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Bhopal MP News: कब्रिस्तान विवाद, तीन शव दफनाने के बाद लगाया बोर्ड, VHP कार्यकर्ताओं ने उखाड़ा, NH पर किया जाम

MP News Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हथाईखेड़ा इलाके में धार्मिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है। सिविल अस्पताल के पास एक विवादित जमीन पर पिछले एक महीने में मुस्लिम समाज के तीन शव दफनाने के बाद कब्रिस्तान का बोर्ड लगा दिया गया। गुरुवार को जब इसकी जानकारी विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के कार्यकर्ताओं को मिली, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर बोर्ड उखाड़ फेंका।

इसके बाद 100 से अधिक कार्यकर्ता नेशनल हाईवे (एनएच) पर आनंद नगर चौकी पहुंचे और जाम लगा दिया। इस जाम से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

Graveyard dispute VHP workers uprooted a board after burying three bodies blocked NH

यह घटना भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में हुई, जहां धार्मिक संवेदनशीलता के कारण तनाव फैल गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जमीन लंबे समय से विवादित रही है, और अब यह हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव का कारण बन गई है। पिपलानी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं को समझा-बुझाकर सड़क से हटाया। थाना प्रभारी चंद्रिका यादव के वाद पेश करने पर गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने तुरंत दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर 23 सितंबर को तलब किया है। इस सुनवाई में दोनों पक्षों को दस्तावेज पेश करने होंगे, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके।

वीएचपी का दावा: जमीन हिंदू बच्चों के कब्रिस्तान के लिए आरक्षित

वीएचपी के सह-मंत्री हरिओम शर्मा ने घटना के बाद एक ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि हथाईखेड़ा सिविल अस्पताल से सटी यह जमीन शासकीय है और मूल रूप से हिंदू बच्चों को दफनाने के लिए कब्रिस्तान के रूप में आरक्षित की गई थी। उनके अनुसार, मुबारक मियां नामक व्यक्ति ने अवैध ढांचा बनाकर वक्फ बोर्ड का बोर्ड लगा दिया है। यहां मुस्लिम समाज के लोगों की डेड बॉडी दफनाई जा रही हैं, जो गैरकानूनी है। शर्मा ने कहा, "यह खसरा नंबर वाली जमीन हिंदू समुदाय के लिए निर्धारित है। अवैध अतिक्रमण को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि बोर्ड हटाने के साथ ही दफनाई गई डेड बॉडी को भी स्थानांतरित किया जाए।"

वीएचपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना 'लैंड जिहाद' का हिस्सा है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा हिंदू संपत्तियों पर अतिक्रमण किया जा रहा है। संगठन ने स्थानीय एसडीएम को ज्ञापन सौंपा, जिसमें तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। वीएचपी का यह रुख भोपाल में हाल के अन्य धार्मिक विवादों से मिलता-जुलता है, जहां हिंदू संगठन अवैध मजारों और अतिक्रमणों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का पक्ष: दफनाना धार्मिक अधिकार, बोर्ड वैध

दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह जमीन वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आती है और दफनाना उनका धार्मिक अधिकार है। एक स्थानीय मुस्लिम नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह जमीन लंबे समय से कब्रिस्तान के रूप में उपयोग हो रही है। तीन शव दफनाने के बाद बोर्ड लगाना सामान्य प्रक्रिया है। हिंदू पक्ष का दावा गलत है, और हम दस्तावेजों से इसका सबूत देंगे।" उन्होंने जाम लगाने की घटना की निंदा की और कहा कि इससे निर्दोष लोगों को परेशानी हुई। मुस्लिम संगठनों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझे।

यह विवाद भोपाल के संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने को उजागर करता है, जहां धार्मिक स्थलों को लेकर अक्सर तनाव होता रहता है। हाल ही में भोपाल के वीवीआईपी इलाके में सरकारी मकानों में बनी अवैध मजारों को लेकर भी हिंदू संगठनों ने विरोध जताया था, जो 'लैंड जिहाद' के आरोपों से जुड़ा था।

जाम से यातायात ठप, पुलिस ने संभाला मोर्चा

गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे वीएचपी कार्यकर्ता बोर्ड लेकर एनएच पर पहुंचे और 'हिंदू बच्चों का कब्रिस्तान बचाओ' के नारे लगाते हुए जाम लगा दिया। इससे भोपाल-रायसेन रोड पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। ड्राइवरों और यात्रियों को भारी परेशानी हुई। पिपलानी पुलिस की टीम ने तुरंत पहुंचकर कार्यकर्ताओं से बातचीत की। थाना प्रभारी चंद्रिका यादव ने बताया, "कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण तरीके से हटाया गया। कोई हिंसा नहीं हुई। एसडीएम साहब ने नोटिस जारी कर दिए हैं।" पुलिस ने इलाके में भारी फोर्स तैनात कर दी है, ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो।

ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक रूट्स का सुझाव दिया, लेकिन जाम के कारण कई घंटों तक समस्या बनी रही। स्थानीय व्यापारियों ने भी नुकसान की शिकायत की।

प्रशासन की कार्रवाई: 23 सितंबर को सुनवाई, दस्तावेज जरूरी

गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर 23 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया है। इसमें खसरा नंबर, वक्फ बोर्ड के दस्तावेज, शासकीय रिकॉर्ड और अन्य प्रमाण पेश करने होंगे। एसडीएम ने कहा, "विवाद का निपटारा कानूनी तरीके से किया जाएगा। दोनों पक्ष शांत रहें।" वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। यदि अवैध पाया गया, तो कार्रवाई होगी।

भोपाल जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों पर कोई भी बदलाव बिना अनुमति के नहीं होगा। कलेक्टर ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विवाद न फैले।

सामाजिक प्रभाव: भोपाल में बढ़ते धार्मिक विवाद, शांति की अपील

यह घटना भोपाल में बढ़ते धार्मिक तनाव को दर्शाती है। शहर, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, हाल के वर्षों में मजारों, मंदिरों और जमीन विवादों से जूझ रहा है। विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन इन मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय धार्मिक अधिकारों की रक्षा की बात कर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। एक एनजीओ ने कहा, "कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा करें, सड़क पर उतरना समाधान नहीं।"

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