MP NEWS : शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही, CM Shivraj की मदद वाली योजना को बना दिया हंसी का पात्र
सरकारी कामकाज की लापरवाही का खामियाजा कोरोना महामारी में अपने माता पिता को गवाकर अनाथ हो जाने वाले 1370 बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। संवेदनशील सीएम ने तो इन बच्चों को डेढ़ साल पहले ही मदद पहुंचाने का ऐलान किया था लेकिन व
सरकारी कामकाज की लापरवाही का खामियाजा कोरोना महामारी में अपने माता पिता को गवाकर अनाथ हो जाने वाले 1370 बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। संवेदनशील सीएम ने तो इन बच्चों को डेढ़ साल पहले ही मदद पहुंचाने का ऐलान किया था लेकिन विभागीय ढीलेपन के कारण अब तक उन 1370 बच्चों को कोविड बाल सेवा योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इसमें विभाग को अभी यही नहीं पता कौन बच्चा कहां और किस हाल में है ? एमपी में कोरोना महामारी के कारण कई बच्चे अनाथ हो गए थे। प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या करीब 1370 है। सीएम कोविड बाल सेवा योजना के तहत इन्हें निशुल्क शिक्षा प्रदान की जानी थी, लेकिन शिक्षा विभाग के पास यह जानकारी ही नहीं है कि किस जिले के किस स्कूल में कितने ऐसे बच्चे अध्ययनरत है। इसी के कारण महिला बाल विकास विभाग से बजट प्राप्त नहीं कर सका। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से इन बच्चों को ट्रेस कर जानकारी देने के लिए कहा है।

17 माह पहले एमपी में शुरू हुई थी योजना
कोरोना महामारी में अपने माता पिता को खोने वाले बच्चों की शिक्षा आर्थिक सहायता और खाद्य सुरक्षा के लिए प्रदेश की महिला बाल विकास ने पिछले साल 21 मई 2021 को मुख्यमंत्री को कोविड बाल कल्याण योजना शुरू की थी। इस योजना में कोविड से माता अथवा पिता या बच्चों के वैध अभिभावकों के निधन पर उन पर आश्रित 21 साल से कम आयु के स्नातक में अध्ययनरत 24 साल तक की आयु के बच्चों के लिए यह योजना शुरू की गई थी। लेकिन अब तक लाभ किसी को नहीं मिला।

जिला शिक्षा अधिकारियों ने की लापरवाही
स्कूल शिक्षा विभाग अब तक जिला शिक्षा अधिकारियों को तीन बार पत्र भेजकर यह जानकारी मांग चुका है, लेकिन जिलों से अब तक ये जानकारी नहीं भेजी गई है। इसी के चलते महिला बाल विकास की बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग बजट की मांग नहीं कर पा रहा है, जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। उनके बारे में कलेक्टर को जानकारी दी जाना है। ताकि कलेक्टर के माध्यम से उनकी पढ़ाई की व्यवस्था हो सके सुप्रीम कोर्ट भी इसको लेकर सकते हाईकोर्ट की समिति भी इसे रिव्यु कर रही है। वैसे लगातार मॉनिटर कर रहे हैं इसलिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से ने ट्रेस करने और उनकी जानकारी भेजने को कहा गया है।

सीएम कोविड बाल सेवा योजना
कोरोना में माता-पिता को खोने वाले बच्चे जो आरटीई से कवर नहीं है। ऐसे कक्षा 9 से 12वीं तक के बच्चों के लिए सीएम कोविड बाल सेवा योजना के तहत महिला बाल विकास विभाग द्वारा राशि प्रदान की जाना है, लेकिन अब तक शिक्षा विभाग को यह पता ही नहीं है कि कहां से कितने ऐसे बच्चे अध्ययन कर रहे हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग अब तक खोज नहीं पाया पात्र बच्चे
स्कूल शिक्षा विभाग इस मामले पर बोलने को तैयार नहीं है। डीपीआई संचालक से वन इंडिया ने बात की कोशिस की तो उन्होंने इस पर बात करने से मना कर दिया। बता दे योजना का लाभ 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 के बीच मध्य प्रदेश के स्थानीय निवासी माता-पिता की कोविड से मौत हो जाने पर दिया जाना था। योजना में बाल हितग्राही को हर महा ₹5000 की आर्थिक सहायता, निशुल्क मासिक राशन, शासकीय विद्यालय में निशुल्क शिक्षा, निजी स्कूलों के बच्चों की फीस दी जानी थी। निजी स्कूल के बच्चों को ₹10000 प्रति हर साल सहायता इसके अलावा छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क भी शुल्क दिया जाना था। तकनीकी शिक्षा के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए थे। लेकिन योजना शुरू हुए 17 माह हो गए और अब तक स्कूल शिक्षा विभाग में ये तय नहीं हो पाया कि कितने बच्चों को इस योजना के तहत लाभ दिया जाना है।












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