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Satpura Bhopal: सतपुड़ा भवन में लगी आग ने नगर निगम की खोली पोल, 5 करोड़ रुपये की मशीन बिना ऑपरेटर खड़ी रही

राजधानी के सतपुड़ा भवन में लगी आग पर प्रशासन ने काबू पा लिया हो, लेकिन कई घंटों तक फैली आग ने नगर नगर निगम प्रशासन पर सवाल खड़े कर दी है। दरअसल हाइड्रोलिक मशीन बिना ऑपरेटर के सड़क पर शोपीस बनकर खड़ी रही।

fire in Satpura Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित सतपुड़ा भवन में लगी भीषण आग ने नगर निगम की पोल खोल दी है। दरअसल 5 करोड़ रुपए से मंगाई गई हाइड्रोलिक मशीन जो कि 18 मंजिल तक आग बुझाने का काम कर सकती है, लेकिन उसे चलाने के लिए नगर निगम के पास सक्षम ऑपरेटर नहीं थे। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आग की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए है।

भोपाल के अरेरा हिल्स मंत्रालय वल्लभ भवन के पास स्थित सतपुड़ा भवन में सोमवार शाम करीब 4:30 बजे आग लगने की घटना सामने आई थी इसके बाद नगर निगम और फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू कर दिया था। शाम 6:30 बजे तक आग पर काबू पाने का अधिकारियों ने दावा किया, लेकिन 8 बजे यह आग सतपुड़ा भवन के तीसरे माले से चौथे माले और पांचवें माले पर पहुंच गई।

fire in Satpura building exposed the municipal corporation hydraulic machine remained standing

सतपुड़ा भवन की तीसरी मंजिल पर लगी आग ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय को अपनी चपेट में ले लिया था। तब तक नगर निगम का अग्निशमन विभाग भी पहुंच गया। लेकिन इमारत की अधिक ऊंचाई होने और हवा के विपरीत होने से पानी की बौछारें भी अंदर तक आग तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसे में नगर निगम की 170 फीट ऊंची हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मशीन को बुलाया गया, लेकिन इस मशीन को चलाने के लिए कुशल ऑपरेटर नहीं था। ऐसे में यह मशीन सतपुड़ा के बाहर शोपीस बनकर खड़ी रही।

आग लगने का बड़ा खुलासा

सतपुड़ा भवन में आग लगने के बाद जो जानकारी निकल कर सामने आई उसने सबको हैरान कर दिया। दरअसल सतपुड़ा भवन की इमारत को 60 साल से अधिक समय हो गया लेकिन यहां पर फायर सेफ्टी के उपकरण नहीं है। यदि यहां फायर अलार्म सिस्टम होता तो आग लगने की सूचना समय पर मिल जाती। इस इमारत का अब तक ना तो फायर ऑडिट कराया गया और ना ही एनओसी है। इस 7 मंजिला इमारत में वाटर हाइड्रेंट तक नहीं लगा था। जिससे दमकल को पानी की कमी का सामना भी करना पड़ा और आग बुझाने में देरी हुई।

दफ्तरों को चमकाने में खर्च हुए करोड़ रुपए

बताया जा रहा है कि सतपुड़ा भवन के संधारण और मरम्मत की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग के पास है। हाल ही में यहां स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में करोड़ों रुपए से रिनोवेशन कराया गया है। इतना खर्च करने के बावजूद महज हजार रुपए में आने वाला फायर अलार्म भवन में नहीं लगा पाए। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा को लेकर इस इमारत में कोई व्यवस्था नहीं थी।

सरकारी नियम सिर्फ आम आदमी के लिए ?

सतपुड़ा भवन में लगी आग ने सरकारी दफ्तरों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल सरकारी विभागों में फायर ऑडिट करना और एनओसी देने की जिम्मेदारी पुलिस के अग्निशमन विभाग की है। लेकिन मुख्यालय से महज 100 मीटर दूर स्थित सतपुड़ा भवन का ना तो फायर ऑडिट किया गया और ना ही एनओसी को कभी चेक किया गया। आग संबंधी दुर्घटना से राहत और बचाव की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। बढ़ती बहुमंजिला इमारतों को देखते हुए आग बुझाने के लिए 52 मीटर ऊंची मशीन खरीदी गई। दावा किया गया था कि 18वीं मंजिल तक यह मशीन आग बुझाने में कारगर साबित होगी, लेकिन छह माह बाद भी नगर निगम भोपाल कुशल ऑपरेटर की नियुक्ति नहीं कर पाया है।

कलेक्टर भोपाल आशीष सिंह ने दी जानकारी

कलेक्टर भोपाल आशीष सिंह ने बताया की सतपुड़ा भवन में लगी आग को पूरी तरह से बुझा दिया गया है। हमारी प्राथमिकता थी की कोई जनहानि नही हो और आस पास के क्षेत्रों में आग नही फैले। इसको पूरी तरह से रोक लिया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे समय इस घटना की मॉनिटरिंग की और केंद्र सरकार से आर्मी की भी मदद ली गई, इसके साथ ही सभी एजेंसियों के प्रयासों से आग बुझा दी गई है।

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