8 तारीख को करणी सेना का भोपाल में महा आंदोलन, चुनाव से पहले शिवराज सरकार की बढ़ा सकता है परेशानी
भोपाल में 8 जनवरी को करणी सेना परिवार का बड़ा आंदोलन होने वाला है। इसके लिए कई दिनों से करणी सेना के जीवन सिंह शेरपुर तैयारी कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 8 जनवरी को करणी सेना परिवार का बड़ा आंदोलन होने वाला है। इसके लिए कई दिनों से करणी सेना के जीवन सिंह शेरपुर तैयारी कर रहे हैं। यह आंदोलन आर्थिक आधार पर आरक्षण एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव, स्वामीनाथन कमेटी के आधार पर फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने जैसे 22 सूत्री मांगों को लेकर किया जाएगा। आंदोलन भोपाल के जंबूरी मैदान में 8 जनवरी को होना है। इस बीच ग्राउंड को लोहे की चादरों से कवर किया जा रहा है जिस पर करणी सेना के सदस्य जीवन सिंह शेरपुर ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि लोहे की दीवार भी हमें नहीं रुकेगी। हर हाल में आंदोलन होगा। वही भोपाल में करणी सेना के आंदोलन के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह भी आगे आए हैं उन्होंने कहा कि राजपूतों के सम्मेलन को रोकना उनके अपमान की तरह है,यदि रोका तो वे सरकार को चुनाव में जवाब देंगे।

करणी सेना परिवार के सदस्य जीवन सिंह शेरपुर ने जानकारी देते हुए बताया कि वे 7 जनवरी से ही भूख हड़ताल करेंगे इसके लिए पांच-पांच लोगों की टीम बनाई जा रही है यदि हमारी बात नहीं मानी गई और हमें प्रताड़ित किया गया तो करणी सेना चुनाव में उतरने से भी नहीं डरेगी। जितने भी नेता हमारे आंदोलन में बाधा डालने की कोशिश करेंगे, हम उन्हें विधानसभा जीतने नहीं देंगे। विधानसभा चुनावों में करणी सैनिक सभी 230 सीटों पर उतरेंगे और चुनाव लड़ेंगे।
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नीति नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने आंदोलन को दिया समर्थन
करणी सेना के 8 जनवरी को भोपाल में होने वाले आंदोलन को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने समर्थन का ऐलान कर दिया है जंबूरी मैदान को लोहे की चादरों को कमेंट करने को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने निवास पर बुलाकर शासकीय धन का दुरुपयोग कर प्रत्येक जाति समुदाय के सम्मेलन करते हैं इसे मैं उचित नहीं मानता, लेकिन जब राजपूत समाज के लोग अपनी उचित मांगों के लिए शासन के समक्ष अपनी बात कहने आएंगे। गांव गांव और शहर से पैदल चलकर आ रहे हैं, उनके इस सम्मेलन को तानाशाही तरीके से रोकना शिवराज सरकार को शोभा नहीं देता। सरकार लगातार उनके सम्मेलन में व्यवधान उत्पन्न करना चाह रही है। ऐसा करना राजपूत समाज का अपमान करने जैसा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन करने आ रहे राजपूतों का सरकार सम्मान करें और बात सुने उनकी जायज मांगों को माने अन्यथा राजपूत समाज आने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें जवाब जरूर देगा।












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