MP News: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, भोपाल में ₹1 लाख की रिश्वत लेते सहायक ग्रेड-1 रंगे हाथ पकड़ा गया
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) श्री योगेश देशमुख के निर्देश पर जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने भोपाल में एक सनसनीखेज ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया।
इस कार्रवाई में अनुसूचित जाति विकास विभाग के सहायक ग्रेड-1 जीवन लाल बरार को ₹1 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। यह राशि उन्होंने एक जाति प्रमाण पत्र की जाँच को दबाने के एवज में माँगी थी। इस घटना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सक्रियता को एक बार फिर उजागर किया है।

घटना का विवरण
घटना 18 अगस्त 2025 की है, जब जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने भोपाल के पंचशील नगर में ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता उषा दाभीरकर (60 वर्ष), निवासी गुलाबरा, जिला छिंदवाड़ा, जो वाणिज्य कर कार्यालय, छिंदवाड़ा में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत हैं, ने लोकायुक्त को सूचना दी थी। उषा ने बताया कि उनकी जाति प्रमाण पत्र की जाँच कार्यालय आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास विभाग, राजीव गांधी भवन, भोपाल में चल रही थी। इस जाँच को दबाने के लिए आरोपी जीवन लाल बरार (61 वर्ष), सहायक ग्रेड-1, ने उनसे ₹5 लाख की रिश्वत की माँग की थी।
लोकायुक्त को मिली शिकायत के आधार पर एक ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई गई। 18 अगस्त को उषा दाभीरकर ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹1 लाख की राशि आरोपी को देने के लिए उसके घर (मकान नंबर G-21, प्रशासनिक अकादमी के सामने, पंचशील नगर, भोपाल) पर पहुँची। जैसे ही जीवन लाल बरार ने यह राशि स्वीकार की, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
कानूनी कार्रवाई
आरोपी जीवन लाल बरार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(B), और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत रिश्वत लेने और आपराधिक कदाचार के लिए सजा का प्रावधान है, जिसमें 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना शामिल हो सकता है।
लोकायुक्त की ओर से जारी बयान में कहा गया, "आरोपी को रिश्वत की राशि स्वीकार करते हुए पकड़ा गया है। मामले की जाँच जारी है, और सभी सबूतों को जमा किया जा रहा है। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"

ट्रैप ऑपरेशन की टीम
इस कार्रवाई को जबलपुर लोकायुक्त की एक विशेष टीम ने अंजाम दिया, जिसका नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती नीतू त्रिपाठी ने किया। टीम में निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक उमा कुशवाहा, निरीक्षक जितेंद्र यादव, और अन्य लोकायुक्त कर्मी शामिल थे। इस ऑपरेशन की सफलता के लिए लोकायुक्त ने अपनी टीम की सजगता और समन्वय की सराहना की।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधान
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानून है, जो लोक सेवकों द्वारा रिश्वत और आपराधिक कदाचार को रोकने के लिए बनाया गया है। धारा 7 के तहत किसी लोक सेवक द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अनुचित लाभ (रिश्वत) स्वीकार करना या स्वीकार करने का प्रयास करना अपराध है, जिसके लिए 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। धारा 13(1)(B) और 13(2) आपराधिक कदाचार से संबंधित हैं, जिसमें लोक सेवक द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ प्राप्त करना शामिल है। इस मामले में जीवन लाल बरार पर इन सभी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएँ
इस कार्रवाई ने भोपाल और छिंदवाड़ा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूती दी है। स्थानीय लोगों ने लोकायुक्त की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। छिंदवाड़ा के एक व्यापारी, राकेश जैन, ने कहा, "लोकायुक्त की यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए एक सबक है। हमें उम्मीद है कि ऐसी कार्रवाइयाँ आगे भी जारी रहेंगी।"
हालांकि, कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या इस तरह की कार्रवाइयाँ भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुँच पा रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल शर्मा ने कहा, "यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म करने के लिए बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।"
लोकायुक्त की सक्रियता
पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख ने हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उनकी अगुआई में लोकायुक्त ने मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई ट्रैप ऑपरेशन किए हैं। इस मामले में भी उनकी सक्रियता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
भविष्य की दिशा
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर किया है। जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जाँच में रिश्वत की माँग न केवल आम जनता के लिए परेशानी का कारण है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से यह उम्मीद जगी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में और सख्त कदम उठाए जाएँगे।
मामले की जाँच अभी जारी है, और लोकायुक्त ने कहा है कि आरोपी के खिलाफ सभी सबूतों को मजबूत कर कोर्ट में पेश किया जाएगा। साथ ही, यह भी देखना होगा कि क्या इस कार्रवाई से अन्य भ्रष्ट अधिकारियों में डर पैदा होगा, या यह एक अलग-थलग घटना बनकर रह जाएगी।












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