MP इंदौर में 27 वर्ष पुरानी परंपरा टूटी, रंगपंचमी पूर्व संध्या पर होने वाला महा बजरबट्टू सम्मेलन अचानक निरस्त
MP News: देवी अहिल्या की नगरी इंदौर में पिछले 27 वर्षों से लगातार आयोजित होने वाला पारंपरिक महा बजरबट्टू सम्मेलन इस बार अचानक निरस्त कर दिया गया है। रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर होने वाला यह प्रतिष्ठित काव्य सम्मेलन शहर की सांस्कृतिक पहचान में शामिल रहा है, लेकिन इस वर्ष अंतिम दौर की तैयारियों के बीच ही कार्यक्रम रद्द होना पड़ा।
आयोजन समिति ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सहमति लेने के हर संभव प्रयास किए, लेकिन मंत्री की असहमति के चलते महज दो दिन पहले यह कठिन फैसला लेना पड़ा। इस खबर से साहित्य प्रेमियों और इंदौरवासियों में गहरा आश्चर्य और निराशा है।

सम्मेलन की परंपरा और महत्व
महा बजरबट्टू सम्मेलन पिछले 27 वर्षों से रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर आयोजित होता रहा है। यह सम्मेलन केवल कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। इसमें शहर के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से प्रसिद्ध कवि, शायर और हास्य कवि शामिल होते हैं। सम्मेलन में हजारों की संख्या में श्रोता जुटते हैं और यह होली के उत्सव को एक अलग ही रंग देता है। आयोजकों के अनुसार, इस बार भी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं-प्रचार सामग्री छप चुकी थी, कई कवियों को आमंत्रण भेजे जा चुके थे, और शहर में पोस्टर-बैनर लग चुके थे। लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम निरस्त होना पड़ा।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की असहमति मुख्य वजह
आयोजन समिति के सर्वेसर्वा अशोक चौहान 'चाँदू' और आयोजक अजय लाहोटी ने बताया कि कार्यक्रम के उत्सव मूर्ति के रूप में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सहमति लेने का प्रयास किया गया। समिति ने कई बार मंत्री से मुलाकात की और अनुरोध किया कि वे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि या उत्सव मूर्ति बनें। लेकिन मंत्री ने स्पष्ट असहमति जताई। आयोजकों ने कहा कि मंत्री की असहमति के कारण कार्यक्रम को आगे बढ़ाना संभव नहीं रहा। अंतिम समय में समिति को यह कठिन फैसला लेना पड़ा।
अशोक चौहान ने कहा, "हमने हर स्तर पर प्रयास किया। मंत्री जी से कई बार बात हुई, लेकिन सहमति नहीं मिली। हम नहीं चाहते थे कि कार्यक्रम बिना मुख्य अतिथि के हो, इसलिए निरस्त करना पड़ा। यह हमारे लिए बहुत दुखद है।"
शहर में निराशा और सवाल
इस खबर से साहित्य प्रेमियों और इंदौरवासियों में गहरा दुख है। कई लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि 27 साल पुरानी परंपरा टूटना दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ लोगों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की असहमति पर सवाल उठाए हैं और कहा कि राजनीतिक कारणों से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि आयोजकों को पहले से ही सहमति ले लेनी चाहिए थी।
समिति ने कहा कि वे अगले वर्ष फिर से प्रयास करेंगे और उम्मीद है कि तब कार्यक्रम सफल हो सकेगा। फिलहाल, इस वर्ष रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर महा बजरबट्टू सम्मेलन नहीं होगा, जो इंदौर की सांस्कृतिक कैलेंडर में एक बड़ी कमी है। यह घटना शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप या असहमति के प्रभाव को उजागर करती है। आयोजकों ने कहा कि वे निराश हैं, लेकिन परंपरा को बनाए रखने के लिए आगे भी प्रयास जारी रखेंगे।












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