेल

MP kisan News: मध्य प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से हुई ओलावृष्टि, असमय बारिश और तेज हवाओं ने हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासकर गेहूं, चना, मसूर, सरसों, मटर और दालों की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।

किसानों का कहना है कि फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं और अब कटाई भी मुश्किल लग रही है। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और नुकसान का आकलन कर जल्द राहत पैकेज घोषित किया जाएगा।

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कहां-कहां हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

उज्जैन, देवास, इंदौर, धार, रतलाम: मालवा क्षेत्र में ओलावृष्टि और तेज हवाओं से गेहूं और सरसों की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित। सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़: बुंदेलखंड में असमय बारिश से चना और मसूर की फसलें लेट गईं।
ग्वालियर-चंबल संभाग: मुरैना, भिंड, श्योपुर में सरसों और मटर को भारी नुकसान।
जबलपुर, कटनी, बालाघाट: पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश और ओले से धान की कटाई बाकी फसलों को क्षति।

किसानों का कहना है कि फसलें 70-80% तक खराब हो चुकी हैं। कई जगहों पर गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गईं, जिससे उत्पादन में 50% तक की कमी आने की आशंका है।

सरकार की ओर से क्या राहत मिलेगी?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 फरवरी को अधिकारियों के साथ बैठक की और निर्देश दिए कि तुरंत राजस्व विभाग, कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा नुकसान का आकलन किया जाए।

प्रस्तावित राहत पैकेज के प्रमुख बिंदु (संभावित):

  • प्रति हेक्टेयर मुआवजा: गेहूं-चना-मसूर के लिए 25,000 से 35,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक।
  • सरसों और अन्य तिलहन फसलों के लिए 20,000 से 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
  • फसल बीमा के तहत क्लेम तेजी से प्रोसेस करने के आदेश।
  • किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज माफी या अतिरिक्त सब्सिडी।
  • बीज और खाद पर विशेष छूट अगले सीजन के लिए।
  • प्राकृतिक आपदा राहत कोष से तत्काल सहायता।

सरकार ने कहा है कि नुकसान का आकलन 7-10 दिनों में पूरा किया जाएगा और राहत राशि सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा: "किसानों के साथ खड़ा हूं। फसल नुकसान की हर खबर पर नजर है। जल्द राहत पैकेज घोषित होगा।"

किसानों की मांगें

किसान संगठनों ने मांग की है कि राहत राशि कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर हो और सर्वेक्षण में पारदर्शिता बरती जाए। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि पहले से ही फसल बीमा क्लेम में देरी हो रही है और अब नया नुकसान हुआ है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को तुरंत आपदा घोषित करनी चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में फसल बीमा योजना प्रभावी है और नुकसान होने पर क्लेम प्रक्रिया तेज की जाएगी।

किसानों की स्थिति और अपील

कई किसानों ने बताया कि फसलें खराब होने से कर्ज का बोझ बढ़ गया है। कुछ ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो वे आत्महत्या जैसी कठोर स्थिति में पहुंच सकते हैं। किसान संगठनों ने सरकार से अपील की है कि राहत पैकेज में बीज, खाद और बिजली बिल माफी भी शामिल हो। यह घटना एक बार फिर मध्य प्रदेश में मौसम की मार और फसल नुकसान की समस्या को उजागर करती है। सरकार का दावा है कि किसानों को समय पर राहत मिलेगी, लेकिन किसान अब राहत पैकेज की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

किसानों के लिए राहत कब?

सरकार ने कहा है कि 7-10 दिनों में आकलन पूरा होगा और राहत राशि सीधे खाते में ट्रांसफर होगी। लेकिन किसान कह रहे हैं - "फसल खराब हो गई, अब इंतजार नहीं सहेगा।"

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