जी-राम-जी बयान पर सियासी घमासान: राहुल गांधी पर भड़की BJP, डॉ केसवानी बोले—140 करोड़ लोगों की आस्था से खिलवाड़
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कथित रूप से केंद्र सरकार की योजनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा,
"मुझे नहीं पता जी-राम-जी क्या है!"
राहुल गांधी के इस बयान को भाजपा ने धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए बड़ा मुद्दा बना दिया है। बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

BJP का तीखा पलटवार
राहुल गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश केसवानी ने इसे सीधे तौर पर हिंदू समाज की आस्था पर हमला बताया।
डॉ केसवानी ने कहा,"भगवान श्री राम 140 करोड़ भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं। उनके नाम को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना सिर्फ राजनीतिक अपरिपक्वता नहीं, बल्कि देश की धार्मिक भावनाओं का अपमान है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का बयान जानबूझकर आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है।
'राम' नाम से जुड़ी आस्था का अपमान: BJP
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भगवान श्री राम का नाम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि "राम नाम से ही कष्टों का निवारण होता है, जीवन को दिशा मिलती है। ऐसे में मज़ाकिया लहजे में टिप्पणी करना देश की आस्था से खिलवाड़ है।"भाजपा ने इसे केवल बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस की सोच का प्रतिबिंब बताया।
कांग्रेस के पुराने रुख पर भी हमला
डॉ केसवानी ने इस मौके पर कांग्रेस के पुराने रुख को भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि- कांग्रेस ने लंबे समय तक भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए। राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया।
राम सेतु को लेकर भी विवादित टिप्पणियां कीं
उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी का बयान उसी मानसिकता का हिस्सा है। 'राजनीतिक लाभ के लिए आस्था से खिलवाड़' का आरोप भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस बार-बार धार्मिक मुद्दों पर बयान देकर समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश करती है। डॉ केसवानी ने चेतावनी देते हुए कहा,"अगर कांग्रेस ने अपनी सोच नहीं बदली, तो वह सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।"
कांग्रेस की ओर से सफाई का इंतजार
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई औपचारिक सफाई सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक गर्मा सकता है, खासकर तब जब धार्मिक आस्थाओं से जुड़े विषय चुनावी माहौल में और संवेदनशील हो जाते हैं।












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