भोपाल में ऐतिहासिक गोशाला सम्मेलन, सीएम निवास में पहली बार आयोजन, 90 करोड़ की राशि ट्रांसफर
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐतिहासिक और अनूठा आयोजन हुआ, जब मुख्यमंत्री निवास पहली बार प्रदेश स्तरीय गोशाला सम्मेलन का गवाह बना। इस भव्य समारोह में प्रदेश भर से सरकारी और निजी गोशालाओं के संचालक, साधु-संत, और गोसेवक एकत्र हुए।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर 90 करोड़ रुपये की राशि सिंगल क्लिक के जरिए गोशालाओं के खातों में हस्तांतरित की, जो गोवंश के बेहतर व्यवस्थापन के लिए थी। सम्मेलन में सभी अतिथियों को गोबर से निर्मित राम दरबार की प्रतिमा भेंट की गई, जो गो-उत्पादों के प्रति सम्मान और उनके उपयोग को बढ़ावा देने का प्रतीक था।

सम्मेलन में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, मेयर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, और प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट गोशालाओं और गोसेवकों को आचार्य श्री विद्यासागर जीवदया सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया और कामधेनु योजना के तहत हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए। इस आयोजन ने गोसंरक्षण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया। आइए, इस ऐतिहासिक सम्मेलन की पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं-क्या हुआ मुख्यमंत्री निवास में, कैसे बदलेगा गोशालाओं का भविष्य, और इसका सामाजिक-सियासी महत्व क्या है?
मुख्यमंत्री निवास में पहला गोशाला सम्मेलन: एक ऐतिहासिक शुरुआत
मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री निवास को गोशाला सम्मेलन के लिए चुना गया। 20 जून 2025 को सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह आयोजन पूरे दिन चला। प्रदेश की 2,150 गोशालाओं के संचालक, साधु-संत, और गोसेवक इस समारोह में शामिल हुए। आयोजन की शुरुआत गोमाता की पूजा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। सभी अतिथियों को गोबर से निर्मित राम दरबार भेंट किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और गो-उत्पादों के प्रचार का प्रतीक था।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में गोमाता के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "जिनके घर गाय, वे गोपाल। यह मुख्यमंत्री निवास भले ही हो, लेकिन आज यह गोपालों का निवास है। जहां गोमाता हैं, वहां 33 करोड़ देवी-देवता निवास करते हैं।" उनके इस बयान ने उपस्थित सभी लोगों का दिल जीत लिया और गोसंरक्षण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाया।

90 करोड़ रुपये का हस्तांतरण: गोशालाओं को आर्थिक सशक्तिकरण
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण था गोवंश के व्यवस्थापन के लिए 90 करोड़ रुपये का हस्तांतरण। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए यह राशि प्रदेश की पंजीकृत गोशालाओं के खातों में ट्रांसफर की। पशुपालन और डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया, "प्रति गाय प्रतिदिन अनुदान को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। यह राशि अप्रैल और मई 2025 के लिए है, जो 4 लाख गोवंश के पालन के लिए दी जा रही है।"
मध्यप्रदेश गोसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से यह अनुदान 2,150 गोशालाओं को दिया जा रहा है। अनुदान की प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे राशि सीधे गोशाला समितियों के खातों में पहुंचती है। X पर @MPGovt ने लिखा, "सीएम डॉ. मोहन यादव ने गोशालाओं के लिए 90 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। गौवंश की सेवा के लिए मध्य प्रदेश सरकार संकल्पित।"
