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MP News: मध्य प्रदेश के अब सभी जिलों में बिकेगी हेरिटेज शराब, 1000 रुपये से भी कम में मिलेगा लाइसेंस

मध्य प्रदेश में अलग से हेरिटेज शराब के आउटलुक खोले जाएंगे। हेरिटेज फुटकर मदिरा दुकान (आरओ) के लिए HL-2 लाइसेंस लेने के लिए आवेदक को सालाना ₹5000 लाइसेंस शुल्क देना होगा।

Heritage liquor will be sold in all districts of MP, license will be available for less than Rs 1000

मध्य प्रदेश में नई शराब नीति लागू हो चुकी है। अब प्रदेश में हेरिटेज शराब के उत्पादन और बेचने के नियम जारी होने वाले है। सरकार ने इसे लेकर पूरी तैयारी कर ली है। अब पूरे प्रदेश में हेरिटेज शराब का उत्पादन हो सकेगा। इसका लाइसेंस न्यूनतम ₹500 से लेकर ₹1000 में मिल जाएगा। उत्पादन मशीन की छमता भी अधिकतम 1000 लीटर तक की हो सकेगी। इससे ज्यादा शराब 1 दिन में नहीं बना सकेंगे।

केवल आदिवासी विकासखंडों में निर्माण

मध्य प्रदेश की केवल 89 आदिवासी विकास खंडों में आदिवासी सोसाइटी समूह ही इसका उत्पादन कर पाएंगे। बिक्री के लिए यह दूसरों की मदद ले सकेंगे। अभी अलीराजपुर में इसका उत्पादन शुरु है। डिंडोरी में भी निर्माता संस्था के प्लांट में आज से इसकी टेस्टिंग शुरू हो जाएगी।

बोतलों पर सरकार देगी चेतावनी

राज्य सरकार भले ही प्रदेश में नई शराब की दुकानें नहीं खुल रही, लेकिन हेरिटेज शराब की बिक्री के बहाने नए आउटलेट प्रदेश भर में शुरू किए जा सकेंगे। एयरपोर्ट से लेकर एमडी के वाइन के आउटलेट और बार में हेरिटेज शराब की बिक्री हो सकेगी। बोतलों पर सरकार यह चेतावनी भी देगी कि शराब पीकर वाहन न चलाएं। निर्माण से लेकर आउटलेट तक के लिए ₹5000 तक लाइसेंस शुल्क चुकाना होगा।

एक हजार लीटर से अधिक नहीं होगी क्षमता

बता दे मध्य प्रदेश सरकार ने टेस्ट ट्रायल के तौर पर प्रदेश के दो जिलों डिंडोरी और अलीराजपुर में प्लांट लगाए थे। आबकारी विभाग के अधिकारी सचिंद्र मोरी ने बताया कि सरकार ने हेरिटेज शराब का उत्पादन एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 2 जिलों में लगाया था, जो सफल रहा। इसकी क्षमता को लेकर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि 1 दिन में भले ही दो या तीन मशीनें शराब बनाए, लेकिन इसकी मात्रा एक बार में एक हजार लीटर से अधिक नहीं होगी।

दो-तीन दिन में सरकार लागू कर सकती है ये नियम

आबकारी विभाग ने डेढ़ महीने पहले नियम पर दावे आपत्ति दर्ज कराने के लिए अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद तमाम सुझावों को शामिल करते हुए ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इसे दो-तीन दिन में सरकार लागू कर सकती है।

हेरिटेज शराब बेचने के नियम

नए नियमों के अनुसार आदिवासी व स्वसहायता समूह को ही लाइसेंस के लिए पात्र माना जाएगा। लाइसेंस लेने के बाद ब्रांडिंग व अन्य सहायता के लिए स्वसहायता समूह या बाहरी व्यक्ति से एग्रीमेंट कर सकता है। इसके अलावा कंपोजिट या देशी या विदेशी शराब की दुकानों पर यह नहीं मिलेगी। वाइन शॉप के साथ हेरिटेज शराब सिर्फ पर्यटन निगम के बाहर वाणिज्य बारे में मिलेगी। हर स्वसहायता समूह अपने उत्पादन का अलग नाम रख सकता है। उत्पादन के हिसाब से ही शराब की कीमत तय की जाएगी, जिसकी निगरानी आबकारी विभाग करेगा।

भरने से लेकर परिवहन पर तक कोई शुल्क नहीं

बोतल भराई शुल्क, निर्यात शुल्क और परिवहन शुल्क के लिए सरकार कोई शुल्क नहीं लेगी। हेरिटेज शराब ड्यूटी फ्री होगी। केवल बोतलबंद और लेबल युक्त हेरिटेज मदिरा के भारत के अंदर निर्यात की अनुमति दी जाएगी। खुली हेरिटेज मजीरा का केवल भारत के बाहर निर्यात किया जा सकेगा। आबकारी आयुक्त ही निर्यात की अनुमति देंगे। आबकारी आयुक्त हेरिटेज शराब के भंडारण के लिए देशी, विदेशी शराब के भंडागारों में इसके नि:शुल्क या सशुल्क भंडारण की अनुमति दे सकेंगे।

चुनावी साल में सरकार को मिल सकता है फायदा

बता दे मध्यप्रदेश में बड़े लेवल पर आदिवासी वर्ग के लोग महुए से शराब बनाने का काम करता है। ऐसे में आदिवासी वर्ग को महुए से शराब बनाने का लाइसेंस देकर सरकार अपनी तरफ प्रभावित कर सकती है। बता दे इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव ले जाने की जरूरत भी नहीं होगी।

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