5 लाख रुपये की जॉब छोड़ने वाली IAS रानी बंसल की सेवाएं समाप्त, काले धन मामले में CBI पूछताछ से आई थी चर्चा में
मध्यप्रदेश कैडर के 2015 बैच की आईएएस अफसर रानी बंसल पर सरकार ने एक्शन लिया है। मध्य प्रदेश सरकार की अनुशंसा पर सामान्य प्रशासन विभाग भारत सरकार ने यह कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने आईएएस रानी बंसल की सेवाएं समाप्त कर दी है। रानी बंसल लंबे समय से बिना जानकारी दिए गैरहाजिर थी। उन्होंने अवकाश या त्याग पत्र जैसी कोई जानकारी विभाग को नहीं दी थी। लिहाजा विभाग ने उनकी गैर हाजिरी को डीम्ड त्याग पत्र मान लिया। किसी आईएएस अफसर पर ऐसी कार्रवाई का प्रदेश में संभवत: ये पहला मामला है। इससे पहले 1999 बैच के आईएएस अनिल यादव को भी हटाया गया था, हालांकि उन्होंने नौकरी में आने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन सरकार इंकार कर दिया था। जानिए रानी बंसल पर किस नियम के तहत कार्रवाई की गई और उनके पिता ने क्या कुछ कहा....

5 लाख रुपये की जॉब छोड़कर की थी यूपीएससी की तैयारी
मध्य प्रदेश कैडर के 2015 बैच की आईएएस अफसर रानी बंसल की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। मध्य प्रदेश सरकार की अनुशंसा पर सामान्य प्रशासन विभाग भारत सरकार ने यह कार्रवाई की हैं। दरअसल रानी बंसल 2019 से बिना कोई कारण बताए या बिना किसी सूचना के गायब चल रही थी। रानी बागली एसडीएम के पद पर पदस्थ और वहां से बिना बताए अनुपस्थित चल रही थी। रानी बंसल भोपाल की रहने वाली उनके पिता राजेंद्र गुप्ता मेडिकल शॉप संचालक है। उन्होंने आरजीपीवी यूनिवर्सिटी से इंजरिंग में ग्रेजुएशन किया था। उस समय उन्हें केंपस सिलेक्शन में ₹5 लाख की जॉब मिली थी, लेकिन जॉब छोड़ कर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की थी। यूपीएससी में रानी ने 64 भी रैंक हासिल की थी। इसके बाद मध्यप्रदेश कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अफसर बनी और प्रदेश में सेवाएं दे रही थी।

स्वत: त्यागपत्र मंजूर करने का किया था आग्रह
रानी बंसल एसडीएम बागली के पद पर पदस्थ थी। वह 31 मई 2019 से बिना बताए अनाधिकृत रूप से गैर चल रही थी। उन्होंने साल 2020 और 2021 का अपना संपत्ति का ब्यौरा भी नहीं दिया था। सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक ने उनके पते पर कई बार उन्हें नोटिस जारी कर उनके अनुपस्थित रहने का कारण जानना चाहा, लेकिन उनकी ओर से इसका कोई जवाब ना आने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक ने केंद्रीय कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को उनका पूरा मामला भेज कर उनका भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वत: त्यागपत्र मंजूर करने का आग्रह किया था।

काले धन के मामले में सीबीआई पूछताछ से आई थीं चर्चा में
उनके पति कस्टम इंस्पेक्टर है। साल 2017 में जब वे नरसिंहपुर के गाडरवारा में पदस्थ थी, तब काले धन के मामले में सीबीआई द्वारा पूछताछ को लेकर वे चर्चा में आई थी। सीबीआई ने रानी के पति के दोस्त कस्टम इंस्पेक्टर परमानंद सिंघानिया के मामले में सीबीआई ने उनसे पूछताछ की थी। सिंघानिया ने उनके खाते में ₹14 लाख ट्रांसफर किए थे। उस समय रानी ने बताया था कि उनके पति ने सिंघानिया को यह राशि दी थी जिसे उन्होंने वापस किया है विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान विधायक सतीश सिकरवार ने 1 सवाल के जरिए मध्य प्रदेश के 1 आईएएस अफसरों की जानकारी मांगी थी, जिन्होंने अपना अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने बताया था कि रानी बंसल सहित तीन आईएएस ऐसे हैं, जिन्होंने यह ब्यौरा नहीं दिया है।

पिता बोले लंबे समय से हैं बीमार
रानी बंसल के पिता से जब उनकी गैर हाजिरी को लेकर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मेरी बेटी रानी बंसल लंबे समय से बीमार चल रही है। अभी फिलहाल कुछ और समय नौकरी में जॉइंट करने की इच्छुक नहीं हैं। मैं फिलहाल मुंबई में अपने पति के तन बिश्नोई के साथ रह रही हैं मैं पहले भोपाल फैक्चर अस्पताल में मेडिकल शॉप चलाता था। अब दुकान बंद कर दी है।

प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, दीप्ति गॉड मुखर्जी ने दी जानकारी
मध्य प्रदेश कैडर के 2015 बैच के आईएएस अफसर रानी बंसल मई 2019 से बिना बताए अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रही थी। उनकी ओर अवकाश आवेदन न आने और इतनी लंबी अवधि तक गायब रहने पर हमने डीओपीटी को उनके डीम्ड रेजिग्ग्रशन का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। उसे डीओपीटी ने स्वीकार कर लिया।

इस नियम के तहत हटाया
आईएस रानी बंसल के बिना बताए गायब रहने और पत्राचार का कोई जवाब नहीं दिए जाने के बाद केंद्रीय कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय ने अखिल भारतीय सेवा अवकाश्या नियमावली 1955 के नियम7(2)(क) के अनुसार रानी बंसल का भारतीय प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र स्वीकार किया गया है। राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
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इससे पहले आईएस अनिल यादव को भी इसी तरह हटाया गया
1999 बैच की आईएएस अनिल यादव को भी इसी तरह हटाया गया था यादव 25 जुलाई 2007 से 24 जुलाई 2009 तक अध्ययन अवकाश पर गए थे। अवकाश समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटे। ना ही कोई सूचना सरकार को दी। सरकार ने स्वतः त्यागपत्र का प्रस्ताव डीओपीटी को भेजा तो यादव ने नौकरी में वापस आने के लिए अर्जी दी, लेकिन सरकार ने उनका डीम्ड रेजिग्ग्रेशन स्वीकार कर उन्हें पद से हटा दिया।












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