आचार्य श्री विद्यासागर जीवदया सम्मान पुरस्कार: गोसेवकों का सम्मान
सम्मेलन में उत्कृष्ट गोशालाओं और गोसेवकों को आचार्य श्री विद्यासागर जीवदया सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार संस्थागत और व्यक्तिगत श्रेणियों में दिए गए। पुरस्कारों की सूची निम्नलिखित है:
संस्थागत श्रेणी (2022-23 और 2023-24):
- प्रथम पुरस्कार (5 लाख रुपये): सुरभि गोवंश सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण, ओरछा, जिला नरसिंहपुर। यह संस्था 1,000 गोवंश का पालन करती है और गो एंबुलेंस संचालित करती है।
- द्वितीय पुरस्कार (3 लाख रुपये): कपिला गोशाला, रत्नाखेड़ी, उज्जैन। इस गोशाला में 1,824 गोवंश का पालन हो रहा है।
- तृतीय पुरस्कार (2 लाख रुपये): जनजातीय कल्याण केंद्र महाकौशल गो-सदन, बरगांव, शहपुरा, डिंडोरी।
- सांत्वना पुरस्कार (50,000 रुपये):
- रामरतन दास वैष्णव गोसेवा समिति, करहधाम, धनेला, मुरैना।
- श्री विद्यासागर गौरक्षा एवं संवर्धन समिति, शिकारपुर, पन्ना।
- श्री बांके बिहारी शिक्षा एवं विकास समिति गोशाला, शिवपुरी।
- प्रथम पुरस्कार (5 लाख रुपये, 2023-24): गौ अभयारण्य सालरिया अनुसंधान एवं उत्पादन केंद्र, आगर मालवा।
- द्वितीय पुरस्कार (3 लाख रुपये, 2023-24): आचार्य श्री विद्यासागर दयोदय पशु सेवा केंद्र, तेंदूखेड़ा, दमोह।
- तृतीय पुरस्कार (2 लाख रुपये, 2023-24): कपिला गोशाला कल्याण सेवा आश्रम, अमरकंटक, अनूपपुर।
- व्यक्तिगत श्रेणी (2022-23):
- प्रथम पुरस्कार (1 लाख रुपये): प्रेमचंद्र जैन प्रेमी, कटनी।
- द्वितीय पुरस्कार (50,000 रुपये): गौरव मिश्रा, कल्याणपुर, शहडोल।
- तृतीय पुरस्कार (20,000 रुपये): बनवारी लाल साहू, भोपाल।
- कामधेनु योजना: दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
सम्मेलन में डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। यह योजना पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योजना के तहत 25 से 200 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाइयां स्थापित करने के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति, और महिलाओं को 33% अनुदान और अन्य वर्गों को 25% अनुदान दिया जाएगा।
पशुपालन विभाग के संचालक ने बताया, "कामधेनु योजना के तहत लाभार्थी 42 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।" X पर @MPGovt ने लिखा, "कामधेनु योजना के तहत हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र। दूध उत्पादन और ग्रामीण समृद्धि के लिए मप्र की पहल।"
मुख्यमंत्री का संदेश: "गोमाता का पहला हक"
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने भावुक उद्बोधन में गोमाता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "हमारी मां ने हमें जन्म दिया, लेकिन उसकी सीमा है। जहां मां की सीमा खत्म होती है, वहां गोमाता की सीमा शुरू होती है। हमारे घर की पहली रोटी पर गोमाता का पहला हक होता है।"
उन्होंने सड़कों पर बैठने वाली गायों की समस्या को संवेदनशीलता से समझाया। "बरसात में गोमाता सड़क पर इसलिए बैठती है क्योंकि मक्खी-मच्छर उसे गीली जगह पर परेशान करते हैं। सड़क पर वाहनों की हवा से मक्खी-मच्छर भाग जाते हैं, और गोमाता को लगता है कि उसके लिए पंखे चल रहे हैं। यह हमारी कमजोरी है कि हमने उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया। हमारी सरकार ने संकल्प लिया है कि हर गोमाता को गोशाला में आश्रय देंगे।"
विभाग का नाम बदला: अब "गोपालन" भी शामिल
मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम अब पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी विभाग किया जाएगा। "जब हम गोमाता के लिए इतना काम कर रहे हैं, तो विभाग के नाम में गोपालन भी जोड़ा जाना चाहिए," उन्होंने कहा। यह घोषणा गोसंरक्षण के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है।
