इंदौर दूषित जल त्रासदी: भाजपा सरकार की लापरवाही ने निर्दोष नागरिकों की जान ली — जीतू पटवारी का तीखा हमला
Indore Water tragedy: देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है।
उन्होंने इंदौर जल त्रासदी को घोर प्रशासनिक लापरवाही, संवेदनहीनता और सत्ता के अहंकार का नतीजा बताया और कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है।

"भाजपा का अहंकार रावण से भी बड़ा" - पटवारी
पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा नेताओं में सत्ता का अहंकार इस कदर बढ़ गया है कि वे जनता और पत्रकारों तक से बदतमीजी पर उतर आए हैं।
पटवारी ने दो टूक कहा-"भाजपा नेताओं में सत्ता का अहंकार रावण से भी बड़ा हो गया है। जब पत्रकार जनता के सवाल पूछते हैं, तो मंत्री उन्हें गालियाँ देते हैं। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही सोच का परिचायक है।" उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि जब जनता मर रही है, तब सवाल पूछना "फोकट" बताना बेहद शर्मनाक है।
"इंदौर ने भाजपा को सब कुछ दिया, बदले में मिला ज़हरीला पानी"
जीतू पटवारी ने इंदौर की जनता के भरोसे को याद दिलाते हुए कहा-"इंदौर ने भाजपा को सांसद, 9 विधायक, महापौर और पूरा नगर निगम दिया। बदले में भाजपा ने शहर को ज़हरीला पानी दिया और मौतें सौंप दीं।"
उन्होंने मौतों के आंकड़ों पर भी सवाल खड़े किए- "आज 13 मौतों की बात सामने आ रही है, जबकि मुख्यमंत्री केवल 4 मौतें स्वीकार कर रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री भी मौतों की संख्या छिपाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं?" पटवारी ने कहा कि यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि उन परिवारों की त्रासदी है जिन्होंने अपनों को खो दिया।
"दोषियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?"
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि इतने बड़े हादसे के बावजूद-
- अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- दोषी जनप्रतिनिधियों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया?
नगर निगम और महापौर की जवाबदेही क्यों तय नहीं हो रही?
उन्होंने कहा- "मुख्यमंत्री सही निर्णय क्यों नहीं ले रहे? जिनकी लापरवाही से निर्दोष नागरिकों की जान गई है, उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज होना चाहिए।"
"ना संवेदना, ना सुरक्षा, ना जवाबदेही"
पटवारी ने कहा कि गंदा पानी पीने से इंदौर में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद पूरी भाजपा सरकार सत्ता के नशे में मदहोश नजर आ रही है। "ना संवेदना है, ना सुरक्षा, ना जवाबदेही। सरकार सिर्फ बयान, दौरे और इवेंट में उलझी है।"
मुख्यमंत्री से सीधा सवाल: "रीढ़ की हड्डी दिखाइए"
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा- "इस दुखद घटना में मैं और पूरी कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और सरकार के साथ सहयोग को भी तैयार है। लेकिन मुख्यमंत्री पद की गरिमा निभाते हुए आपको अपनी रीढ़ की हड्डी दिखानी होगी।"
उन्होंने मांग की कि- दोषी अधिकारियों और नेताओं से तत्काल इस्तीफा लिया जाए। पीड़ित परिवारों को ठोस और वास्तविक मदद मिले। केवल घोषणाओं से नहीं, जमीनी कार्रवाई से भरोसा लौटाया जाए
इंदौर के लिए स्वतंत्र प्रभारी मंत्री की मांग
पटवारी ने कहा कि हालात इतने गंभीर हैं कि- "इंदौर के लिए तुरंत एक मजबूत, सक्षम और स्वतंत्र प्रभारी मंत्री की नियुक्ति की जाए, जिसे स्पष्ट अधिकार हों कि वह जवाबदेही तय करे, दोषियों पर कार्रवाई करे और जरूरत पड़े तो उनसे इस्तीफा ले सके।"
- कांग्रेस की जांच समिति, ₹1 करोड़ मुआवज़े की मांग
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है।
- उन्होंने मांग रखी-मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा
- दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर
- पत्रकारों से दुर्व्यवहार करने वाले मंत्री से इस्तीफा
"यह राजनीति नहीं, मानवीय जिम्मेदारी का सवाल"
अंत में जीतू पटवारी ने कहा- "यह विषय राजनीति का नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी और जवाबदेही का है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार का अहंकार और कुशासन अब जनता की जान ले रहा है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी- "पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।"
इंदौर की दूषित जल त्रासदी अब केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं रही, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही, संवेदनशीलता और शासन की साख का बड़ा इम्तिहान बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।












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