Karni Sena: हरदा में करणी सेना के आंदोलन में कैसे उमड़ा हजारों का हुजूम, क्या कर रही पुलिस, जानिए पूरी जानकारी
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में करणी सेना द्वारा चलाया जा रहा जनक्रांति आंदोलन अब राज्य का सबसे बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। नेहरू स्टेडियम में 21 सूत्रीय मांगों को लेकर जारी इस आंदोलन में किसानों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है।
प्रशासन की मानें तो यह हरदा के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन है, जिसके चलते पूरा जिला हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है।

पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, हर एंट्री-पॉइंट पर नजर
आंदोलन की विशालता और संभावित संवेदनशीलता को देखते हुए जिले में पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। नेहरू स्टेडियम से लेकर हरदा जिले के सभी प्रवेश और निकास मार्गों तक पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी है। जिले में बाहर से आए अतिरिक्त पुलिस बल को ठहराने के लिए करीब 30 होटल और धर्मशालाओं को प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।
रविवार सुबह तक के आंकड़ों के मुताबिक, 20 हजार से अधिक किसान और करणी सेना समर्थक हरदा शहर में मौजूद हैं। प्रशासन लगातार ड्रोन, सीसीटीवी और फील्ड इंटेलिजेंस के जरिए हालात पर नजर बनाए हुए है।
21 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज
- करणी सेना परिवार ने सरकार और प्रशासन के सामने 21 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन रखा है। इनमें प्रमुख रूप से-
- न्यायिक जांच और दर्ज मामलों की वापसी
- आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया में सुधार
- आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग
- किसानों की समस्याओं का समाधान
- बिजली बिल और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें
- शिक्षा और रोजगार के अवसर
- महिला सुरक्षा
- गो-संरक्षण
- पूर्व सैनिकों के मुद्दे
मीडिया कर्मियों से जुड़े अधिकार
शामिल हैं। करणी सेना का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन मजबूती से जारी रहेगा।
9 दिन में 280 किमी पैदल यात्रा कर पहुंचे करणी सैनिक
आंदोलन की गंभीरता और जनभावना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन जिले के महिदपुर से 10 करणी सैनिक पैदल चलते हुए हरदा पहुंचे हैं। उन्होंने 9 दिनों में करीब 280 किलोमीटर की दूरी तय की।
करणी सैनिक गोपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि वे 11 दिसंबर को जीवन सिंह शेरपुर के समर्थन में निकले थे। उनके साथ अर्जुन सिंह सुहागपुरा, अज्जू बना, कृष्ण पाल बना, जयराज बना, दिलीप सिंह, हरिपाल सिंह, राजपाल सिंह, रितेश बना, भारती हाड़ा (खिरकिया) सहित अन्य साथी भी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे हैं।
प्रशासन और सरकार पर बढ़ता दबाव
इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से प्रशासन पर दबाव साफ नजर आ रहा है। जिला प्रशासन लगातार आंदोलनकारियों से संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। वहीं, करणी सेना का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि जनहित और न्याय के लिए है।
हरदा बना प्रदेश की सियासत का केंद्र
करणी सेना का जनक्रांति आंदोलन अब सिर्फ हरदा तक सीमित नहीं रह गया है। पूरे प्रदेश की नजरें इस आंदोलन पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासन की रणनीति तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल, हरदा में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित हैं, और नेहरू स्टेडियम जनआंदोलन का केंद्र बन चुका है।












Click it and Unblock the Notifications