30 नई गोशालाएं और स्वावलंबी मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025-26 के बजट में 30 नई गोशालाएं खोलने का प्रावधान किया गया है। 5,000 से अधिक गोवंश वाली गोशालाओं के लिए प्रति गाय 40 रुपये का अनुदान और 125 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। "अगर गोशाला में दूध उत्पादन होता है, तो 30% हिस्सा दूध उत्पादन के लिए उपयोग करने की अनुमति होगी। हमारा लक्ष्य है कि एक साल में कोई भी गोमाता सड़क पर न दिखे," उन्होंने कहा।
पशुपालन मंत्री का आह्वान: नस्ल सुधार पर जोर
पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल ने कहा, "गोमाता की सेवा हमें विशेष शक्ति देती है। गोशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए नस्ल सुधार पर ध्यान देना होगा। अच्छी नस्ल की बछिया तैयार करें, तो पांच-सात साल में गोशाला की स्थिति बदल जाएगी।" उन्होंने बताया कि ब्लॉक स्तर पर पशु चिकित्सक उपलब्ध हैं, जिनसे गोशाला संचालक नस्ल सुधार के लिए सहायता ले सकते हैं।
उन्होंने कहा, "मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां 200 गोवंश तक रखने पर अनुदान दिया जाता है। हमारी सरकार ने स्वावलंबी गोशालाओं के लिए नीति बनाई है, जिसमें 5,000 से 25,000 गोवंश की क्षमता होगी। वहां सीएनजी गैस, जैविक खाद, और नस्ल सुधार का काम होगा।"
सामाजिक और सियासी महत्व
यह गोशाला सम्मेलन न केवल गोसंरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बीजेपी सरकार की सांस्कृतिक और ग्रामीण विकास की नीतियों का भी प्रतीक है। मध्य प्रदेश में गोसंरक्षण को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता रहा है, और इस सम्मेलन ने इसे और मजबूत किया। X पर @BJP4MP ने लिखा, "मुख्यमंत्री निवास में गोशाला सम्मेलन। गौसंरक्षण के लिए मध्य प्रदेश देश में अग्रणी।"
विपक्षी कांग्रेस ने इस आयोजन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार को गोशालाओं के साथ-साथ किसानों की समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने X पर लिखा, "गोशाला सम्मेलन अच्छा है, लेकिन किसानों की आय दोगुनी करने और MSP पर सरकार क्या कर रही है?"
जनता और गोसेवकों की प्रतिक्रिया
सम्मेलन में शामिल एक गोशाला संचालक रमेश जैन ने कहा, "सीएम का यह कदम प्रेरणादायक है। 90 करोड़ की राशि और पुरस्कारों से गोशालाओं को नई ताकत मिलेगी।" एक साधु-संत ने कहा, "गोमाता की सेवा हमारा धर्म है। सरकार का यह सम्मेलन हमारी आस्था को बल देता है।
भविष्य की दिशा: गोसंरक्षण का नया युग
यह सम्मेलन मध्य प्रदेश में गोसंरक्षण के लिए एक नए युग की शुरुआत है। 30 नई गोशालाएं, स्वावलंबी मॉडल, कामधेनु योजना, और नस्ल सुधार जैसे कदम गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, "एक साल में हम प्रदेश का परिदृश्य बदल देंगे। कोई भी गोमाता सड़क पर नहीं दिखेगी।"
गोपालों के लिए गोपालों का निवास
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित यह गोशाला सम्मेलन मध्य प्रदेश के लिए एक मील का पत्थर है। 90 करोड़ रुपये की राशि, आचार्य विद्यासागर जीवदया पुरस्कार, कामधेनु योजना, और 30 नई गोशालाओं की घोषणा ने गोसंरक्षण को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री का बयान, "यह गोपालों का निवास है," इस आयोजन की आत्मा को दर्शाता है।
क्या मध्य प्रदेश एक साल में सड़कों पर गोवंश की समस्या को खत्म कर पाएगा? क्या स्वावलंबी गोशालाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल देंगी? इन सवालों का जवाब समय देगा, लेकिन फिलहाल, यह सम्मेलन गोमाता की सेवा में मध्य प्रदेश के संकल्प को दर्शाता है।












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