Indore MP News: शीतला माता बाजार में इस्लामोफोबिया का काला अध्याय, मुस्लिम दुकानदार सड़क पर, जानिए पूरा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और व्यावसायिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, आज इस्लामोफोबिया के एक शर्मनाक चेहरे का गवाह बन गया है। शीतला माता बाजार, शहर का सबसे पुराना और लोकप्रिय महिलाओं के वस्त्र बाजार, जहां 501 दुकानें हैं, में बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य सिंह गौर ने 'बाजार शुद्धिकरण' के नाम पर घृणा भरा आदेश जारी किया।

उन्होंने दुकानदारों को निर्देश दिया कि सभी मुस्लिम सेल्समैनों को तुरंत निकाल दिया जाए और मुस्लिम समुदाय के किराएदारों को दो महीने के अंदर दुकानें खाली करनी होंगी।

Indore Islamophobia in Sheetla Mata market Muslim shopkeepers on road MLA son Eklavya Singh Gaur

कथित तौर पर 'लव जिहाद' को रोकने के बहाने यह आदेश दिया गया, जिसने पूरे बाजार में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया। बुधवार को मुस्लिम व्यापारियों और कर्मचारियों ने साइलेंट प्रोटेस्ट के जरिए विरोध दर्ज किया, जिसमें हिंदू व्यापारियों ने भी उनका साथ दिया। पुलिस और प्रशासन की चुप्पी ने इस विवाद को और गहरा दिया है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।

विधायक पुत्र का 'शुद्धिकरण' आदेश

घटना की शुरुआत सितंबर की पहली सप्ताह में हुई, जब एकलव्य सिंह गौर, जो हिंदू रक्षक संगठन के प्रमुख भी हैं, ने शीतला माता बाजार व्यापारी एसोसिएशन के साथ एक बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बाजार की सभी 501 दुकानों में मुस्लिम सेल्समैनों को काम नहीं दिया जाएगा। साथ ही, यदि कोई दुकान मुस्लिम किराएदारों के पास है, तो उन्हें 25 सितंबर तक (दो महीने की समयसीमा के साथ) खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया। एकलव्य ने दावा किया कि यह कदम 'लव जिहाद' के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जरूरी है।

बाजार के महासचिव पप्पू महेश्वरी ने इस बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि एसोसिएशन ने यह आदेश स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आगे कहा, "कुछ दुकानदार अपने सेल्समैनों को निकालना नहीं चाहते, हम उनकी बात सुनेंगे। लेकिन निर्देशों का पालन होगा।" यह आदेश न केवल आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहा है, बल्कि बाजार की सदियों पुरानी एकता को तोड़ने की कोशिश माना जा रहा है। शीतला माता बाजार दशकों से हिंदू-मुस्लिम व्यापारियों का साझा केंद्र रहा है, जहां पार्टनरशिप में दुकानें चलती हैं।

सड़क पर उतरे मुस्लिम सेल्समैन और व्यापारी

अपने रोजगार पर मंडराते खतरे को देखते हुए बुधवार को बाजार के मुस्लिम सेल्समैन और किराएदार व्यापारियों ने साइलेंट प्रोटेस्ट का आयोजन किया। हाथों में बैनर और पोस्टर थामे वे सड़कों पर उतरे और इस घृणा भरे आदेश के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। बैनरों पर लिखा था, "हिंदू-मुस्लिम भाईचारा टूटने न पाए", "रोजी-रोटी का हक सबका" और "नफरत के खिलाफ एकजुट"। प्रोटेस्ट में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें कई हिंदू व्यापारी भी थे।

एक मुस्लिम सेल्समैन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम सालों से यहां काम कर रहे हैं। यह हमारा रोजगार है, परिवार का सहारा। अचानक धर्म के नाम पर निकाल दिया जाए, यह अन्याय है।" प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन कोई हस्तक्षेप नहीं किया। यह मूकदर्शक रवैया व्यापारियों के बीच और निराशा पैदा कर रहा है।

हिंदू व्यापारियों का साथ: "हम भाई हैं, कोई भेदभाव नहीं"

प्रोटेस्ट की सबसे प्रेरक बात यह रही कि कई हिंदू व्यापारियों ने मुस्लिम साथियों का खुलकर समर्थन किया। बाजार में कई दुकानें हिंदू-मुस्लिम पार्टनरशिप में चलती हैं, और इनमें से कुछ को भी खाली करने का आदेश मिला है। 40 वर्षीय हिंदू दुकानदार बलवंत सिंह राठौड़ ने प्रोटेस्ट में हिस्सा लेते हुए कहा, "हम दो भाई हैं, एक पार्टनर। दुकान हिंदू-मुस्लिम नाम से चलती है। किसी के पेट पर लात मारना गलत है। भाईचारा टूटने नहीं देंगे।" उन्होंने आगे कहा, "इंदौर की तहजीब यही है- सबका साथ, सबका विकास।"

एक अन्य हिंदू व्यापारी ने बताया, "मेरा मुस्लिम पार्टनर मेरे भाई जैसा है। आदेश के खिलाफ हम सब एकजुट हैं।" इन व्यापारियों ने पुलिस से मांग की कि एकलव्य सिंह गौर जैसे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि बाजार की शांति बनी रहे।

कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की चुप्पी

इस मुद्दे पर विपक्ष ने तीखा रुख अपनाया। कांग्रेस ने 15 सितंबर को पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा, "यह नफरत भरा आदेश असंवैधानिक है। यदि विपक्षी नेता ऐसा कहते, तो केस दर्ज हो जाता। एकलव्य पर एफआईआर होनी चाहिए।" कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह 'हिंदुत्व' के नाम पर आर्थिक बहिष्कार की साजिश है।

हालांकि, इंदौर प्रशासन और पुलिस इस मामले पर मौन साधे हुए हैं। डीसीपी (जोन-2) ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई का ऐलान नहीं हुआ। कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा, "हम निगरानी कर रहे हैं, लेकिन बाजार एसोसिएशन का आंतरिक मामला लगता है।" यह चुप्पी आलोचना का विषय बनी हुई है, क्योंकि बाजार में तनाव बढ़ रहा है।

बाजार पर प्रभाव: आर्थिक नुकसान और सामाजिक तनाव

शीतला माता बाजार इंदौर का आर्थिक केंद्र है, जहां सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। मुस्लिम सेल्समैनों की संख्या 200 से अधिक बताई जा रही है, और कई दुकानें किराए पर मुस्लिम व्यापारियों के पास हैं। इस आदेश से न केवल रोजगार छिन रहा है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम पार्टनरशिप टूटने का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आर्थिक भेदभाव सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नाजिया खान ने कहा, "इंदौर की पहचान एकता है। ऐसे आदेश 'लव जिहाद' के बहाने नफरत फैलाते हैं। प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए।" मुस्लिम नेटवर्क टीवी ने इसे 'हिंदुत्व अभियान' का हिस्सा बताया, जो बाजारों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+